डॉ. रामवीर कभी भारत कृषिप्रधान देश कहा जाता था। यह पुरानी बात है। तब से अब तक गंगा में बहुत पानी बह चुका है और भारत एक मूर्खताप्रधान देश की मंजिल पर पहुंच चुका है। स्वतन्त्रता के बाद चली पंचवर्षीय योजनाओं में कृषि के साथ साथ उद्योगीकरण ने गति पकड़ी, अनेक उद्योगों में उल्लेखनीय प्रगति हुई। एक मूर्खता उद्योग है जो बढ़ न सका।बढ़ता भी कैसे प्रथम प्रधानमन्त्री जवाहरलाल नेहरू ने साइंटिफिक टैंपर जैसी बातें करके मूर्खता उद्योग के लिए उपयोगी वातावरण ही नहीं बनने दिया। ये तो भला हो नोन बायोलॉजिकल प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी जी का कि उन्होंने नेहरू की भूल को पकड़ा और साइंटिफिक टैंपर के आगे नोन जोड कर देश को नोन सांइटिफिक टैंपर की सौगात दी।यही नोन उन्होंने बायोलोजिकल के आगे जोड़ कर पहले स्वयं को अमर किया और फिर नेहरू की गलती दुरुस्त की। देश का नब्बे प्रतिशत नोन (नून) यानी नमक गुजरात में ही होता है, स्वाभाविक है नोन सांइटिफिक – नोन बायोलॉजिकल जैसे नोन की बल्क सप्लाई भी गुजरात से ही सम्भव है। देश में एक तरह का मूर्खता आन्दोलन चल रहा है। स्वघोषित तत्त्वद्रष्टा सन्त रामपाल, आसाराम, राम रहीम आदि की कड़ी में नया नाम धीरेन्द्र शास्त्री का जुड़ा है, यह युवा है इसलिए सरकार को भी इसमें अधिक सम्भावना दिखी और सरकार इसे सहयोग दे रही है ताकि भारत को धर्मान्ध बनाने में इसका उपयोग किया जा सके। यह बुंदेलखंडी पाखंडी पर्ची निकाल कर भविष्य बताने जैसे तमाशों से मूर्ख बनाता है। इसका दावा है कि यह हनुमान् जी से फोन पर बात करता है। अपने गृहनगर फरीदाबाद से इसकी हिन्दू जगाओ यात्रा गुजरने पर इसकी ओर ध्यान गया तो अनुभव हुआ कि मूर्ख बनाने और मूर्ख बनने दोनों में ही मजा आता है,आनन्द मिलता है। भारत की आध्यात्मिक परम्परा के बीज शब्द सच्चिदानन्द (सत्, चित्, आनन्द) में से सत् और चित् को छोड़ कर केवल आनन्द को धार्मिक उन्माद में बदलने का प्रयास है हिन्दू जगाओ यात्रा। मूर्ख बनाने और मूर्ख बनने दोनों में ही समान आनन्द की अनुभूति उस स्थिति में पहुंचा देती है जिसे फूल्स पैराडाइज कहा जाता है। मानव इतिहास में पैराडाइज, स्वर्ग, जन्नत किसी भी नाम से कहो ‘करैट एंड डंकी’ दृष्टान्त वाली गाजर है, खाने को मिले न मिले पर मिलने की आशा में मानवगर्दभ गतिमान रहता है।
बुद्धिमान् की एक परिभाषा यह है कि वह दूसरों की गलती से सीखता है। क्या भारत पाकिस्तान से कुछ सीख सकता है ? इस्लामिक स्टेट की कल्पना में जिन्ना ने जो पाकिस्तान बनाया/बनवाया वह जिया उल हक को पूरा मुस्लिम नहीं लगा लिहाजा अहमदियों (कादयानियों) को गैर मुस्लिम घोषित करवा दिया। अहमदी सर्वाधिक शिक्षित थे और पाकिस्तान बनाने में अति उत्साही थे। अब हालत यह है कि शियाओं की मस्जिदों में बम फट रहे हैं सुन्नी स्वयं भी चैन से नहीं हैं। हिन्दू राष्ट्र का सपना देखने वाले सोच लें हिन्दू राष्ट्र में शैवों वैष्णवों को कौन समझाएगा। स्वामी योगेश्वरानन्द गिरि के वीडियो देखे जा सकते हैं जिनमें वे स्वामी प्रेमानन्द जैसे वैष्णवों को हिन्दू हित विरोधी बता रहे हैं और बलिप्रथा की वकालत कर रहे हैं। हिन्दू राष्ट्र में आर्यसमाजी तो पाकिस्तान के अहमदियों जैसे होंगे, सर्वाधिक शिक्षित पर सर्वाधिक उपेक्षित। मूर्ख बनाने और मूर्ख बनने की लत लग जाए तो छूटती नहीं। भर्तृहरि ने निराशा में ही ‘मूर्खस्य नास्त्यौषधम्’ (मूर्ख की दवाई नहीं) कहा होगा।