डॉ. रामवीर औरों जैसा ही हो जाना लक्ष्य नहीं मेरे जीवन का, जब मैं स्वयं सोच सकता हूं क्यों पिछलग्गू बनूं किसी का।
कुछ पा जाने की चाहत में निशदिन लगे खुशामद करने, कुछ भी काम न आता हो तो लग जाते हैं हुक्का भरने।
चाहे गांव की पंचायत हो या हो नगर निगम का दफ्तर, नेताओं के अन्ध समर्थक ही बैठे मिलते हैं पद पर।
उच्च पदासीन होवे या लगा हुआ हो छोटे पद पर, कार्यपद्धति में दोनों की दिखता है इक जैसा स्तर।
ऊपर वाले को खुश रखना नीचे वाले को धमकाना, यही वर्क कल्चर सर्वत्र विद्यालय हो या हो थाना।
जब तक राज्य कर्मचारी का नहीं सुधर पाएगा आचरण, तब तक जनता के कष्टों का सम्भव दिखता नहीं निवारण।