कर्म से पहचान

कर्म से पहचान
August 30 06:25 2025

महबूब नमाज पढ़कर लौट रहे थे। सामने एक रेलवे ट्रैक था। वे गुजर रहे थे कि अचानक उन्हें चीख सुनाई देती है। जिस मालगाड़ी पर चढ़कर वे ट्रैक पार रहे हैं, उसी के नीचे एक लड़की फंस गई है। गाड़ी चल चुकी है। महबूब अली फुर्ती के साथ गाड़ी के नीचे कूद गए, लड़की का सिर पकड़ कर जमीन से चिपट कर लेटे रहे और गाड़ी के 27 डिब्बे उन पर गुजर गए। लड़की की जान बच गई।
दरअसल, मालगाड़ी खड़ी हो गई थी। महबूब अपने दोस्त के साथ गाड़ी पर चढ़कर उस पार निकल गए। कुछ और लोग उसके नीचे से पटरी पार कर रहे थे। तभी एक नाबालिग लड़की का पैर फंस गया। इसी दौरान गाड़ी चल पड़ी और लड़की गाड़ी के नीचे ही फंस गई।

पेशे से कारपेंटर महबूब ने लड़की को बचाने के लिए एक सेकेंड गंवाए बिना अपनी जान की बाजी लगा दी। किसी ने इसका वीडियो बना लिया जो अब वायरल हो रहा है। यह घटना भोपाल के बरखेड़ी फाटक की है। महबूब ने बताया कि वह फर्नीचर बनाने का काम करते हैं। 5 फरवरी को सोनिया कॉलोनी से नमाज पढ़कर आ रहे थे। बरखेड़ी फाटक के पास एक मालगाड़ी धीरे-धीरे आकर रुक गई। वह और उनका एक दोस्त मालगाड़ी के ऊपर से निकल गए। तभी एक लड़की नीचे से निकल रही थी और इसी दौरान मालगाड़ी चलने लगी। वह घबराकर चिल्लाने लगी तभी मैं तुरंत अंदर घुस गया और लड़की को लेकर पटरी पर लेट गया। हादसे के बाद लड़की अपने परिजनों के साथ चली गई।

महबूब ने अपनी जान की परवाह किए बगैर लड़की की जिंदगी बचाई। इसके लिए उन्हें सम्मानित किया गया है। एक स्वयंसेवी संस्था ने महबूब को उपहार स्वरूप मोबाइल फोन दिया है क्योंकि उनके पास फोन नहीं था। मैं यह कहानी सुबह से लिखना चाहता था। बहुत थकने के बाद भी मन नहीं माना। भले ही चार लोगों तक पहुंचा सकूं लेकिन दुनिया को यह बताना जरूरी है कि महबूब जैसे निश्छल और नेक दिल लोग कम होते हैं। इंसानियत यही है जो महबूब ने किया। इस देश का मुखिया कहता है कि दंगाइयों को कपड़ों से पहचाना जा सकता है। क्या इस दाढ़ी और टोपी वाले मसीहा को देखकर आप बता सकते हैं कि वह एक लड़की के लिए आज खुदा बन गए और उसकी जान बचा ली? आपको वरगलाया जा रहा है। कपड़े और हुलिए से इंसान नहीं पहचाने जा सकते। कपड़ा, हुलिया, रंग, क्षेत्र, जाति, धर्म से नफरत पहचानी जाती है। इन सबसे जुड़े जज्बात नफरत के कारोबारियों के औजार हैं।

किसी बहुरुपिये के चक्कर में मत फंसिए। आपके आसपास भी तमाम महबूब होंगे। आपसे कहा जा रहा कि उनके पहनावे और पहचान के आधार पर उनसे नफरत कीजिए। आपको यह नहीं करना है। क्या पता किसी दिन आप फिसल जाएं और जो हाथ आपको थाम ले, वह किसी महबूब का ही हो। अपने दोस्त के रूप में, पड़ोसी के रूप में, गांव या शहर के पहचान के रूप में, हर महबूब से मोहब्बत बनाए रखें। इंसानियत में थोड़ा हिस्सा तो आपका भी है।

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Mazdoor Morcha
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