फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) भ्रष्टाचार के गढ़ नगर निगम में लूट कमाई की बहती गंगा में नए-नए पार्षद भी डुबकी लगाने को आतुर नजर आ रहे हैं। चुनाव आयोग की मूक सहमति से वोट पाने के लिए पानी की तरह पैसा बहाने वाले नए पार्षद अब इसकी भरपाई और ऊपरी कमाई के लिए अधिकारियों को साधने में जुट गए हैं। इनमें सबसे आगे वार्ड नंबर छह की भाजपाई पार्षद गायत्री देवी का नाम चल रहा है। नगर निगम के कर्मचारियों और अधिकारियों में गायत्री देवी की अवैध कमाई की आतुरता को लेकर हंसी-ठिठोली के दौर चल रहे हैं।
भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार वार्ड नंबर 40 बल्लभगढ़ भगत सिंह कॉलोनी निवासी करीब 64 वर्षीय बुजुर्ग गायत्री देवी एनआईटी भाजपा विधायक सतीश फागना के भाई कवींद्र चौधरी की खास हैं। इस कारण सतीश फागना ने उन्हें अपनी विधानसभा के वार्ड छह से भाजपा का टिकट दिलवाया। माना जा सकता है कि जो शख्स खुद दस करोड़ रुपये कीमत की जमीन देकर विधायकी का टिकट लाया हो उसने गायत्री देवी को टिकट मुफ़्त में तो नहीं दिलवाया होगा, सच्चाई जो भी हो गायत्री देवी को चुनाव जितवा दिया गया।
चुनाव जीतने के बाद अभी शपथग्रहण भी नहीं हुआ था कि गायत्री देवी नगर निगम में अधिकारियों से मिलने पहुंच गईं। नगर निगम के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर हंसते हुए बताया कि मैडम अपने वार्ड में विकास कार्य कराने या उनकी जानकारी लेने नहीं आई थीं बल्कि कमाई कैसे की जा सकती है, उसकी जानकारी लेने आई थीं, इसके लिए गायत्री देवी ने जेई जैसा छोटा प्यादा पकड़ा। वार्ड छह के जेई आरिफ से मुलाकात की और उसके सामने अपना दुखड़ा रोया कि चुनाव में पचास लाख रुपये खर्च हुआ है इसकी वसूली कैसे होगी यह बताओ। जेई आरिफ ने खुद को अलग करते हुए बड़े अधिकारियों से मिलने को कहा तो बुजुर्ग पार्षद ने विकास कार्यों में कमीशन का बंटवारा किस प्रकार होता है, पार्षद की हिस्सापत्ती कितनी होती है जैसे सवाल पूछने शुरू कर दिए। बेचारा जेई जन प्रतिनिधि का सम्मान किए जाने के प्रोटोकॉल का पालन करते हुए मैडम को खुश करने में लगा रहा और नगर निगम में चल रहे भ्रष्टाचार और लूट कमाई के टिप्स देता रहा। हालांकि इन बातों की हामी न तो गायत्री देवी कभी भरेंगी और न ही जेई आरिफ स्वीकार करेगा कि मैडम ने उससे पचास लाख रुपयों की भरपाई करने के लिए हिस्सापत्ती मांगी या उसकी तरकीबों की जानकारी मांगी। ये चर्चाएं कितनी सच या झूठ हैं यह तो निष्पक्ष जांच होने पर ही सामने आएगा। मज़दूर मोर्चा भी इन चर्चाओं की पुष्टि या खंडन नहीं करता लेकिन निगम में हर छोटा-बड़ा अधिकारी-कर्मचारी गायत्री देवी की बुढ़ापे में अवैध पैसा कमाने की आतुरता के मजे ले रहा है।
चुनाव आयोग में गायत्री देवी द्वारा जमा किए गए शपथपत्र में उन्होंने खुद को सोना-चांदी के जेवर और केवल 90 हजार नकदी के साथ 31 लाख 43 हजार 499 की मालकिन बताया था। इसके अलावा एक दो सौ गज का घर यानी अचल संपत्ति उनके नाम है। यानी कुल 31 लाख नकदी की मालकिन गायत्री देवी ने चुनाव जीतने के लिए पचास लाख रुपये खर्च किए, समझा जा सकता है कि उन पर यह पैसा धनपशु ठेकेदार, मुनाफाखोर पूंजीपतियों आदि हरामखोरों ने इस उम्मीद पर लगाया होगा कि जीतने के बाद वह उन्हें मोटे मोटे ठेके दिलवाएंगी, सरकारी जमीनों को औनेपौने दामों में दिलवाएंगी, कब्जा करवाएंगी, अवैध निर्माण में उनका सहयोग करेंगी।
गायत्री देवी तो खैर चर्चाओं में आ गईं, नगर निगम में क्या अधिकारी और क्या पार्षद सभी भ्रष्टाचार के दलदल में आकंठ डूबने वाले हैं। इसका बेहतरीन उदाहरण वर्तमान विधायक और पूर्व पार्षद धनेश अदलखा है उसके वित्त कमेटी का सदस्य रहते हुए करोड़ों रुपयों की हेरफेर हुई, दो सौ करोड़ के घोटाले के बाद नया 781 करोड़ का घोटाला फिर सामने आया है, दस, बीस पचास करोड़ के घोटालों की तो शायद अब गिनती भी नहीं की जाती। जब डबल इंजन की सरकार में ही हर स्तर पर भ्रष्टाचार व्याप्त हो, जहां केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर को इसलिए सड़क राज्यमंत्री के पद से हटाया जाता हो कि उन्होंने मोदी के चहेते ठेकेदार से नेशनल हाइवे प्रोजेक्ट में अपने हिस्से से कुछ ज्यादा ही कमीशन मांग लिया हो। दस करोड़ की जमीन गिफ्ट देकर प्रत्याशी विधायकी का टिकट खरीदता हो, वहां ट्रिपल इंजन में भ्रष्टाचार होना लाजिमी ही है। दरअसल अब अधिकतर लोग जनता और देश की सेवा के लिए पार्षद, विधायक या सांसद नहीं बनते बल्कि सत्ता का दुरुपयोग कर जनता की गाढ़ी कमाई की लूट बांट करने के लिए ही आते हैं। अब जब ट्रिपल इंजन सरकार का आगाज ही गायत्री ‘मंत्रÓ से हो रहा है तो फिर अंजाम भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा पर हो तो आश्चर्य नहीं कीजिएगा।