झूठ : मनमोहन सरकार ने कुछ नहीं किया। सच : हमारे जवानों ने 10 में 9 आतंकियों को ढेर किया, कसाब को जिंदा पकड़ा। शहीद : एटीएस चीफ हेमंत करकरे, मेजर संदीप उन्नीकृष्णन, अशोक कामटे समेत 17 जवान, 160+ नागरिक। झूठ : कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सच : हमले के बाद मनमोहन सिंह ने कभी पाकिस्तान का दौरा नहीं किया। एनआईए का गठन हुआ। अमेरिका, यूएन को सबूत सौंपे। भारत ने कहा : अगला हमला-सीधी सैन्य कार्रवाई। झूठ : भारत ने प्रत्यर्पण की कोशिश नहीं की। सच : भारत के सबूतों पर ही अमेरिका ने 2009 में हेडली और राणा को पकड़ा। उसी साल भारत ने राणा के प्रत्यर्पण की मांग की। झूठ : कसाब को बिरयानी मिली। सच : जेल में उसे सिर्फ सादा खाना मिला। दुर्दांत आतंकी की तरह व्यवहार हुआ। 21 नवंबर 2012 को चुपचाप फांसी दे दी गई-बिना तमाशा। झूठ : मोदी सरकार ने पाकिस्तान-अमेरिका पर दबाव डाला। सच : 2014 में नवाज़ शरीफ को बुलाकर पुरानी नीति कमजोर कर दी। अमेरिका ने राणा का प्रत्यर्पण 10 साल तक टाल दिया। पाकिस्तान फिर “बातचीत लायक” देश बन गया। और फिर…? 2016 : पठानकोट 2016 : उरी 2019 : पुलवामा (40 जवान शहीद) हाफिज सईद आज भी खुला घूम रहा है। 26/11 कोई ‘घटना’ नहीं-ये हमारी परीक्षा थी। देशभक्ति नारों से नहीं, नीति और नीयत से दिखती है। अब सोचिए-सच कौन बोल रहा है?