तमाम नाकामियों के बीच कृष्णपाल को फिर याद आया मंझावली पुल

तमाम नाकामियों के बीच कृष्णपाल को फिर याद आया मंझावली पुल
February 12 04:19 2026

फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) 14 अगस्त 2014 को बहुत बड़े ताम-झाम के साथ स्थानीय सांसद एवं केन्द्री मंत्री कृष्ण्पाल गूजर तथा केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने $फरीदाबाद को नोयडा से जोडऩे के लिए गांव मंझावली के स्थान पर यमुना पुल बनाने की आधार शिला रखी थी। इस अवसर पर कृष्णपाल ने लाखों की भीड़ जुटाकर अपनी नकली लोकप्रियता का प्रदर्शन किया था। असल में उस वक्त केन्द्र में नई-नई मोदी सरकार बनी थी और हरियाणा में विधानसभा चुनाव सिर पर थे। ऐसे में हर टिकट चाहने वाला बड़ी संख्या में ट्रैक्टरों व बसों आदि में भीड़ ढोकर लाया था। इससे कृणष्पाल की बल्ले-बल्ले हो गई थी।

इस अवसर पर जब लोगों ने कहा कि इस तरह का शिलान्यास तो 20-25 वर्ष पूर्व राजेश पायलट नामक एक केन्द्रीय मंत्री भी कर गया था तो कृष्णपाल ने दावा किया था कि दो साल में इस पुल को यातायात के लिए चालू कर दिया जाएगा। इसके जवाब में ‘मज़दूर मोर्चा’ ने उसी वक्त लिख दिया था कि दो साल में पुल का चालू होना तो दूर, इसकी डीपीआर भी बन जाए तो बहुत बड़ी बात होगी। हुआ भी वही। बड़ी मुश्किल से ढ़ाई साल में तो डीपीआर ही बन पाई उसके बाद कई वर्षों तक फाइलें इधर से उधर घुमती रही। कई ठेकेदार आए और गए। किसी ने पुल का कोई हिस्सा तो किसी ने कोई दूसरा हिस्सा बनाया। इससे पुल की गुणवत्ता बुरी तरह से प्रभावित हुई।

जैसे-तैसे, रो-पीट कर पुल बना भी तो उस पर चढऩे व यूपी में उतरने के लिए आवश्यक सड़कों का निर्माण अभी तक पूरा नहंी हो सका है। जनता में छाए रहने के लिए प्रोपेगेंडा के तौर पर बीते 11 साल से कृष्णपाल हर दूसरे-तीसरे महीने इस पुंल को लेकर बयानबाजी करते आ रहे हैं। कभी पहुंच सड़क के लिए जमीन अधिगृहित करने की बात करते हैं तो कभी सड़क निर्माण के टेंडर जारी करने की थोथी घोषणाएं करते रहे। इन कामों के लिए कई बार कई तरह की कमेटियां बैठाने के नाटक भी किए गए। लेकिन आज वर्ष 2025 भी समाप्त होने जा रहा है परन्तु पुल पर आवागमन नहीं हो पा रहा।
अपनी हर घोषणा में कृष्णपाल यह बताना नहीं भूलते कि इस पुल के बन जाने से न केवल $फरीदाबाद, गुडग़ांव बल्कि जयपुर और न जाने कहा-कहां के लोगों को कितना भारी लाभ होगा। उनका कितना समय व वाहनों का इंधन बचेगा, इससे प्रदूशन भी घटेगा। अब कृष्णपाल पर सवाल यह बनता है कि इतने वर्षों तक वंचित रहने का जिम्मेवार कौन है? दरअसल, समझा यह भी जा रहा है कि पुल बनने के नाम से क्षेत्र में जमीनों के जो भाव चढ़े हैं, उससे कृष्णपाल ने अकूत मुनाफा कमाया है। प्रोजेक्ट की जानकारी होने के फलस्वरूप उन्होंने बड़े पैमाने पर जमीनों के बेनामी सौदे कर लिए थे।

view more articles

About Article Author

Mazdoor Morcha
Mazdoor Morcha

View More Articles