डॉ. रामवीर
जिन दोनों ने अंग्रेजों की नाक में डाली नकेल, गुजरात में ही जन्मे थे गान्धी और पटेल।
किन्तु उसी में जन्मा जिन्ना औ फिर जन्मा मोदी, जिन्ना ने कोई कमी रखी तो उसे ही पूरी कर रहा मोदी।
अंग्रेजों का लक्ष्य साफ था हिन्दू मुस्लिम न मिल जाएं, हो सकता है दोनों मिल कर उनकी खाट खड़ी कर जाएं।
एक एक दोनों धर्मों से उन्हें चाहिए था एजेंट, भारत पराधीन रखने को फूट डालना था अर्जेंट।
मुसलमानों में पकड़ा जिन्ना हिन्दुओं में मिल गया सावरकर, यही चाहते थे अंग्रेज दोनों लड़ते रहें निरन्तर।
जिन्ना औ सावरकर दोनों में नहीं रंच मात्र का अन्तर, वे ऐसे थे जैसे रखे हों एक ही मालिक ने दो नौकर।
अपने प्रारम्भिक जीवन में दोनों थे अंग्रेज विरोधी, अंग्रेजों ने धीरे धीरे मनोदशा दोनों की बदल दी।
मुसलमानों का कायदे-आजम और हिन्दुओं का वह वीर, दोनों खाते रहे खुशी से अंग्रेजों की परोसी खीर।
दोनों के ही भक्त कहेंगे अपनी-अपनी तरह कहानी, नौ पद्यों में कवि ने कर दिया दूध का दूध पानी का पानी।