फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) 21 सितंबर 2024 को 18 वर्षीय चंद्र मोहन नामक एक युवक ओपीडी कार्ड लेकर चर्मरोग विशेषज्ञ डॉक्टर धारा सिंह राठी के पास पहुंचा। डॉ. राठी ने मरीज़ को देखने के बाद उसके कार्ड पर एक विशेष दवा का नाम लिखने की बजाय अपनी दराज़ से कागज पर लिखी तीन दवाओं का नाम मरीज़ को दिखाते हुए कहा कि वह उन दवाओं का फोटो अपने मोबाइल में ले ले। जब मरीज़ ने फोटो ले लिया तो डॉक्टर ने उसे एक विशेष दुकान से दवा खरीदने को कहा।
मरीज़ बेचारा डॉक्टर के बहकावे में आकर दवा ले भी लेता, परन्तु उसके एक जानकार की सलाह पर उसने बताई गई दुकान पर जाकर केवल दवा का मोल पूछा जो 1300 रुपये बताया गया। इस पर उसके सलाहकार ने वही दवा किसी अन्य दुकान से जाकर खरीदने को कहा तो वही दवा मात्र 300 रुपये में उसको मिल गई।
विदित है कि सरकारी हिदायत के अनुसार ये डॉक्टर साहेबान अपने हाथ से केवल वही दवाइयां लिखेंगे जो अस्पताल में मौजूद हों अथवा जैनरिक हों। जाहिर है कि ऐसा करने से तो डॉक्टर को कोई आमदनी होने वाली नहीं। इसलिए काली कमाई के लिए डॉक्टर ने यह अनूठा तरीका अपनाया है। यदि वह गरीब मरीज़ डॉक्टर के जाल में फंस गया होता तो डॉक्टर को अवश्य ही मोटा कमीशन मिल गया होता। कितनी शर्मनाक बात है कि डेढ़-दो लाख मासिक वेतन पाने वाले डॉक्टर ने उस गरीब मरीज पर जरा भी दया नहीं की जो बामुश्किल 10-12 हजार रुपये मासिक ही कमा पाता है। यह केस तो एक उदाहरण मात्र है जो ‘मज़दूर मोर्चाÓ के संज्ञान में आ पाया, न जाने इस तरह की ठगी के और कितने मामले आए दिन इन सरकारी अस्पतालों में होते रहते हैं।
डॉक्टरों द्वारा बेखौफ होकर की जाने वाली इस तरह की ठगी केवल इसलिए हो पा रही है कि उनके ऊपर बैठे पीएमओ, सीएमओ तथा उनसे भी ऊपर बैठे उच्चाधिकारियों ने उन्हें पूर्ण अभयदान दे रखा है।