कोई भला इंसान

कोई भला इंसान
May 20 15:45 2025

डॉ. रामवीर

अपनी सीमित सोच में कैद
आत्ममुग्ध श्रीमान
आशा रखते हैं कि उन की
बात सभी लें मान।

बायोडाटा पढ कर तो वे
लगते हैं विद्वान
पर अपने अज्ञान का उनको
हो न पाया ज्ञान।

पूर्वाग्रह और कट्टरता की
खुदी है गहरी खान
मन में समाई कटुताओं पर
भी करते अभिमान।

वेद और दर्शन शास्त्रों पर
देते हैं व्याख्यान
पर वैदिक आदेश ‘मनुर्भव’
का नहीं शायद भान।

क्लिष्ट शब्द दुर्बोध विचारों
की खोली है दुकान
ऐसी दुकानों पर ही मिलते
हैं फीके पकवान।

यूं तो बहुत पुरानी अपनी
उनसे जान पहचान
पर न उन्होंने मुझे पहचाना
न मैं भी सका जान।

यूं तो आदमियों से भरा है
यह सारा ही जहान
लेकिन बामुश्किल मिलता है
कोई भला इंसान।

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