तुम्हारे भी हमारे भी

तुम्हारे भी हमारे भी
June 02 15:01 2025

बहुत से काम बाकी हैं, तुम्हारे भी हमारे भी
करोड़ों लोग भूखे हैं, तुम्हारे भी हमारे भी
खिलौनों वाली उम्र में, उन्हें हम मौत क्यों बांटें
बड़े मासूम बच्चे हैं, तुम्हारे भी हमारे भी
पड़ोसी यार जाने दो, हंसो और मुस्कुराने दो
मुसलसल अश्क़ बहते हैं, तुम्हारे भी हमारे भी
भला इक़बाल ओ ग़ालिब का, कहां बंटवारा मुमकिन है
ये साझे असासे हैं, तुम्हारे भी हमारे भी
अगर नफऱत ज़रूरी है, तो सरहद पर इक_े क्यूं
परिंदे दाना चुगते हैं, तुम्हारे भी हमारे भी
चलो मिल कर लड़ें हम तुम, जहालत और गऱीबी से
बहुत सपने अधूरे हैं, तुम्हारे भी हमारे भी
सम्भालें उन को मिल जुल कर, सिखाएं फऩ मुहब्बत का
बड़े जोशीले लड़के हैं, तुम्हारे भी हमारे भी
इधर लाहौर इधर दिल्ली, कहां जाएंगे हम पारस
यही दो चार कस्बे हैं, तुम्हारे भी हमारे भी

पारस

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Mazdoor Morcha
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