डॉ. रामवीर
यूं तो सब सामान्य है किन्तु फिर भी मन रहता है उदास देश की बिगड़ी दशा देख कर प्राय: हो जाता हूं निराश।
एक नागरिक के नाते मैं जो भी कर सकता हूं प्रयास सब करता हूं पर लोगों पर असर न होता दिखता खास।
लोगों को आपस में लड़ाना कुछ लोगों का यही है काम इसके लिए ही धर्म व जाति या भाषा का लेते हैं नाम।
जनता को बहका फुसला कर पढा रहे हैं उल्टा पाठ पढे लिखों की भी बुद्धि को मानो मार गया है काठ।
लोकतन्त्र के चौथे स्तम्भ का काम था लोगों को समझाना अब उसने भी सीख लिया है झूठ और घृणा फैलाना।
इसके दुष्परिणाम का शायद नहीं है लोगों को अनुमान कवि की तो चिन्ता का विषय है भावी भारत की सन्तान।