जज ने वह कहा — जो शायद ही कभी किसी अदालत ने इतनी साफगोई से कहा हो।
जस्टिस माधव जामदार ने कहा — ‘‘नागरिकों को भारत सरकार का गुलाम बनाया जा रहा है। वे प्रदर्शन नहीं कर सकते, आंदोलन नहीं कर सकते — यह क्या है?’’
मामला क्या था
स्शष्द्बड्डद्यद्बह्यह्ल ष्ठद्गद्वशष्ह्म्ड्डह्लद्बष् क्कड्डह्म्ह्ल4 शद्घ ढ्ढठ्ठस्रद्बड्ड के महासचिव सईद अहमद अब्दुल वहीद चौधरी ष्ट्र्र और ज्ञानवापी विवाद के खिलाफ मोर्चे और धरने आयोजित कर रहे थे।
मुंबई पुलिस ने उन्हें एक साल के लिए जिला बदर कर दिया — पांच स्नढ्ढक्र के आधार पर जो ज़्यादातर सरकार विरोधी प्रदर्शनों के लिए थीं।
जस्टिस जामदार ने यह आदेश देखा। और आगबबूला हो गए। जज ने जो कहा — वह इतिहास में दर्ज होगा
‘’याचिकाकर्ता ने तो सिर्फ ‘क्चछ्वक्क त्रश1द्गह्म्ठ्ठद्वद्गठ्ठह्ल रूह्वह्म्स्रड्डड्ढड्डस्र’, ‘्रद्वद्बह्ल स्द्धड्डद्ध रूह्वह्म्स्रड्डड्ढड्डस्र’ जैसे नारे लगाए। नागरिक ऐसे नारे क्यों नहीं लगा सकते? ऐसे नारों के लिए जिला बदर आदेश क्यों?’’
‘‘पुलिस मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री की सेवक नहीं है — वे जनसेवक हैं। मैं आपके अधिकारियों पर भारी जुर्माना लगाऊंगा।’’ ‘‘अगर लोग विरोध करें तो आप केस थोप देंगे — यह क्या है? नागरिकों का प्रदर्शन करना उनका अधिकार है।’’
फैसला
जस्टिस जामदार ने अपने आदेश में लिखा — ‘‘सरकार के फैसलों का विरोध करने और उसके खिलाफ नारे लगाने मात्र से किसी नागरिक को जिला बदर नहीं किया जा सकता। यह कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण है और संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।’’
जिला बदर आदेश रद्द। यह फैसला इतना बड़ा क्यों है
आज के भारत में — जहाँ असहमति को देशद्रोह कहा जाता है।
जहाँ विरोध प्रदर्शन पर ्रक्क्र लगाया जाता है।
जहाँ “क्चछ्वक्क मुर्दाबाद’’ कहने पर जिला बदर किया जाता है। एक जज ने खड़े होकर कहा — नागरिक गुलाम नहीं हैं। विरोध करना — अधिकार है।
गड्डे दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस वे पर नहीं हमारी आपकी चेतना में पड़े हैं. नहीं तो एथनॉल मंत्री नितिन गडकरी को अब तक कुर्सी छोडक़र नागपुर भागना पड़ता.
विश्वदीपक
कम लोगों को मालूम है कि गडकरी को महान साबित करने के लिये चलाये गये तमाम प्रॉपगंडा के बावजूद भारत सडक़ निर्माण के मामले में बांग्लादेश, श्रीलंका, नाइजीरिया जैसे देशों के समकक्ष है. चाहे बात लागत की हो या गुणवत्ता की.
एथनॉल मंत्री ने 12000 करोड़ की लागत से दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस वे बनवाया. प्रधान उद्घाटन मंत्री, नरेन्द्र मोदी ने 14 अप्रैल 2026 को उसका उद्घाटन किया. अभी तीन महीने भी नहीं बीते कि उसमें गड्ढे पड़ गये.
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस वे की लंबाई है 213 किलोमीटर. लागत – 12000 करोड़. मतलब करीब 57 करोड़ प्रतिकिलोमीटर की लागत से दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस वे बना.
अमरीका में भी फोर लेन एक्सप्रेस वे बनाने की लागत लगभग इतनी ही आती है. लेकिन गुणवत्ता में ज़मीन आसमान का फर्क है. अमरीका का नाम इसलिये लिख रहा हूं क्योंकि गडकरी ने कहा था कि 2024 के अंत तक भारत का रोड इन्फ्रॉस्ट्रक्टर अमरीका के बराबर होगा. हुआ? अब तो 2026 भी आधा बीत गया.
अमरीका छोडि़ए कई बार तो तस्वीरें देखकर लगता है कि पाकिस्तान की सडक़ें भी भारत से बेहतर हैं.
भारत उन देशों में शामिल हैं जहां सडक़ें सबसे खराब हैं लेकिन निर्माण लागत सबसे ज्यादा है. इसलिये नहीं कि सडक़े बहुत अच्छी क्वालिटी की बनाई जाती हैं बल्कि इसलिये क्योंकि भ्रष्टाचार बहुत है. आज भारत में सडक़ निर्माण में हो रही लूट कल्पना से परे है.
एक छोटा सा उदाहरण याद आ रहा है. जब द्वारका एक्सप्रेव बनाने का प्रस्ताव पास हुआ तब यह अनुमान लगाया गया था कि 18 करोड़ प्रति किलोमीटर की लागत आएगी. लेकिन जब बनकर तैयार हुआ तो पता चला कि एथनॉल मंत्री, जिनके पास सडक़ बनवाने का ठेका मंत्रालय भी है, उन्होंने द्वारका एक्सप्रेव का एक किलोमीटर बनवाने में 250 करोड़ रुपये खर्च किये.
कहां 18 करोड़, कहां 250 करोड़?
हंगामा हुआ तो सफाई दी गई कि बाद में एक्सप्रेव वे को एलिविटेड बना दिया गया इसलिये लागत बढ़ गई. क्यों बना दिया एलिविटेड? अगर एलिविटेड भी बनवाया तो क्या उसमें सोना-चांदी मढ़वाया था?
18 करोड़ प्रति किलोमीटर की लागत बढक़र 250 करोड़ प्रति किलोमीटर कैसे हो सकती है? प्रति किलोमीटर 232 करोड़ का खर्चा. इस आंकड़े को फिर से पढि़ए – द्वारका एक्सप्रेव वे बनवाने में निर्माण लागत 232 करोड़ प्रति किलोमीटर बढ़ गई.
यह पैसा कहां गया होगा? कौन है जो इस देश को लूट रहा है?
सडक़ निर्माण में लागत के मामले में बांग्लादेश, श्रीलंका, नाइजीरिया जैसे देश हैं जो भारत से आगे हैं. आप समझ सकते हैं कि तीसरी दुनिया के इन छठे,सातवें दर्जे के देशों में सडक़ निर्माण क्यों मंहगा है.
आपको जानकर हैरानी होगी कि ढाका बीआरटी कॉरिडोर दुनिया का सबसे महंगा कॉरिडोर है.
सिर्फ कल्पना ही की जा सकती है कि इस समय भारत में हो रहे सडक़/एक्सप्रेस वे निर्माण में भ्रष्टाचार का आलम क्या होगा. गडकरी जी उसी के दुनिया के आलमगीर हैं.
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस वे में जो गड्ढे पड़े हैं उनको देखकर दुखी मत होइये.
बस यह याद रखिये कि गड्ढे दिल्ली-
देहरादून एक्सप्रेस वे पर नहीं हमारी
आपकी चेतना में पड़ चुके हैं जो हर
दिन और गहरे और विकराल होते जा रहे हैं.