फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) बडख़ल विधायक धनेश अदलखा की चाटुकारिता मेंं लगे निगमा युक्त धीरेंद्र खडगटा अब गांधी कॉलोनी की खराब पड़ी सड़क को बनवाने जा रहे हैं। यह सड़क उसी पेरीफेरल रोड का हिस्सा है जिसकी जांच विजिलेंस कर रही है। इस मामले में पेरीफेरल रोड बनाने वाली ठेकेदार कंपनी आरके गांधी फंसी हुई है। निगम में चर्चा है कि विजिलेंस जांच खत्म कराने के लिए विधायक अदलखा के इशारे पर निगमायुक्त सड़क का निर्माण करा विवाद की जड़ ही समाप्त कर देना चाहते हैं। नगर निगम के एक्सईएन महेंद्र कुमार के अनुसार निगमायुक्त ने गांधी कॉलोनी की दस साल से टूटी पड़ी सड़क का निर्माण कराने का आदेश जारी किया है। इसके निर्माण में एक करोड़ चौदह लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। जानकारों के अनुसार निगमायुक्त ने यह आदेश विधायक धनेश अदलखा के इशारे पर जारी किया है, क्योंकि अदलखा ने हाल ही में गांधी कॉलोनी में रहने वाले अपने एक चरणचुंबक से वादा किया था कि वह जल्द ही उससे मिलने आएंगे और तब सड़क पर एक भी गड्ढा नहीं रहेगा। अब आक़ा ने इशारा किया है तो निगमायुक्त ने बिना यह जांचे परखे कि यह सड़क घोटाले में फंसी है और विजिलेंस जांच चल रही है, सड़क बनाने का आदेश जारी कर दिया।
निगम में चर्चा है कि सड़क बनते ही 102 करोड़ के पेरिफेरल रोड घोटाले का विवाद ही खत्म हो जाएगा। सुधी पाठकों को याद होगा कि पूर्व विधायक सीमा त्रिखा के आदेश पर 2017-18 में पेरीफेरल रोड का प्रोजेक्ट शुरू किया गया था। लूट कमाई के लिए 76 करोड़ के इस प्रोजेक्ट की लागत बढ़ा कर 102 करोड़ रुपये कर दी गई और ठेका विधायक त्रिखा और केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गूजर के चहेते ठेकेदार आरके गांधी को मिला। गांधी ने प्रोजेक्ट में गांधी कॉलोनी की सड़क छोड़कर बाकी सड़क बना दी लेकिन इसमें भी फुटपाथ, साइकिल ट्रैक, नाला, सेंट्रल वर्ज और सड़क के दोनों ओर ग्रिल आदि नहीं बनाए जो कि प्रोजेक्ट में शामिल थे। गांधी कॉलोनी में स्थानीय लोगों द्वारा विरोध किए जाने का बहाना बना कर सड़क का निर्माण ही नहीं किया गया। काम अधूरा छोडऩे के बावजूद त्रिखा-गूजर के इशारे पर ठेकेदार को पूरा भुगतान कर दिया गया। भुगतान होते ही गांधी ने पेरीफेरल रोड अधूरी छोड़ दी। इसकी शिकायत कुछ जागरूक नागरिकों ने की तो विजिलेंस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी, जो अभी तक फाइलों में रेंग रही है।
जानकार कहते हैं कि जांच ही इस बात की चल रही है कि ठेकेदार ने काम पूरा नहीं किया है। अधूरे और विवादित काम को या तो पुराने ठेकेदार से ही पूरा कराया जाना चाहिए, अगर वह नहीं कर रहा है तो रिस्क एंड कास्ट के तहत सड़क बनाने का जो भी खर्च है वह उस ठेकेदार से वसूला जाना चाहिए वसूली से कैसे कर लेंगे जब निगम पहले ही सबकुछ दिए बैठा है। यदि निगमायुक्त ईमानदार होते तो गांधी की फर्म को ब्लैकलिस्ट कर देते और सरकार से सिफारिश करते कि जब तक ठेका फर्म निगम के सारे भुगतान क्लियर नहीं कर लेती उसे किसी भी विभाग में काम नहीं दिया जाए। निगम सूत्रों के अनुसार यह दोनों बातें निगम अधिकारियों के लिए संभव नहीं है, क्योंकि ठेकेदार पर मंत्री गूजर और उसके चेले विधायक अदलखा का वरद्हस्त है। चर्चा तो यह भी है कि गूजर ने अपने पूर्व पीए लाजपत कालिया को गांधी फर्म में मुखौटा पार्टनर बनवाया है, असली पार्टनर तो खुद गूजर है। इसी कारण विजिलेंस जांच ठंडे बस्ते में पड़ी है। समझा जा सकता है कि ये विजिलेंस जांच भाजपा के सत्ता में रहते तो पूरी नहीं ही हो पाएगी। यह भी कि गड़बडिय़ों के कारण ब्लैकलिस्ट की जा चुकी आरके गांधी फर्म को क्यों अब भी बड़े-बड़े ठेके मिल रहे हैं।
माना जा रहा है कि अदलखा ने सड़क निर्माण कराने का आदेश देकर एक तीर से कई निशाने साधे हैं। पहला यह कि ठेकेदार को भुगतान तो पूरा कर दिया गया है लेकिन विजिलेंस जांच के कारण कागजों में काम अधूरा दिखाया जा रहा है। क्योंकि नया निर्माण रिस्क एंड कास्ट यानी नए निर्माण में होने वाला खर्च पुराने ठेकेदार से वसूला जाए पर नहीं कराया जा रहा है, ऐसे में सड़क बनने के बाद पुराना ठेकेदार दावा करेगा कि उसका काम तो पूरा है। बहुत संभव है कि सत्तापक्ष के दबाव के कारण निगम अधिकारी इस घोटाले पर भी कोई प्रतिक्रिया न दें और विजिलेंस वाले भी सड़क पूरी बना दिए जाने का हवाला देकर जांच बंद कर दें। अदलखा भी दावा करेगा कि जो काम सीमा त्रिखा नहीं करवा सकीं उसने चुटकियों में करवा दिया। जानकार कहते हैं कि गांधी कॉलोनी में टूटी सड़क का टुकड़ा बा मुश्किल पांच सौ मीटर भी नहीं है, यह काम पचास लाख का भी नहीं है लेकिन एक करोड़ 14 लाख रुपये का टेंडर निकाला गया है, यानी एक बार फिर निगम अधिकारियों से लेकर सत्तापक्ष के नेता और ठेकेदारों के बीच जनता की गाढ़ी कमाई की बंदरबांट की जाएगी। निगम सूत्रों के अनुसार हालांकि खडगटा खुद को पाक साफ दिखाने के बहुत प्रयास कर रहे हैं लेकिन गांधी कॉलोनी की सड़क उनके कार्यकाल में सत्तापक्ष की चाटुकारिता में किए गए भ्रष्टाचार के रूप में दर्ज होने वाली है।