फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) शहर में बढ़ते प्रदूषण व उससे निपटने के नाम पर गै्रप का नाटक कोई नई बात नहीं है। यह सिलसिला बीते कई वर्षों की तरह आज भी जारी है। इसके नाम पर डीजल-जेनरेटरों पर लगने वाली पाबंदी, इसे लागू करने वालों की काली कमाई का एक बढिय़ा साधन बन जाता है।
सीधी बात है कि यदि निर्बाध बिजली सप्लाई आती रहे तो कोई भी जनरेटर चला कर राजी नहीं। ग्रैप के नाम पर निर्माण कार्यों पर लगी पाबंदी को लागू करने वालों की भी इसे चालू रखने के एवज में अच्छी-खासी कमाई हो जाती है। यह जरूर है कि इस तरह की पाबंदी सरकारी कार्यों पर पूरे जोर-शोर से लगाई जाती है, खास तौर पर सड़कों के निर्माण पर।
आज के दिन शहर भर में अनेकों जगह निर्माण अथवा मरम्मत के लिए अनेकों सड़कें खुदी पड़ी हैं। जाहिर है कि इन निर्माणाधीन सड़कों पर चलने वाला यातायात घूम-फिर कर जब अन्य सड़कों से गुजरेगा तो वहां पहले से जाम की स्थिति और भी विकट हो जाती है। सेक्टर 14 व 15 की विभाजक सड़क का प्रोजेक्ट बीते करीब एक साल से चल रहा है। आधी सड़क लगभग बन चुकी है और आधी बीते करीब तीन माह से खोद कर डाल रखी है। काम न करने वाले निकम्मे अधिकारियों को काम न करने के लिए अब ग्रैप का बहाना मिल चुका है। इससे भी गजब की बात तो यह है कि सेक्टर 16 व 17 की विभाजक सड़क जो बीते दो वर्षों से खस्ता हाल हुई पड़ी थी उसे निर्माण कार्य के लिए इसी माह के शुरू में खोद डाला गया।
अब ग्रैप के बहाने यहां कई महीनों तक कोई काम होने वाला नहीं है। इसके चलते इस क्षेत्र में जाम की स्थिति इतनी भयंकर हो चुकी है कि सेक्टर 17 से सेक्टर 14 तक जाने के लिए किसी भी वाहन को आधा घंटा से कम समय नहीं लगता, यह हालत तो तब है जब तीन-चार पुलिसकर्मी यातायात सुुचारु करने में जुटे रहते हैं। ठीक इसी समय ईएसआई चौक को भी बंद कर दिया गया है। मूर्तियां स्थापित करने व सौदर्यीकरण के नाम पर यहां करीब तीन-चार माह पूर्व काम शुरू करके इस चौक की हालत बुरी तरह से बिगाड़ दी गई थी। अब बीते सोमवार से इसे पूरी तरह से बंद करके निर्माण कार्य शुरू करने की बात कही गई है। लेकिन अब ग्रैप लगने के नाम पर काम तो होने वाला है नहीं तो जाहिर है कि लम्बे समय के लिए चौक का जाम रहना तय है, काम कब होगा कोई नहीं जानता। विदित है कि गुडग़ांव जाने वाली सड़क पर पडऩे वाला यह अति महत्वपूर्ण चौक है। यहां से हजारों वाहन दिन-रात गुजरते रहते हैं। ईएसआई मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आने वाले मरीजों की संख्या भी बड़े पैमाने पर इसी चौक से गुजरती है।
जब महत्वपूर्ण सड़कों को बंद करा दिया जाता है तो जाहिर है यातायात वैकल्पिक सड़कों से ही गुजरेगा। ऐसे में इन वैकल्पिक सड़कों पर यातायात को सुचारु ढंग से चलाने के लिए प्रशासन का कोई ध्यान नहीं रहता। सामान्य-तौर पर इन सड़कों पर अवैध रूप से खड़े वाहनों अथवा रेहडिय़ों-खोमचों आदि को हटाने की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता। यदि इन्हें अस्थायी रूप से ही हटा दिया जाए तो स्थिति का$फी हद तक सुगम हो सकती है। परन्तु प्रशासन को जनता की सुगमता से क्या लेना-देना? जाम की स्थिति से समय व तेल की बर्बादी के साथ-साथ प्रदूषण भी बढ़ता है तो बढ़ता रहे, प्रशासन की बला से।