फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चां)। सीपीआई और सीपीएम के कार्यकर्ताओं ने आज अमेरिका की तानाशाही नीतियों के विरोध में लघु सचिवालय, फरीदाबाद पर जोरदार प्रदर्शन किया और जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के बाद कार्यकर्ताओं ने देश की महामहिम राष्ट्रपति के नाम सीटीएम अंकित कुमार को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारी “वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को रिहा करो”, “वेनेजुएला की वैध सरकार को बहाल करो” और “अमेरिकी साम्राज्यवाद मुर्दाबाद” जैसे नारे लगा रहे थे। कड़ाके की ठंड के बावजूद दोनों वामपंथी दलों के कार्यकर्ता सुबह सेक्टर-12 स्थित राजस्थान भवन के सामने एकत्रित हुए, जहां एक विरोध सभा आयोजित की गई। सभा की अध्यक्षता सीपीआई के कामरेड बेचू गिरी ने की, जबकि संचालन सीपीएम के जिला सचिव वीरेंद्र सिंह डंगवाल ने किया। सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने सभी अंतरराष्ट्रीय मानदंडों को ताक पर रखकर 3 जनवरी को वेनेजुएला पर हमला किया। इसके बाद वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को नाजायज तरीके से गिरफ्तार कर न्यूयॉर्क ले जाया गया, जहां उन पर मादक पदार्थों की तस्करी का झूठा मुकदमा बनाकर जेल में बंद किया गया है।
सभा को संबोधित करते हुए सीपीआई के जिला सचिव कामरेड आर.एन. सिंह ने कहा कि अमेरिका वेनेजुएला के तेल भंडारों और खनिज संपदा पर कब्जा करने के लिए वहां की चुनी हुई सरकार को बेदखल कर रहा है, जो किसी भी सूरत में उचित नहीं है। सीपीएम के नेता शिवप्रसाद और नवल सिंह तथा सीपीआई के नेता रामप्रसाद ने संयुक्त रूप से कहा कि अमेरिका का यह कदम वेनेजुएला की निर्वाचित सरकार की संप्रभुता पर सीधा हमला है। सभा के बाद प्रदर्शनकारी लघु सचिवालय पहुंचे, जहां अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पुतला फूंका गया। सभा के समापन पर अध्यक्षीय भाषण में कामरेड बेचू गिरी ने कहा कि हर देश की अपनी सीमाएँ होती हैं, चाहे वह छोटा हो या बड़ा। अपने देश के भीतर सरकार चलाने और अपनी क्षमताओं का उपयोग करने का उसे पूरा अधिकार है। अमेरिका ने वेनेजुएला के साथ जो कुछ किया है, वह वहां की संपदा को हड़पने की मंशा से किया गया है। यदि इसका विरोध नहीं हुआ, तो दुनिया का कोई भी ताकतवर देश किसी भी गरीब देश पर कब्जा कर लेगा। उन्होंने कहा कि इसका परिणाम वही होगा, जैसा ब्रिटिश साम्राज्यवाद के दौर में हुआ था, जब दुनिया के कई देशों को गुलाम बनाकर उनकी संपदा लूटी गई थी। यदि आज इसका विरोध देश और दुनिया के स्तर पर नहीं किया गया, तो दुनिया में अमन-शांति की बजाय एक बार फिर राजा-महाराजाओं के दौर जैसी मारकाट और युद्ध के हालात पैदा हो जाएंगे, जहां एक देश दूसरे देश को हड़पने लगेगा।
कामरेड बेचू गिरी ने कहा कि हम अंग्रेजों के गुलाम रहे हैं और आज़ादी की कीमत जानते हैं। आज़ादी और गुलामी का फर्क इस देश की जनता भली-भांति समझती है। उन्होंने कहा कि हमारे देश की सरकार के मुखिया प्रधानमंत्री हैं, जो करोड़ों-करोड़ों लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा बार-बार की जा रही उनकी बेइज्जती किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे देश की जनता की बेइज्जती है। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप यह अपमान लगातार दोहरा रहा हैं और दुख की बात यह है कि जिनके हाथों में देश की बागडोर है, वे अमेरिका की इन नीतियों का विरोध करने के बजाय उसकी हां में हां मिला रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम जहां अमेरिकी साम्राज्यवाद का विरोध कर रहे हैं, वहीं भारत सरकार की अमेरिका-परस्त नीतियों और देश की जनता की बेइज्जती करने वाले रवैये का भी पुरजोर विरोध करते हैं। भारत सरकार को अमेरिका पर दबाव बनाना चाहिए कि वह वेनेजुएला के गिरफ्तार राष्ट्रपति को तत्काल रिहा करे। इस मौके पर कामरेड निरंतर पराशर, विजय झा, वीरेंद्र पाल, बैजू सिंह, मिथिलेश कुमार, धर्मवीर वैष्णव, केपी सिंह, अनिल कुमार, कामेश्वर ठाकुर, राम तीरथ, विनोद कुमार, दयाल, चंद्र प्रकाश, रामजीत चौधरी, सुरेश यादव, हरिश्चंद्र, शुभ नारायण, शीला देवी, अरुण कुमार, सुरेश मंडल, आकाश, दीपक, शीशपाल, राजेश, रमेश सोनी (प्रतापगढ़), भोपाल सिंह (पर्वतीय कॉलोनी) और प्यारेलाल (महावटपुर) विशेष रूप से मौजूद रहे।