सैनी ने खुल्लर को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया और तुरंत वापस लिया, फिर भी भ्रष्टाचारियों में हर्ष की लहर

सैनी ने खुल्लर को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया और तुरंत  वापस लिया, फिर भी भ्रष्टाचारियों में हर्ष की लहर
October 28 07:39 2024

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) नायब सिंह सैनी ने मुख्यमंत्री की शपथ ग्रहण करते ही रिटायर्ड आईएएस राजेश खुल्लर को अपना मुख्य प्रधान सचिव नियुक्त किया साथ ही उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी दे दिया। वरिष्ठ मंत्रियों से लेकर भाजपा के बड़े नेताओं ने खुल्लर को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिए जाने का तगड़ा विरोध किया तो सैनी ने थूक कर चाटते हुए आनन फानन पूरे आदेश को ही रोक दिया।

पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ तीन दिन तक मंथन करने के बाद सैनी ने 21 अक्तूबर को नया नियुक्ति पत्र जारी किया जिसमें खुल्लर को सिर्फ सीएम का मुख्य प्रधान सचिव बनाया गया। प्रदेश में अनेक ईमानदार और योग्य वरिष्ठ आईएएस अफसरों के होने के बावजूद खुल्लर को ही पद सौंपे जाने से यह मानना गलत नहीं होगा कि सैनी भी खट्टर की तरह भ्रष्टाचार को बढ़ावा और भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने वाले हैं।

1988 बैच के आईएएस राजेश खुल्लर चौटाला, हुड्डा, खट्टर से लेकर सभी पार्टियों के शीर्ष नेतृत्व के भी चहेते रहे हैं। इसका कारण उनका शातिराना और भ्रष्ट अंदाज रहा है। बेशक देर से ही सही पर हुड्डा ने इस शातिर बेईमान को पहचान लिया और राज्य से बाहर केंद्र में धकेल दिया। जहां उन्हें कूड़ेदान जैसी तैनाती मिली। बिल्ली भागों छींका टूटा खट्टर भैया हुड्डा की जगह आ बैठे, परिणाम स्वरूप खुल्लर को पुनर्जीवन प्राप्त हो गया। तब उन्हें सीएम खट्टर का अतिरिक्त प्रमुख सचिव बनाया गया। तब से वह मुख्यमंत्री के साथ ही जुड़े हैं, और तरक्की करते हुए मुख्य सचिव से मुख्य प्रधान सचिव तक पहुंच गए। खट्टर के वह इतने प्रिय रहे कि उनकी पत्नी के लिए सीएम ने अपने कद्दावर मंत्री अनिल विज की भी नहीं सुनी। सीएम सैनी को तो उनका काम इतना पसंद आया कि उन्हें कैबिनेट मंत्री तक का दर्जा दे डाला। शासन-प्रशासन में लूट कमाई, भ्रष्टाचार के तरीकों को इस्तेमाल करने और उसको ढंकने छिपाने की कला में माहिर खुल्लर के मुख्य प्रधान सचिव बनने से प्रदेश के भ्रष्ट अधिकारियों व दल्ले-दलालों की पौ बारह हो गई है, नई सरकार में और भी बड़ी लूट कमाई के मंसूबों पर काम शुरू हो गया है।

माना जाता है कि फरीदाबाद नगर निगम में व्यवस्थित रूप से भ्रष्टाचार का आरंभ खुल्लर के यहां बतौर निगमायुक्त तैनाती के दौरान हुआ। निगमायुक्त रहते हुए उन्होंने यहां अयोग्य लोगों को भर्ती किया। यही नहीं पार्कों में झूले, कॅनोपी, लोहे की बेंच लगाने और पेड़-पौधों के रखरखाव आदि का काम नियमों को ताक पर रख कर अपने चहेते ठेकेदार को दिलाया था। ठेकेदारों से तो उनके संबंध इतने मधुर हैं कि वह निगमायुक्त से लेकर जिले के आला अधिकारियों तक को चहेते ठेकेदार का भुगतान कराने के लिए अब भी फोन करते हैं।

यही नहीं शहर के भूमाफिया से भी उनके प्रगाढ़ संबंध रहे हैं। उनके कार्यकाल में नगर निगम मालिकाना वाली करोड़ों रुपये कीमत पर भूमाफिया ने कब्जा कर लिया था। बेशकीमती ज़मीन को बचाने और वापस पाने के लिए एडीए ब्रांच ने बड़ा वकील करने की अनुशंसा की थी, लेकिन खुल्लर ने अवैध कब्जाधारकों को फायदा पहुंचाने के लिए बड़ा वकील करने से ही मना कर दिया था। एडीए की रिपोर्ट में आज भी दर्ज है कि निगमायुक्त खुल्लर द्वारा बड़ा वकील नहीं किए जाने के आदेश के कारण, यह मामला केोर्ट से वापस लिया गया है।

मुख्यमंत्री का प्रधान सचिव रहते हुए खुल्लर निगम में फोन कर ठेकेदारों का भुगतान कराने का दबाव भी बनाते थे। उनके प्रिय ठेकेदार राजपाल को नगर निगम ने मंदिर और धामिैक स्थलों के सामने सोलर लाइट लगाने का ठेका दिया था। कुल 32 लाख रुपये के काम के लिए राजपाल ने 56 लाख रुपये का बिल बनाया था जिसका भुगतान नहीं किया जा रहा था। जून 2024 में खुल्लर ने निगमायुक्त मोना ए श्रीनिवास को फोन कर राजपाल का भुगतान तुरंत करने का आदेश दिया था, उन्होंने आदेश का पालन करते हुए फौरन भुगतान करा भी दिया। यह इकलौता उदाहरण नहीं है, इससे पहले मार्च 2024 में भी खुल्लर ने निगमायुक्त मोना ए श्रीनिवास को फोन कर प्रॉपर्टी आईडी के नाम पर फर्जीवाड़ा करने वाली सिंप्लेक्स सोल्यूशंस कंपनी का रोका गया एक करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान जारी करने का मौखिक आदेश दिया था। पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के करीबी रिश्तेदार की इस कंपनी को 2018 में प्रॉपर्टी आईडी बनाने का काम मिला था। कंपनी ने बिना सर्वे किए ही फर्जी प्रॉपर्टी आईडी तैयार कर नगर निगम को सौंप दी थीं।

नगर निगम के चर्चित दो सौ करोड़ के घोटाले के आरोपियों में एक ठेकेदार सतबीरा भी खुल्लर का करीबी है। निगम सूत्रों के अनुसार सतबीरा को बिना काम भुगतान करने के लिए भी खुल्लर निगम में फोन करते थे। समझा जा सकता है कि सीएम के प्रमुख सचिव रहते हुए खुल्लर केेवल फरीदबाद नगर निगम में ही दख्रल नहीं देते होंगे, बाकी अन्य जिलों के स्थानीय निकाय, प्रशासन व महकमों में भी उनका रसूख चलता होगा, यानी बीते दस साल में खट्टर के रहते उनकी लूट खसोट केवल फरीदाबाद और एमसीएफ तक ही सीमित नहीं रही है बल्कि पूरे राज्य हर महकमे और हर स्थान तक उन्होंने लूट के चैनल विकसित कर रखे हैं। जानकार तो यहां तक बताते हैं कि कुछ समय की अमेरिका तैनाती के दौरान भी वे यहां गाहे बगाहे आकर अपने लूट चैनलों का इस्तेमाल करते थे। बताया तो यहां तक जाता है कि दो सौ करोड़ के घोटाले में चली विजिलेंस जांच को भी इन्होंने आरोपियों के हित में काफी हद तक प्रभावित किया है।

अब नव नियुक्त सीएम नायब सिंह सैनी को निर्णय ले लेना चाहिए कि खट्टर के नक्शे कदम पर चलते हुए लूट का बाजार ऐसे ही चलाए रखेंगे या कुछ परिवर्तन करेंगे? वैसे खट्टर के कारनामों का परिणाम तो सैनी बखूबी देख ही चुके हैं कि साढ़े नौ साल तक मुख्यमंत्री रहने वाले खट्टर को चुनावी सभाओं में मंच पर लाना तो दूर उनका चित्र तक लगाने का जोखिम भाजपा नहीं ले सकी थी। उनके काले कारनामों के चलते चंद शहरी क्षेत्रों को छोड़ कर खट्टर हरियाणा के अधिकांश क्षेत्रों विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में घुस नहीं पाते थे।

एक बार तो घरोंडा में पूरी हरियाणा पुलिस बल लगे होने के बावजूद न केवल उनका हेलीकॉप्टर उतरने से रोक दिया गया बल्कि पंडाल व मंच आदि सब जनता द्वारा तोडफ़ोड़ कर फेक दिया गया था। इसी तरह का एक दृष्य हिसार में भी देखने को मिला था जब जनता द्वारा खदेड़े जा रहे खट्टर आगे आगे और जनता पीछे पीछे दौड़ रही थी। अब यह फैसला सैनी को करना है कि अपनी दुर्दशा खट्टर जैसी ही करानी है या कुछ बेहतर लोकप्रियता हासिल करनी है।

  Article "tagged" as:
  Categories:
view more articles

About Article Author

Mazdoor Morcha
Mazdoor Morcha

View More Articles