फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) बीके अस्पताल में सक्रिय रेफर गैंग के दलाल सोनू ने बीते शनिवार की रात चोट का इलाज कराने पहुंचे सलीम को बहला फुसला कर चिमनी बाई स्थित एक नर्सिंग होम पहुंचा दिया। निजी अस्पताल ने साधारण सी चोट के इलाज के चालीस हजार रुपये बता दिए तो शुभचिंतक सलीम को लेकर एक बार फिर बीके अस्पताल पहुंचे। यहां उसका मुफ्त में इलाज हो गया। सोनू, उसी एंबुलेंस चालक मुकेश का पक्का साथी है जिसने मज़दूर मोर्चा डिजिटल रिपोर्टर के खिलाफ एसजीएम नगर थाने में उसे दलाल कहकर अपमानित करने की झूठी शिकायत दे रखी है। सवाल यह है कि क्या अब एसएचओ एसजीएम नगर दलाली में रंगेहाथ पकड़े गए सोनू के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
आदर्श कॉलोनी निवासी सलीम की सैनिक कॉलोनी में फैब्रिकेटर शॉप है। बीते शनिवार देर शाम वह किसी एल्युमिनियम फ्रेम में शीशा फिट करने का प्रयास कर रहा था। इस दौरान शीशा टूट कर उसकी कलाई में धंस गया। साथी गुलफाम ने परिजनों को सूचना दी और सलीम को लेकर सीधे बीके की इमरजेंसी पहुंचा। सलीम के मुताबिक इमरजेंसी रूम में चश्मा पहने एक युवक पहले से ही मौजूद था, बाद में उसका नाम सोनू पता चला। डॉक्टर सलीम की पट्टी कर रहा था कि सोनू उसे अपने साथ बहला फुसला कर अस्पताल परिसर के पीछे ले गया। डराया कि यहां इलाज नहीं है हाथ को नुकसान हो सकता है, चलो तुम्हें अच्छे अस्पताल ले चलते हैं जहां बेतहरीन इलाज हो जाएगा। घबराया सलीम कुछ समझ पाता सोनू ने ऑटो बुलाकर सलीम और गुलफाम को साथ में बैठाया और चिमनीबाई स्थित नर्सिंग होम में छोड़ कर चला गया। नर्सिंग होम वालों ने ऑपरेशन कर नस जोडऩे की बात कह चालीस हजार रुपये जमा करवाने को कहा। इस दौरान परिवार के रफीक भी पहुंच गए। उन्होंने नर्सिंग होम में इलाज कराने से मना कर दिया और सलीम को दोबारा बीके अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां डॉक्टर ने उसकी पट्टी कर दी और दवाएं लिख कर भेज दिया।
बीके अस्पताल में चल रही दलाली से नाराज रफीक ने सोनू की शिकायत सीएमओ से करने और कार्रवाई न होने पर स्वास्थ्य मंत्री आरती राव तक मामला उठाने की बात कही है। सलीम की मानें तो दलाल सोनू बीके के इमरजेंसी रूम में पहले से ही मौजूद था। समझा जा सकता है कि दलाली का यह खेल इमरजेंसी में मौजूद डॉक्टर व स्टाफ की मदद से ही खेला जाता है। यही कारण है कि इमरजेंसी रूम में सोनू मौजूद था और अस्पताल स्टाफ ने उसे भगाया नहीं। सलीम के अनुसार इमरजेंसी में उसे इलाज दिया जा रहा था इसी दौरान काम रुकवा कर सोनू उसे अपने साथ ले गया। यदि कोई और होता तो अस्पताल का स्टाफ उसे इलाज मेंं दखल न देने की बात कह धमका कर बाहर निकाल देता लेकिन सोनू तो काम रुकवा कर अपने साथ ले गया, सीधी सी बात है कि मरीजों को नर्सिंग होम पहुंचा कर हिस्सापत्ती लेने का खेल स्टाफ की मिलीभगत से चल रहा है।
बीके में चल रहे दलाली के खेल में पीएमओ-सीएमओ की चुप्पी से लगता है कि या तो ये अधिकारी अक्षम हैं या फिर इन्हें भी हिस्सापत्ती पहुंचती है। इमरजेंसी से लेकर हर वार्ड में सीसीटीवी कैमरे क्या सिर्फ शोपीस के रूप में लगाए गए हैं? पीएमओ-सीएमओ अपने कार्यालय में बैठकर सीसीटीवी कैमरों के जरिए हर जगह पर नजर रखते हैं, उन्हें इमरजेंसी रूम में बैठे दलाल नजर क्यों नहीं आते? इन दलालों को हटवाने की व्यवस्था क्यों नहीं की जाती। सीएमओ पीएमओ को कम से कम यह भी तो जांच करनी चाहिए कि जिन मरीजों को रेफर किया गया है क्या सच में उनका इलाज बीके में नहीं हो सकता था? समझने वाली बात यह भी है कि सलीम को तो रेफर भी नहीं किया गया, उसका इमरजेंसी पर्चा बना-बनाया छोड़ सोनू उसे ऐसे ही उड़ा ले गया। पीएमओ-सीएमओ को इस पर भी नजर रखनी चाहिए कि कितने मरीज इमरजेंसी में आए और बिना पूरा इलाज कराए चले गए, स्टाफ ने उन्हें बिना इलाज दिए जाने क्यों दिया? यदि विस्तार से जांच होगी तो सोनू जैसे दलालों का पूरा गैंग सक्रिय पाया जाएगा।
मज़दूर मोर्चा के डिजिटल रिपोर्टर शेखर दास के खिलाफ शिकायत की जांच करने एनआईटी तीन चौकी आए एसएचओ एसजीएम नगर को याद होगा कि शिकायतकर्ता निजी एंबुलेंस चालक मुकेश के साथ चौकी में यही सोनू भी आया था। बीके अस्पताल परिसर और इमरजेंसी में भी दोनों अक्सर साथ दिख जाते हैं। सलीम के मामले में सोनू पर दलाली के खुले आरोप लग रहे हैं, अपनी जांच में यदि ये बिंदु भी शामिल करेंगे तो उन्हें स्पष्ट हो जाएगा कि बीके अस्पताल में दलाल गैंग सक्रिय है जिसे उसका विरोध करने वाले सतीश चोपड़ा और सच्चाई दिखाने वाले मज़दूर मोर्चा से परेशानी है।