अरावली उजाडऩे वाले मंत्री विपुल गोयल ने किया ‘नेचर वाक’ का ढोंग

अरावली उजाडऩे वाले मंत्री विपुल गोयल ने किया ‘नेचर वाक’ का ढोंग
April 06 11:36 2025

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) जुमलेबाज और झूठी घोषणाएं करने वाले इवेंटजीवी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रेरित डबल इंजन सरकार के कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल ने पर्यावरण संरक्षण के नाम पर दोगलेपन का सुबूत दिया है। पर्यावरण संरक्षण का ढोंग करते हुए एक ओर उन्होंने सेक्टर 15 स्थित नारायण पार्क को मिनी फॉरेस्ट बताते हुए वहां नेचर वाक का इवेंट कर डाला। दूसरी ओर अनखीर में पीएलपीए के तहत संरक्षित जमीन पर उनके फार्म हाउस का निर्माण तेजी से चल रहा है। यह वही फार्म हाउस है जिसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सितंबर 2021 में तोड़ दिया गया था। गोदी मीडिया भी मंत्री को पर्यावरण मसीहा बना कर खुद को धन्य महसूस कर रही है।

बताया जा रहा है कि खुद को युवा पर्यावरणविद् कहने वाले समर्थ खन्ना नाम के युवक ने सेक्टर 15 के इस नारायण पार्क में पेड़ पौधे लगाकर विकसित किया और इसे मिनी फॉरेस्ट का नाम दिया है। गोयल ने मिनी फारेस्ट में ईको सेंटर म्यूजियम का भी उद्घाटन किया। हालांकि किसी भवन का नाम म्यूजियम रखने से वह अजायबघर नहीं बन जाता। यही हाल इस भवन का भी कहा जा सकता है। खैर, विपुल गोयल को तो वाहवाही लूटनी थी, बाद में मिनी फॉरेस्ट रहे या खत्म हो जाए इससे उन्हें कोई लेना देना नहीं होगा। ठीक वैसे ही जैसे पर्यावरण मंत्री रहते हुए साल 2016 में उन्होंने एक दिन में ढाई लाख पौधरोपड़ का नाटक कर किया था और साल 2019 में अरावली में ड्रोन से एक करोड़ बीज छिड़कवाने का पाखंड किया था। ढाई लाख पौधे तो छह महीने में ही मुरझा कर खत्म हो गए और एक करोड़ बीज पडऩे के बाद भी अरावली की हरियाली घटती चली गई। हां इन इवेंट से वह मीडिया में छा गए थे।

सच्चाई यह है कि पर्यावरण मंत्री होते हुए गोयल ने सत्ता का दुरुपयोग कर अनखीर में पीएलपीए संरक्षित वन क्षेत्र में राधास्वामी मंदिर के सटी हुई जमीन पर 11 एकड़ में शानदार फार्म हाउस बना डाला था। यही नहीं खट्टर सरकार ने उनकी और उन जैसे भूमाफिया की जमीन बचाने के लिए फरवरी 2019 में पीएलपीए में संशोधन कर अरावली की लगभग तीस हजार हेक्टेयर जमीन को रियल एसस्टेट और खनन के लिए मुक्त करने का कुत्सित प्रयास किया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी मंशा पर पानी फेर दिया था।

विपुल गोयल का यह फार्म हाउस 2021 में जिला प्रशासन ने तोड़ दिया था और बहाना सुप्रीम कोर्ट के आदेश का लगाया गया था। दरअसल उनका फार्म हाउस उनके राजनीतिक ‘गुरु’ और ‘बड़े भाई’ केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर के इशारे पर तोड़ा गया था। पहली बार विधायक और कैबिनेट मंत्री बने विपुल गोयल की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं से गूजर को अपनी सत्ता हिलती दिखी और फिर गुरु-चेले, छोटे भाई-बड़े भाई के रिश्ते बिगड़ते चले गए थे। हालात यहां तक पहुंच गए थे कि बड़े भाई ने 2019 के विधानसभा चुनाव में उनका टिकट तक कटवा दिया था। हरियाणा भाजपा के राजनीतिक इतिहास में यह पहली घटना थी कि सरकार ने अपने ही पूर्व मंत्री के फार्म हाउस पर बुलडोजर चलवाया।

2024 में खट्टर सहित आला कमान को मोटा नजराना पेश कर विपुल ने टिकट हासिल किया और मंत्री गूजर की भितरघात के बावजूद जीत हासिल कर फिर से कैबिनेट मंत्री का पद हासिल कर लिया। सत्ता में आते ही गोयल ने अपना टूटा हुआ फार्म हाउस दोबारा बनवाना शुरू कर दिया, वर्तमान में उसकी बाउंड्री वाल का काम लगभग पूरा हो चुका है और अंदर भी बड़ी तेजी से निर्माण कार्य चल रहा है। यहां सुधी पाठकों का जानना जरूरी है कि वन विभाग को पीएलपीए संरक्षित अरावली क्षेत्र में हुए अवैध निर्माणों के खिलाफ की गई कार्रवाई की रिपोर्ट इसी महीने के आखिर में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करनी है। दिसंबर 2024 से वन विभाग भी कार्रवाई का पाखंड कर कभी पुलिस बल नहीं मिलने, कभी नगर निगम से अवैध निर्माण का रिकॉर्ड नहीं मिलने तो कभी तोडफ़ोड़ दस्ता नहीं होने के बहानों की रिपोर्ट तैयार कर रहा है। इधर वन विभाग रिपोर्ट तैयार करता रहा उधर मंत्री विपुल गोयल के फार्म हाउस का निर्माण बेरोकटोक जारी रहा।

जानकार कहते हैं कि मंत्री गोयल इस फार्म हाउस का निर्माण करा कर बड़े भाई केंद्रीय मंत्री गूजर को उनकी औकात दिखाना चाहते हैं। गूजर को अहसास दिलाया जा रहा है कि अब प्रशासन उनके साथ नहीं बल्कि कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल के साथ है। यही कारण है कि मंत्री सिर्फ अपना फार्म हाउस ही नहीं बनवा रहे हैं कैलाश बैंसला जैसे गूजर के विरोधी भूमाफिया को भी उनका संरक्षण मिला हुआ है। यही कारण है कि कैलाश बैंसला के अवैध फार्म हाउस पर भी कार्रवाई करने की हिम्मत वन विभाग जुटा नहीं पा रहा है। मज़दूर मोर्चा ने 12-18 जनवरी 2025 के अंक में वन भूमि पर कायम रहेगा सत्ता के दुलारों का कब्जा, सुप्रीम कोर्ट की नाटकबाजी भी चलती रहेगी शीर्षक से प्रकाशित समाचार में विस्तार से इसका उल्लेख किया था। विपुल गोयल को भी मालूम है कि पार्क है तो उसमें पेड़ पौधे लगाए जाएंगे लेकिन अपनी करतूतें छिपाने और सस्ती लोकप्रियता बटोरने के लिए मिनी फॉरेस्ट के उद्घाटन का ड्रामा कर रहे हैं।

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Mazdoor Morcha
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