स्वजातीय मंत्रियों का है साथ तो नियम कानून की क्या बिसात

स्वजातीय मंत्रियों का है साथ तो नियम कानून की क्या बिसात
March 04 16:15 2026

बड़ौली गांव में अपनी ही जमीन पर कब्जा नहीं ले पा रहा हूडा
फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) बड़ौली गांव के रकबे में स्थित सेक्टर 80 में हूडा अपने आवंटियों को प्लॉट मुहैया नहीं करवा पा रहा है। कारण, यहां अधिग्रहीत की गई जमीन पर ग्रामीण कब्जा नहीं छोड़ रहे हैं, उल्टे हूडा पर जमीन खाली करने का दबाव बनाया जा रहा है। बीते दिनों वीरपाल गूजर की अगुवाई में हुए प्रदर्शन में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस टीम से हाथापाई की। यह सारी हिम्मत दरअसल, इन लोागों को सजातीय केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर और मंत्री राजेश नागर की सहमति के कारण मिल रही बताई जाती है। मंत्रियों का ही रुतबा रहा कि पुलिस टीम पर हमला किए जाने के बावजूद प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई केस दर्ज नहीं किया गया। इन हालात में हूडा क्या कब्जा वापस लेगा समझा जा सकता है।

हूडा सूत्रों के अनुसार प्राधिकरण ने वर्ष 2005 में बड़ौली गांव में सेक्टर 80 के लिए जमीन अधिग्रहीत की थी। तब किसानों को छह सौ रुपये प्रति वर्ग गज की दर से मुआवजा भी अदा किया गया था।
हूडा ने सेक्टर में आधारभूत ढांचा बनाया लेकिन प्लॉटिंग में देरी की। हूडा के अधिकारियों का निकम्मापन यह रहा कि अधिग्रहण के बाद कब्जा लेने में हीलाहवाला किया गया। इसका नतीजा यह हुआ कि ग्रामीणों ने जमीन से कब्जा नहीं छोड़ा। जानकारों के अनुसार हूडा अधिकारियों ने जमीन कब्जा मुक्त कराने के गंभीर प्रयास भी नहीं किए। हालांकि हूडा का सेक्टर घोषित होने के कारण उस इलाके में प्रॉपर्टी डीलरों ने भी आसपास के इलाके में जमीनों की खरीद फरोख्त और प्लॉटिंग शुरू कर दी, जिस कारण जमीन के दाम बढऩे लगे।

2014 में केंद्र और राज्य में भाजपा सत्तासीन हुई और सीएम खट्टर ने हूडा की कमान संभाली। जमीन माफिया की कठपुतली की तरह काम कर रहे खट्टर वैसे तो हूडा की जमीनों को कब्जा मुक्त कराने के दावे करते रहे लेकिन शायद ही धरातल पर कोई कार्रवाई की हो। कभी जमीन खाली करवाने की कोई कार्रवाई की भी तो लीडर से डीलर बने भूमाफिया केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर बड़ौली के सजातीय ग्रामीणों को बचाने लग गए। हूडा के निकम्मे और हरामखोर अधिकारियों ने भी जमीन को कब्जा मुक्त कराने के गंभीर प्रयास नहीं किए। जानकारों के अनुसार यदि अधिकारी गंभीर होते तो अधिग्रहण के बाद तुरंत कब्जा लेते। जो कब्जा नहीं छोड़ता उससे बाजार दर पर जमीन का किराया वसूला जाता, या उसके खिलाफ तोडफ़ोड़, जुर्माना वसूली आदि की कार्रवाई की जाती, लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया गया।

हूडा अधिकारियों की दूसरी गलती यह रही कि बिना कब्जा लिए ही 2022-23 में उन्होंने ई ऑक्शन कर 65 हजार से 70 रुपये प्रति वर्ग गज की दर से प्लॉट बेच दिए। खरीदारों से मोटी रकम वसूल ली लेकिन आज तक उन्हें प्लॉट उपलब्ध नहीं कराए। जानकारों के अनुसार हूडा अधिकारियों ने ई ऑक्शन सत्तापक्ष के भूमाफिया और प्रॉपर्टी डीलरों को लाभ पहुंचाने के लिए किया था। हूडा प्लॉटों के ई ऑक्शन के बहाने से इलाके में जमीन की मांग बढ़ाई गई। बताया जा रहा है कि वर्तमान में बड़ौली इलाके में जमीन का दाम डेढ़ से दो लाख रुपये प्रति वर्ग गज तक पहुंच चुका है। हूडा के प्लॉट खरीदने वाले कब्जा पाने को तरसते रहे और आसपास की जमीन को केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर और मंत्री राजेश नागर के चहेते भूमाफिया ने ऊंचे दामों पर बेच कर मोटे पैसे बनाए। इधर, हूडा की जमीन पर कब्जा जमाए लोग भी जमीन की ऊंची कीमत देख बेईमानी पर उतर आए। भूमि अधिग्रहण के खिलाफ अदालत गए लेकिन वहां मुंह की खानी पड़ी, अदालत ने हूडा के हक में फैसला दिया। बावजूद इसके ग्रामीण कब्जा नहीं छोड़ रहे हैं। कहा जा रहा है कि यह सारा खेल भूमाफिया मंत्री गूजर और राजेश नागर के इशारे पर किया जा रहा है, ये मंत्री वोट बैंक के लिए अपने सजातीय ग्रामीणों को उकसावा देकर न केवल सरकारी कार्रवाई में बाधा डालते हुए असल खरीदारों के हकों पर डाका डाल रहे हैं, ऐसे स्वार्थी राजनेताओं के लिए कानून और न्यायपालिका कोई मायने नहीं रखती।

वैसे तो गूजर और नागर में छत्तीस का आंकड़ा है लेकिन बड़ौली के मामले में दोनों अवैध कब्जा धारकों का खुल कर समर्थन कर रहे हैं। मंत्री राजेश नागर ने तो 25 दिसंबर 2025 को अधिग्रहण विरोधी धरने में जाकर यह आश्वासन तक दिया था कि ई ऑक्शन में आवंटित प्लॉट रद्द करवा देंगे और आवंटियों को भी रकम वापस करा देंगे। यह तब है जब मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। प्लॉट न मिलने पर कई आवंटियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, कोर्ट ने हूडा को नोटिस जारी किया है, मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को होनी है। इस संबंध में जानकारी लेेने के लिए हूडा स्टेट अफसर नवीन कुमार को कई बार कॉल की लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।

इन मंत्री नेताओं और सत्ता का ही साथ है कि जिस महकमे का मुखिया सीएम नायब सिंह सैनी हो उसके ही अधिकारी अपनी जमीन कब्जा मुक्त नहीं करा पा रहे हैं और प्रदर्शनकारियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वह पुलिस से भी हाथापाई कर रहे हैं। सरकार के लिए इससे शर्मनाक स्थिति हो नहीं सकती, जहां उसके आदेशों की धज्जियां उड़ाई जाएं बल्कि उसकी पुलिस को भी खदेड़ दिया जाए। यदि सरकार में अपने आदेशों की पालना कराने की ताकत नहीं है तो क्यों पुलिस को उसकी बेइज्ज्ती कराने केे लिए वहां भेजती है। यह भी सच्चाई है कि ये दोनों मंत्री बड़ौली वालों का समर्थन इसलिए नहीं कर रहे हैं कि उन्हें जमीन दिलानी है, बल्कि इसलिए लगे हैं कि यदि वह ढीले पड़े तो दूसरा वाला श्रेय ले जाएगा। केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर हों या मंत्री राजेश नागर दोनों सत्ता की आड़ में जमीन का ही धंधा कर रहे हैं।

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Mazdoor Morcha
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