सत्यवीर सिंह फरीदाबाद। शिकागो के शहीदों की याद में एक मई को औद्योगिक नगरी में अंतरराष्ट्रीय मज़दूर दिवस जोश-ओ- खरोश के साथ मनाया गया। इस मौके पर क्रांतिकारी मज़दूर मोर्चा ने आजाद नगर से लखानी चौक तक पैदल मार्च निकाला और विशाल सभा का आयोजन किया गया।
लखानी चौक पर समाप्त हुई मार्च सभा में तब्दील हो गई। मुख्य वक्ता कॉमरेड सत्यवीर सिंह ने सभा को संबोधित कर सरकारी की पूंजीवाद समर्थक और मज़दूर विरोधी नीतियों पर जमकर प्रहार किया। उन्होंने मालिकों पर निशाना साधते हुए कहा कि मज़दूरों के अधिकारों पर हमला किया जा रहा है। मज़दरों में मायूसी छाई है, और वो (मालिक) मायूस देखना चाहते हैं। मज़दूर की मालिक की आंखों में आंख डाल कर बात करने की हिम्मत न हो, ये सुनिश्चित करना चाहते हैं। आप लोग अपना इतिहास देखिए हिटलर को किसने दौड़ा दौड़ा कर मारा था? मज़दूरों ने। मज़दूरों को एक-एक अधिकार बहुत कुर्बानियों से हासिल हुए हैं।
हमारे सभी अधिकार एक झटके में इस सरकार ने छीन लिए। 44 अधिकारी जिसमें यूनियन बनाने का अधिकार, अपना हक मांगने का अधिकार, किसी को चोट लग जाए तो उसको मुआवजे का अधिकार, किसी की मौत हो जाती है तो उसके वारिस का काम देने का अधिकार, ऐसे 44 अधिकार जो मज़दूरों ने कुर्बानियां देकर हासिल किए थे उनको एक झटके में खत्म कर दिया। क्योंकि हम लोग इक_ा नहीं हैं हम एकजुट नहीं हैं और हम लोग जाति-धर्म पे लड़ते हैं। हम उनका औजार बनते हैं, जब तक हम यह नहीं बंद करेंगे, जब तक हम वर्ग एकजुटता का काम नहीं करेंगे। मजदूर-मजदूर है] अगर एक मजदूर को तकलीफ होती है तो दूसरे मजदूर को दर्द होना चाहिए। एकता सिर्फ मज़दूरों में हो सकती है मालिकों में कभी एकता नहीं हो सकती। ये लायंस क्लब में इंडस्ट्री ऐसोसिएशन में इकट्ठे होकर दारू पीते हैं लेकिन एक दूसरे की जड़ें भी काटते हैं।
मजदूर चाहे वह एक साथ रहते हों या दूसरे देश में किसी का किसी से झगड़ा नहीं है। ये हमें बांटते हैं आप अपनी एकता कायम कीजिए। इनकी राजनीति को समझिए और इनके झांसों में न आकर अपनी एकता कायम रखिए। मज़दूरों को अपनी वर्गीय चेतना से लैस होना पड़ेगा और इक_े होकर पूंजी के इस शासन को पूंजी के इस कोल्हू को उखाड़ फेंकेंगे। अंत में सरकार द्वारा छीने गए सभी 44 अधिकारी वापस पाने का दृढ़ संकल्प लिया गया और आसमान मज़दूरों द्वारा लगाए गए नारों- मजदूर एकता जिंदाबाद, कौन बनाता हिंदुस्तान, भारत का मजदूर किसान, मजदूर जब भी जागा है, 26 हजार का न्यूतम वेतन लागू करो, ठेकेदारी व्यवस्था खत्म करो, समाज को बांटने की राजनीति नहीं चलेगी, इंकलाब जिंदाबाद, वक्त आने पे बता देंगे तुझे ऐ आसमां, हम अभी से क्या बताएं क्या हमारे दिल में है। शिकागो के शहीदों को लाल सलाम, मज़दूरों की गौरवशाली विरासत जिंदाबाद से गूंज उठा।