कपड़ों से पहचान कराने वाले मोदी को ही तो फॉलो किया है मंत्री विजय शाह ने

कपड़ों से पहचान कराने वाले मोदी को ही तो फॉलो किया है मंत्री विजय शाह ने
May 28 05:51 2025

मज़दूर मोर्चा ब्यूरो
कर्नल सोफिया कुरैशी को पाकिस्तानी आतंकियों की बहन बताने वाले मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कुंवर विजय शाह के खिलाफ हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद मध्य प्रदेश के डीजीपी एफआईआर दर्ज करने की हिम्मत नहीं जुटा सके। जब मुख्यमंत्री कार्यालय से अनुमति मिली तब जाकर केस दर्ज किया गया, उसमें भी गंभीर धाराएं लगाने से परहेज किया गया। वो तो भला हो हाईकोर्ट का कि उसने पुलिस को उचित धाराएं लगाने और हाईकोर्ट की देखरेख में जांच करने का आदेश सुनाया।

दरअसल, कैबिनेट मंत्री कुंवर विजय शाह ने कर्नल सोफिया के लिए, हाईकोर्ट की भाषा में गटर वाली उल्टियां की हैं, वह और कुछ नहीं बीते दस- ग्यारह वर्षों से संघ और मोदी-शाह द्वारा मुसलमानों के लिए फैलाई जा रही नफरत का विस्तार ही है। मोदी प्रधानमंत्री होने के बावजूद आतंकवादियों को कपड़ों से पहचाने का, हिंदुओं के संसाधनों को बंटवारा करने वाले, पंक्चर जोडऩे वाले बताकर या अमित शाह द्वारा बटन यहां दबाओगे करंट शाहीनबाग में लगेगा जैसे बयानों से जहर घोला है वह कभी अनुराग सिंह ठाकुर के रूप में देश के गद्दारों को गोली मारो सालों को के रूप में सामने आता है, तो कभी योगी द्वारा कहा जाना कि सौ हिंदुओं के बीच एक मुसलमान सुरक्षित है लेकिन सौ मुसलमानों के बीच एक तो छाडि़ए पचास हिंदू भी सुरक्षित नहीं हैं के रूप मेंं। इन संघी-भाजपाइयों की सत्ता टिकी ही मुसलमानों को हिंदुओं का दुश्मन बता कर फूट डालो राज करो की नीति पर है, विजय शाह भी वही कर रहा था।

दरअसल, कुंवर विजय शाह ने मोदी-शाह और संघ को खुश करने के लिए ही सोफिया कुरैशी के खिलाफ यह बयान दिया है। उसे या उस जैसे भाजपाइयों के दिल में सेना, सेना का मनोबल गिरने या देश के प्रति सम्मान से ज्यादा मुसलमानों को गालियां देकर मोदी-शाह की नजर में ऊंचा होना महत्वपूर्ण है, विजय शाह यही कर रहा था। उसे अच्छी तरह मालूम था कि पुलिस तो उसके खिलाफ केस दर्ज करने की हिम्मत नहीं रखती, इसलिए सार्वजनिक रूप से उल्टियां करने लगते हैं फिर चाहे वो देश की पराक्रमी सेना के खिलाफ ही क्यों न हो।

हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर मंत्री को आड़े हाथों लिया और देशद्रोह जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज कराया लेकिन समझने वाली बात यह है कि न तो नरेंद्र मोदी, न ही नड्डा या मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उनके खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई की। उससे न तो इस्तीफा लिया गया न ही पार्टी से निकाला गया। दूसरे शब्दों में कर्नल सोफिया कुरैशी को आतंकवादी की बहन बता कर सेना का मनोबल तोडऩे वाले विजय शाह को संघ-भाजपा का मूक समर्थन प्राप्त है। इसका कारण विजय शाह का आदिवासी गोंड जाति का इकलौता नेता होना है। भाजपा उसे नाराज कर आदिवासी बहुल मध्य प्रदेश में अपने वोट बैंक को नहीं तोड़ृना चाहती।

वैसे विजय शाह ने महिलाओं के खिलाफ इस तरह का ओछा बयान पहली बार नहीं दिया है। 2013 में मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनावों के दौरान उन्होंने झाबुआ में एक सरकारी कार्यक्रम में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पत्नी से कहा था कि भाभी कभी देवर के साथ भी चला करो। अभिनेत्री विद्या बालन एक फिल्म की शूटिंग पर मध्य प्रदेश आई थींं उन्हें इसी लंपट नेता ने डिनर पर आमंत्रित किया था, मंत्री की गंदी भावनाओं को समझ अभिनेत्री ने प्रस्ताव ठुकरा दिया। इस पर सत्ता का नंगा नाच करते हुए उसने फिल्म की शूटिंग ही रुकवा दी थी। इससे पहले एक बार आदिवासी छात्राओं के हॉस्टल के दौरे के वक़्त उन्होंने कहा था कि इन्हें दो-दो टीशर्ट दी जानी चाहिए. उनकी इस अमर्यादित टिप्पणी के लिए तब भी बहुत निंदा की गई थी.”

2018 में शिक्षक दिवस समारोह में मंत्री विजय शाह ने कहा था, “अगर आज गुरु के सम्मान में ताली नहीं बजाओगे तो, अगले जन्म में घर-घर जाकर ताली बजानी पड़ेगी. उनके इस बयान पर किन्नर समुदाय में नाराजगी थी। “सितंबर 2022 में खंडवा की एक सभा में उन्होंने राहुल गांधी पर विवादित टिप्पणी की थी कि अगर कोई लड़का 50-55 साल का हो जाए और शादी न करे तो लोग पूछते हैं कि कोई कमी तो नहीं है? विवादास्पद बयानों के बाद भी उनके खिलाफ आज तक कोई बड़ी या स्थायी कार्रवाई नहीं की गई। सोफिया कुरैशी और सेना पर अमर्यादित बयान देने के बाद भी भाजपा उनके खिलाफ कुछ करने से रही, दिखावे के लिए कुछ दिन तक हटाया जा सकता है इसके बाद फिर से मंत्री बना दिया जाएगा। ऐसे देशद्रोही नेता को न्यायपालिका ही सबक सिखा सकती है या फिर जनता।

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