गाज़ा के भूखे, बिलखते, बेहाल बच्चों की हत्यारी ‘ग्लोबल ह्यूमेनिटेरियन फाउंडेशन’ आखिऱ है क्या बला?

गाज़ा के भूखे, बिलखते, बेहाल बच्चों की हत्यारी ‘ग्लोबल ह्यूमेनिटेरियन फाउंडेशन’ आखिऱ है क्या बला?
September 25 06:22 2025

क्रांतिकारी मज़दूर मोर्चा
2025 के जनवरी महीने तक गाज़ा में नरसंहार तो चल रहा था, लेकिन भुखमरी नहीं फैली थी। फिलिस्तीनियों के नस्ली सफाए की, इसरायली-अमेरिकी परियोजना को जल्दी से पूरी होने के लिए, गाज़ा में भुखमरी फैलनी ज़रूरी थी। इजराइल-अमेरिका; बिना वक़्त गंवाए, गाज़ा के 22 लाख लोगों को भुखमरी और नाजिय़ों की तजऱ् पर, कम गोला बारूद के इस्तेमाल से, ज्यादा से ज्यादा फिलिस्तीनी क़त्ल किए जा सकें, इस परियोजना पर लग गए। इजराइल नाम का घृणित देश, 1948 में वज़ूद में आया, और तुरंत ही उसने अपना असली रूप दिखा दिया. वहां के मूल निवासी, बेक़सूर और अमनपसंद फिलिस्तीनियों का भयानक, क़त्ले आम किया, जिसे ‘नक़बा’ (प्रलय) कहा जाता है. अपनी ही ज़मीन पर शरणार्थी बन चुके, बेहाल फिलिस्तीनियों को बसाने के लिए, 1949 में, ‘संयुक्त राष्ट्र संघ की पूर्वी फिलिस्तीनी शरणार्थियों की मदद एवं सहायता संस्था’ (United Nation’s Relief and Works Agency for Palestine Refugees in the Near East,UNRWA), वजूद में आई. इस संस्था के कर्मचारी, अपनी जान हथेली पर रखकर, भयानक जंग के बीच भी, भूखे-बेहाल फिलिस्तीनियों तक खाने की सामग्री पहुंचा रहे थे. 300 से ज्यादा कर्मचारी इसरायली फौज द्वारा मारे जा चुके हैं. भुखमरी फ़ैलाने की इसरायली-अमेरिकी नाज़ी परियोजना, इस संस्था NRWA के वहां से भगाए बगैर पूरी नहीं हो सकती थी.

वित्तीय पूंजी के ख़ूनी लुटेरों की परियोजना अधूरी रह जाए, ऐसा कैसे हो सकता है? फिलिस्तीनियों का भाड़े का एक अपराधी गैंग तैयार किया गया. उस गैंग को, हथियार लहराते हुए, राहत सामग्री को लूटते हुए दिखाया गया, विडियो बनाए गए और साधन संपन्न, पालतू पश्चिमी मीडिया के गले का पट्टा खोल दिया गया. मीडिया स्टूडियो में बुद्धि बेचकर पेट भरने वाले, गरमागरम बहसों में, एक दूसरे के कुर्ते फाडऩे लगे; ‘गाज़ा में फिलिस्तीनियों के साथ न्याय करने के लिए, एक निष्पक्ष संस्था चाहिए क्योंकि राहत सामग्री हमास द्वारा लूटी जा रही है, और यह सब हृक्रङ्ख्र के कर्मचारियों की मिली भगत से हो रहा है’.

फऱवरी 2025 में, इजराइल और अमेरिका की सरकारों ने, एक हृत्रह्र बनाया; ‘ग्लोबल ह्यूमेनिटेरियन फाउंडेशन’. अमेरिका ने, अपने रक्षा मंत्रालय को ‘युद्ध मंत्रालय’ तो पिछले महीने ही घोषित किया है, लेकिन यह काम, वह, दूसरे विश्व युद्ध के बाद से ही कर रहा है. ‘मिलिट्री-औद्योगिक काम्प्लेक्स’ ही अमेरिका का असली शासक है, जो बड़े बैंकों और उद्योगपतियों के भयानक गठजोड़ से बना है. उसके बहुसंख्य सदस्य इसरायली-अमेरिकी नागरिकता वाले ही हैं. ये जंगी गिरोह, वित्तीय पूंजी के पहाड़ पर बैठा है. ना सिफऱ्, अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव इन्हीं के पैसे से जीता जाता है, बल्कि इनके इशारे पर जंग करने से इंकार करने वाले, इन्हें नाराज़ करने वाले, अमेरिकी राष्ट्रपति को, अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ जाता है, जॉन एफ केनेडी की हत्या इन्हीं के इशारे पर हुई थी, क्योंकि वह, इजराइल को ‘सुधारने’ की जि़द पर अड़ा हुआ था!! असीमित धन-संपन्न, ‘अमेरिकी इसरायली पब्लिक अफेयर्स कमेटी AIPAC, इसी गिरोह का औज़ार है, जिसकी माफऱ्त अमेरिकी डेमोक्रेसी के ठेकेदारों को, नोटों से भरे, काले रंग के सूटकेस पहुंचाए जाते हैं!!

‘मिलिट्री-औद्योगिक काम्प्लेक्स’ की असंख्य फर्जी  कंपनियां हैं, जिनमें एक है; ‘सेफ रीच सोल्युसंस. स्क्रस्’. इस कंपनी को; अमेरिकी, इसरायली, इंग्लैंड की ख़ुफिय़ा एजेंसियां, सीआईए, मोसाद तथा एमआई- 6 मिलकर चलाती हैं. इस कंपनी के ख़ूनी कारोबार की असलियत पूरी तरह गोपनीय रहती है. ‘ग्लोबल ह्यूमेनिटेरियन फाउंडेशन’ के षडयंत्रकारी कारनामों को छुपाने के लिए, अमेरिका को भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं समझा गया. इसलिए इस हत्यारे हृत्रह्र का पंजीकरण, स्विट्जऱलैंड में किया गया है. वही स्विट्जऱलैंड, जो काले धन को छुपाने की कमाई से मालामाल है!! यह संस्था पूरी तरह काले धन पर ही चलती है, लेकिन कुछ ख़र्च सफ़ेद पैसे से भी करना पड़ता है, इसलिए अमेरिकी सरकार ने, जून 2025 में इसे $30 मिलियन की ‘मदद’ दी है. इतना ही नहीं, गाज़ा में, इस संस्था द्वारा किए जा रहे कामों से खुश होकर, इसे 500 मिलियन का बजट मंज़ूर कर दिया है, जिससे पैसा, इसके कामों में रूकावट ना बने!! सीनेट के डेमोक्रेटिक सदस्यों ने, इस हृत्रह्र की गोपनीय गतिविधियों पर सवाल भी उठाए थे, लेकिन जब काला सूटकेस उन्हें प्राप्त हो गया, तो राष्ट्रहित में वे भी चुप हो गए!!

अमेरिकी वित्तीय पूंजी के इजारेदारों की एक संस्था, ‘मेक्नेली कैपिटल (McNelly Capital)’ ने, इसे इस शर्त पर ‘अकूत गोपनीय दान’ दिया है, कि उनके ‘दान’ को किसी भी शर्त पर, कभी भी उजागर नहीं किया जाएगा. साथ ही, ‘उपयुक्त ठेकेदारों’ का बंदोबस्त करने की जि़म्मेदारी भी वित्तीय पूंजी के इसी ढूह की है. इजराइल में अमेरिकी राजदूत, माइक हक़बी ने अमेरिकी सरकार से कहा है कि ‘ग्लोबल ह्यूमेनिटेरियन फाउंडेशन’ के पैसे के स्रोतों के बारे में सवाल पूछने पर पाबंदी लगनी चाहिए, क्योंकि संस्थाएं ही नहीं, कई इसरायली-अमेरिकी व्यक्ति भी इसे ‘दान’ देना चाहते हैं, लेकिन उनकी एक ही शर्त है; सबकुछ परदे के पीछे रहे. उनका यह भी कहना है कि ‘ग्लोबल ह्यूमेनिटेरियन फाउंडेशन’ की शानदार गतिविधियां गाज़ा तक ही सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि अनेक देशों में फैलेंगी!!

‘ग्लोबल ह्यूमेनिटेरियन फाउंडेशन’ केपास असीम पैसा है. उसने, ‘मेक्नेली कैपिटल (Mc Nelly Capital)’की मदद से, ऐसे ठेकेदारों को ‘गाज़ा का बंदोबस्त’ करने की जि़म्मेदारी दी हुई है, जिनकी अमानवीयकरण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जो फिलिस्तीनियों को इंसान नहीं, बल्कि ‘एमलेक’ समझते हैं. ‘एमलेक’, यहूदी धार्मिक गपोड़पंथ में, ऐसे इंसाननुमा जानवर को कहते हैं, जो अशुभ होता है और जिनके बच्चों- महिलाओं तक को मार डालना, यहूदियों के लिए पुण्य है!! भूख से बिलखते, हाथ फैलाकर रोटी मांगते बच्चों के अंडकोषों पर गोलियां चलाओ, और निष्प्राण होने से पहले, वे कैसे तड़पते हैं, ठहाके लगाकर विडियो बनाओ!!!! बर्बरता का यह स्तर तो हिटलर और उसके नाज़ी दस्तों को भी मालूम नहीं था!!!
(साभार आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस द्वारा उपलब्ध कराए गए अनेक स्रोत)

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Mazdoor Morcha
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