नगर निगम में चल रहा रिश्वत दो और अवैध निर्माण करो का गोरखधंधा

नगर निगम में चल रहा रिश्वत दो और अवैध निर्माण करो का गोरखधंधा
March 16 05:47 2025

जेई द्वारा चार लाख रिश्वत लेकर अवैध निर्माण करवाने की चर्चा
फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) भ्रष्टाचार के गढ़ नगर निगम के खाऊ अधिकारी अवैध ऊपरी कमाई के लिए किसी भी हद तक गिर सकते हैं। दो सौ करोड़ के अलावा आए दिन करोड़ों के घोटाले करने वाले निगम अधिकारियों की रिश्वत की भूख इतनी ज्यादा है कि अवैध निर्माण करने वालों से मोटी रकमें लेकर उन्हें कुछ भी बनाने की छूट दी जा रही है, भले ही इससे नगर विन्यास की सूरत बिगड़ जाए या अवैध निर्माण के कारण आसपास रहने वालों को कोई समस्या हो, उनकी बला से। ताजा मामला मुजेसर में एक लाला जी द्वारा अवैध निर्माण कराए जाने का है। नगर निगम में चर्चा है कि लाला ने इसके लिए निगम के जेई परवेज आलम को चार लाख रुपये भेंट चढ़ाए, और जेई ने बेखौफ होकर निर्माण करने का आश्वासन दिया। क्योंकि ऐसे में मामलों में न तो लेने वाला बताता है कि उसने लिया और न ही देने वाला कहता है कि उसने रिश्वत दी, लेकिन धड़ल्ले से जारी अवैध निर्माण से मतलब निकाला जा सकता है।

निगम के जानकारों के अनुसार मुजेसर गांव में अवैध रूप से बन रही दुकान का निगम से नक्शा पास नहीं हुआ है, बताया जा रहा है कि इसका कारण जमीन का विवादित होना है। नक्शा पास नहीं होने के कारण इस जगह पर कोई निर्माण नहीं हो सकता। खुद को जमीन का मालिक कहने वाले लाला जी मोटी कमाई की लालच में इस बेशकीमती जमीन पर दुकान और मकान बनाना चाहते हैं। इस इलाके के एसडीओ अमित चौधरी और जेई परवेज आलम हैं। निगम में चर्चा है कि लालाजी ने अवैध निर्माण के लिए जेई परवेज आलम से संपर्क किया। निर्माण के लिए डिमांड छह लाख रुपये से शुरू हुई लेकिन सौदा चार लाख रुपयों में फाइनल होना बताया जा रहा है। इसमें तय हुआ कि आराम से तोडफ़ोड़ करके निर्माण कराओ, यदि कोई इसकी शिकायत करेगा तो दिखावे के लिए नोटिस भेजा जाएगा लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होगी। लालाजी ने निर्माण शुरू कराया तो आसपास के लोगों में सुगबुगाहट होने लगी, बताया जाता है कि लेनदेन होने के बाद खुद जेई परवेज आलम ने मौके पर पहुंच कर लालाजी को बेखौफ होकर निर्माण कराने को कहा। समझने वाली बात यह है कि कोई जेई अकेले इतनी बड़ी रकम नहीं डकार सकता, हिस्सापत्ती तो ऊपर तक पहुंचाई जाती है। यही कारण है कि करीब एक महीने से चल रहे अवैध निर्माण की ओर जेई, एसडीओ या संयुक्त आयुक्त किसी ने ध्यान नहीं दिया। एक लेंटर भी पड़ गया और शटर लगा कर दुकान भी बना दी गई। नगर निगम चुनाव की तैयारियां दस दिन पहले ही शुरू हुईं तो जेई, एसडीओ को चुनाव ड्यूटी में बिजी होने का बहाना मिल गया।

जब एसडीओ अमित चौधरी से अवैध निर्माण के बारे में पूछा गया तो उन्होंने जानकारी से इनकार करते हुए कहा कि जेई परवेज आलम से पूछिए। हालांकि बाद में उन्होंने ऑफ दि रिकॉर्ड बताया कि मुजेसर में दो जगहों पर निर्माण हो रहे हैं, फिर जानना चाहा कि शिकायत किसकी की जा रही है? यानी उन्हें इस बात की जानकारी हो गई थी कि मुजेसर में अवैध निर्माण किए जा रहे हैं, इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की और बात जेई परवेज आलम पर टाल दी। सवाल यह उठता है कि एसडीओ को जब चार दिन पहले इसकी जानकारी हो गई थी तो उन्होंने जेई से जवाब क्यों नहीं तलब किया? दरअसल जब सबकुछ मिलीभगत से हो रहा हो तो फिर जानकारी होकर भी अनजान बने रहने में ही फायदा होता है।

चुनाव ड्यूटी में लगे जेई परवेज आलम को सोची समझी चाल के मुताबिक मौका मुआयना करने का समय ही नहीं मिला और लालाजी को तेजी से निर्माण कार्य पूरा करने की मोहलत दी गई। इन दोनों अधिकारियों की जानकारी में दुकान बन कर तैयार हो गई और पहली मंजिल पर छत डालने के लिए शटरिंग का काम भी पूरा करा कर लिया गया, एक-दो दिन में लिंटर भी डाल दिया जाएगा। इस बारे में जेई परवेज आलम से पूछा गया तो उन्होंने पहले तो अवैध निर्माण की जानकारी से इनकार किया और बताया कि चुनाव ड्यूटी पर होने के कारण जा नहीं सका। उन्होंने बाद में बताया कि अवैध निर्माण के लिए दस दिन पहले ही नोटिस तैयार कर लिया गया था लेकिन चुनाव के कारण भेजा नहीं जा सका था, मंगलवार यानी 4 मार्च को नोटिस पर अधिकारियों के हस्ताक्षर कर उसे जारी किया गया है। इससे साफ है कि जेई परवेज आलम को भी अवैध निर्माण की जानकारी दस दिन से भी पहले से थी तभी तो नोटिस तैयार कराया गया था। जैसा कि पहले ही तय हो गया था कि दिखावे के लिए नोटिस भेजा जाएगा लेकिन तुम अपना निर्माण जारी रखना, वह अब किया जा रहा है। सच्चाई यह है कि निर्माण कार्य कोई एक दिन में तो हो नहीं जाता, ऐसे में अधिकारियों का जानबूझ कर अनजान बनना बहुत कुछ बयान करता है।

जिस नगर निगम की मुखिया ही मातहतों से सोने के बिस्कुट, महंगे लहंगे और कीमती गिफ़्ट मांगने में शर्म नहीं महसूस करती हो तो वहां के जेई, एसडीओ का हक बनता है कि वे आला अधिकारियों को खुश करने के लिए लूट कमाई कर नाजायज कमाई करें और इसमें से बड़ा हिस्सा खुद भी रखें। ऐसा नहीं है कि स्थानीश शहरी निकाय मंत्री विपुल गोयल को नगर निगम के भ्रष्टाचार की जानकारी नहीं है लेकिन सरकार की बदनामी न हो इसलिए वो भी चुप्पी साधना बेहतर समझ रहे हैं। रही जनता की बात तो वो परेशान है और आगे भी होती रहेगी, हां उसके नाम पर मंत्री नेता और अधिकारी लूट कमाई करते रहेंगे।

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Mazdoor Morcha
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