पलवल (मज़दूर मोर्चा) तीन महीने पहले खोले गए सनराइज ट्रॉमा सेंटर में कमियां होने के बावजूद संचालन की अनुमति देने के लिए संचालकों से पंद्रह लाख रुपये रिश्वत मांग रहे, सीएमओ जयभगवान जाटान को एसीबी टीम ने रंगेहाथ गिरफ़्तार किया।
लचर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के मद्देनजर शहर की जनता को बेहतर इलाज देने और मोटा मुनाफा कमाने की नीयत से मनोहर, धीरज और सुभाष ने करीब तीन महीने पहले सनराइज ट्रॉमा अस्पताल खोला था। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार नाम तो ट्रामा हॉस्पिटल था लेकिन ट्रॉमा सेंटर के मानक कहीं से पूरे नहीं किए जा रहे थे न स्टाफ, न उपकरण। अब सीएमओ साहब के राज में कोई अस्पताल बिना हिस्सापत्ती दिए जनता को लूटे ये सीएमओ जयभगवान जाटान को कैसे बर्दाश्त होता तो उन्होंने अस्पताल का निरीक्षण कर उसे बंद कराने की धमकी दे डाली। संचालकों ने मान मनौव्वल की तो जाटान साहब ने कह दिया कि अस्पताल चलाना है तो पंद्रह लाख रुपये लगेंगे, यह भी बताया कि इतना धन वो अकेेले नहीं डकारेंगे, ऊपर वालों को भी पहुुंचाएंगे। डील होने के बाद बीस दिन पहले इन लोगों ने सीएमओ के सरकारी आवास पर उन्हें छह लाख रुपये पहुंचा दिए। दो दिन पहले भी एक लाख रुपये और दिए। सीएमओ बाकी के आठ लाख रुपये मांग रहे थे। आय से ज्यादा खर्च देख कर संचालकों ने एसीबी गुडग़ांव में शिकायत दर्ज करा दी। टीम ने जाल बिछाया और शुक्रवार को संचालकों से एक लाख रुपये रिश्वत लेते हुए सीएमओ साहब रंगेहाथ पकड़़े गए।
एसीबी ने सीएमओ को तो रिश्वत लेते पकड़ लिया लेकिन क्या ऊपर के उन अधिकारियों को भी जिन्हें पैसा पहुंचाने की बात जाटान कर रहे थे। एसीबी को सनराइज ट्रॉमा सेंटर की भी जांच करनी चाहिए जो स्वास्थ्य मानकों की धज्जियां उड़ा कर लोगों को लूट रहा है। यदि अस्पताल मानकों के अनुरूप होता तो संचालक इतनी मोटी रिश्वत क्यों देते?