फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) 26 नवम्बर को निगमायुक्त धीरेन्द्र खडग़टा ने वार्ड नम्बर 25-26 का दौरा किया। उनके साथ संयुक्त निगमायुक्त राजेश कुमार, क्षेत्र के पार्षद तथा अन्य अधिकारी मौजूद थे। अवैध कब्जों को देख कर निगमायुक्त काफी भड़के और मौके पर ही चालान काट कर भारी जुर्माने लगाए। बेशक निगमायुक्त का यह कदम सराहनीय है, लेकिन प्रश्न यह पैदा होता है कि वे अकेले कितने अवैध कब्जों को देख कर जुर्माने लगा पाएंगे? यदि वे अपनी प्रशासनिक समझदारी एवं दक्षता का इस्तेमाल करें तो अपनी कुर्सी पर बैठे-बैठे ही वे यह सब काम कर सकते हैं। इसके लिए अबैध कब्जेधारियों पर जुर्माने करने से पहले अपने ज्वाइंट कमिश्नर तथा अन्य सम्बन्धित अधिकारियों पर भी जुर्माने लगा देते तो निगम के तमाम अधिकारियों के दो आंखे आगे और दो पीछे हो जाती। यानी कि उन्हें समझ आ जाती कि अपने कर्तव्यों का निर्वहन न करने की सजा उन्हें देने वाला भी कोई है।
यदि निगमायुक्त वास्तव में ही कानून एवं नियमों का पालन कराना चाहते हैं तो उन्हें फरमान जारी कर देना चाहिए कि तमाम छोटे-बड़े अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में इसका पालन करवाएंगे। पकड़े जाने पर वे किसी नागरिक की बजाय सम्बन्धित अधिकारियों पर जुर्माने लगाने व अन्य कड़ी कार्रवाई करने का काम करेंगे। चंद दिनों में ही इसका असर दिखने लगेगा क्योंकि यह किसी से छिपा नहीं है कि कानून एवं नियमों की उल्लंघना निगम अधिकारियों की मिलीभगत के बगैर सम्भव नहीं है, जिसके लिए वे सब लोग मोटी वसूली करते हैं।