फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) मातहतों से महंगे गिफ्ट, ज्वैलरी, लहंगे आदि लेने की शौकीन निगमायुक्त मोना ए श्रीनिवास ने शहर में लगने वाले अवैध साप्ताहिक बाजारों पर कड़ी कार्रवाई करने का आदेश जारी किया, न कि पूरी तरह से बंद करने का। दरसअल, पूरे शहर में लगने वाली अवैध बाजारें सत्तापक्ष के नेताओं के गुर्गों द्वारा ही लगवाई जाती हैं इसलिए मैडम उन्हें बंद कराने की हिम्मत नहीं कर सकीं। उनका आदेश मिलते ही मातहत बाजारों पर कार्रवाई करने उतर पड़े। मैडम के आदेश के नाम पर दुकानदारों से वसूली की राशि बढ़ाए जाने की चर्चा जोरों पर है।
शहर में रोजाना किसी न किसी जगह दिन के नाम पर बाजारें लगती हैं। बाजारें लगाने का यह धंधा बहुत ही योजनाबद्ध ढंग से चलता है। नगर निगम की जमीन होने के कारण कार्रवाई नहीं करने के लिए निगम के जेई, एसडीओ को मोटी रकम भेंट की जाती है। जाहिर है हर महीने होने वाली दसियों लाख की कमाई जेई, एसडीओ जैसे छोटे अधिकारी अकेले हजम नहीं कर सकते, वह अपना छोटा सा हिस्सा लेकर बाकी ऊपर पहुंचा देते हैं।
नगर निगम की जमीन पर बाजार लगवाने वाले दबंगों को सत्ताधारी नेताओं का संरक्षण प्राप्त है। ये दबंग प्रत्येक दुकानदार से एक टेबल के 60-110 रुपये वसूलते हैं अंधेरे में बल्ब जलाने के लिए प्रति लाइट तीस से पचास रुपये अलग वसूले जाते हैं। सफाई का खर्च भी दुकानदारों से अलग से वसूला जाता है। दंबंगों द्वारा की गई इस वसूली में स्थानीय थाने की पुलिस, निगम के सफाई कर्मियों की हिस्सापत्ती होती है। नेताजी को भी हिस्सापत्ती मिलती है इसके अलावा उनके लिए लोगों को धमकाना, भीड़ जुटाने का काम भी बाजार से वसूली करने वाले दबंगों को करना पड़ता है।
निगम में चर्चा जोरों पर है कि अचानक मैडम की ऊपरी कमाई की भूख बहुत बढ़ गई है, किसी भी शिकायत में वह कमाई का कोण तलाश ही लेती हैं। बीते मंगलवार समाधान शिविर में सेक्टर 52 से आए कुछ लोगों ने अवैध साप्ताहिक बाजार लगने की शिकायत की, जिस पर मैडम ने कार्रवाई के आदेश जारी कर दिए। भरोसेमंद सूत्रों के मुताबिक सत्तापक्ष के नेताओं के संरक्षण में चलने वालो बाजार बंद तो होंगे नहीं इसलिए शिकायत के बहाने वसूली के दाम बढ़ाए जाएंगे। मोटे तौर पर अभी तक एक दुकानदार से टेबल, बल्ब, सफाई आदि के नाम पर औसतन 170 से 250 रुपये तक वसूले जाते थे लेकिन अब 225 से 300 रुपये तक लिए जाएंगे। यह बढ़ी हुई रकम दुकानदार भी अपनी जेब से नहीं देंगे बल्कि सामान की कीमत बढ़ाकर आम जनता से वसूलेंगे। वसूली राशि में इजाफा होने से नगर निगम के अधिकारी और भी महंगे गिफ्ट, आभूषण, ब्रांडेड कपड़े खरीद सकेंगे।