पलवल (मज़दूर मोर्चा) टोल टैक्स को जजयि़ा कर बता कर सत्ता हासिल करने वाली भाजपा ने प्रदेश में तीसरी बार सरकार बनते ही पलवल के स्थानीय वाहन मालिकों को झटका दिया है। स्थानीय वाहनों के मासिक पास की कीमत 200 से सीधे 70 प्रतिशत बढ़ाकर 340 रुपये कर दी गई है। खास बात यह है कि दो टोल प्लाज़ा के बीच की मानक दूरी का पालन नहीं किए जाने के कारण गदपुरी टोल प्लाजा को अवैध घोषित माना जा रहा है, यानी यहां वाहनों से टोल की अवैध वसूली की जा रही है, सैनी सरकार बनते ही अवैध वसूली की दरें बढ़ा दी गईं।
अडाणी-अंबानी की गोद में बैठे प्रधानमंत्री मोदी ने अंबानी की रिलायंस कंपनी को दिल्ली आगरा राजमार्ग सिक्सलेन बनाने का काम 1934 करोड़ रुपये में आवंटित किया था। प्रोजेक्ट के तहत गदपुरी में टोल प्लाजा भी बनाया जाना था। कंपनी ने प्रोजेक्ट की शर्तें तो पूरी नहीं कीं लेकिन गदपुरी में टोल प्लाजा बना दिया। अप्रैल 2022 में इससे टोल भी वसूला जाने लगा लेकिन स्थानीय लोगों ने टोल टैक्स चुकाने से इनकार करते हुए धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया था। इन लोगों का आरोप था कि टोल लगने से पहले कंपनी बल्लभगढ़ में आरओबी को सिक्स लेन किया जाए, पलवल में फोर लेन एलिवेटेड रोड को सिक्स लेन किया जाए, बघौला, मुंडकटी, औरंगाबाद, बंचारी में पुल का निर्माण किया जाए और आरोही स्कूल के बच्चों की सुरक्षा के मद्देजनर अंडरपास या पुल निर्माण बनाया जाए। लेकिन महाठग अनिल अंबानी शर्तें पूरी करने के बजाय क्यूब सिंगापुर कंपनी को 3400 करोड़ में प्रोजेक्ट बेच कर चलते बने थे। नई कंपनी ने भी प्रोजेक्ट की शर्तें पूरी नहीं कीं लेकिन टोल वसूली शुरू कर दी थी।
कंपनी ने स्थानीय वाहनों के लिए 315 रुपये मासिक पास का निर्धारित किया था लेकिन तगड़ा विरोध होने पर 200 रुपये प्रतिमाह पर सहमति बनी थी। बीते एक अप्रैल को टोल दर दस रुपये बढ़ा दी गई थी लेकिन विरोध के डर और चुनाव के मद्देनजर स्थानीय पास पर चुप्पी साध ली गई थी। चुनाव समाप्त हुए और भाजपा के सत्ता संभालते ही एनएचएआई ने स्थानीय पास के दाम 200 से बढ़ाकर एकदम 340 रुपये कर दिए जो कि उनके मूल पास दर से भी 25 रुपये ज्यादा है। देखना है कि स्थानीय लोग इस अवैध वसूली के खिलाफ फिर से आंदोलन शुरू करते हैं या सरकार की ज्यादती के आगे घुटने टेकते हैं।
संदर्भवश, सुधी पाठकों को याद दिला दें कि इस टोल प्लाज़ा के विरोध में अनेकों राजनेताओं ने महीनों तक धरने-प्रदर्शन किए थे। संघर्ष से बचने की नीयत से ये लोग पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट तक जा पहुंचे। हाईकोर्ट ने पूरी नौटंकी करते हुए एक जांच आयोग का गठन कर दिया जिसने प्रदर्शन कारियों की तमाम अकाट्य दलीलें तो सुनीं लेकिन उनका तोड़ नहीं कर पाया। रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की गई माननीय जज ने रिपोर्ट पढ़कर एनएचएआई व ठेकेदार कंपनी को जमकर लताडऩे का नाटक तो किया लेकिन टोल प्लाजा को हटाने का आदेश नहीं किया।