फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) जीरो टॉलरेंस का ढिंढोरा पीटने वाले सीएम मनोहर लाल खट्टर ने अपने भ्रष्ट चहेते धनेश अदलखा की लूट कमाई सुनिश्चित करने के लिए अब उसे हरियाणा स्टेट बोर्ड ऑफ टेक्निकल एजुकेशन (एचएसबीटीई) की परीक्षा कमेटी का सदस्य बनाया है। हरियाणा फार्मेसी काउंसिल के चेयरमैन रहते हुए धनेश अभ्यर्थियों को लूटने की अपनी कला का प्रदर्शन बाखूबी कर चुके हैं। लूट कमाई और भ्रष्टाचार की उनमें इतनी क्षमता है कि वे तकनीकी परीक्षा बोर्ड का सदस्य बनाए जाने पर हरियाणा में भी मध्य प्रदेश के व्यापमं जैसा कारनामा अंजाम दे सकते हैँ। रक्षा ढाल के रूप में सीएम खट्टर तो मौजूद हैं ही उन्हें बचाने के लिए, इसीलिए पहले की तरह ही प्रदेश की ‘मुस्तैद’ पुलिस गंभीर केस दर्ज होने के बावजूद उन्हें पकड़ नहीं पाएगी।
नगर निगम में दो बार पार्षद रहे धनेश अदलखा किसी भी सत्ता में लूट कमाई का जुगाड़ करने में माहिर हैं, केंद्र में मोदी और प्रदेश में खट्टर सरकार आने के बाद धनेश ने लूट कमाई के धंधे को जिला से प्रदेश स्तर पर लाने के लिए केंद्रीय मंत्री किशनपाल गूजर और सीएम खट्टर को साधा। प्रशासनिक कामों में दलाली इक_ा करने और हिस्सा पत्ती पहुंचाने में माहिर अदलखा ने जल्द ही मुकाम बना लिया। खट्टर ने भी पंजाबी बिरादरी के भ्रष्टाचारी भाई को एक के बाद एक मौके दिए। पहले उन्हें हरियाणा सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक का चेयरमैन बनाया गया, लेकिन यहां लूट कमाई के बड़े मौके हाथ नहीं लग रहे थे। इस पर खट्टर ने उन्हें हरियाणा फार्मेसी काउंसिल का चेयरमैन बना दिया। यहां उन्होंने फार्मेसिस्ट को लाइसेंस उपलब्ध कराने के लिए तीस हजार से अस्सी हजार रुपये तक वसूल कर करोड़ों रुपये कमाए। उन पर काउंसिल के खजाने में जमा अकूत धनराशि को निजी संपत्ति की तरह इस्तेमाल करने के गंभीर आरोप भी लगे। काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष केसी गोयल, सदस्यगण अरुण पाराशर व बीबी सिंघल ने धनेश पर पांच करोड़ रुपये गबन करने का आरोप लगाया था। सरकार द्वारा आईएएस प्रभजोत सिंह से जांच का नाटक कराया गया और परिणाम वही हुआ जो खट्टर चाहते थे, धनेश पर पांच करोड़ रुपये का गबन साबित नहीं होने दिया। हालांकि विजिलेंस जांच में प्रधान धनेश अदलखा, उप प्रधान सोहन लाल कंसल और रजिस्ट्रार राजकुमार वर्मा भ्रष्टाचार में शामिल पाए गए थे। उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हुई, सोहनलाल कंसल तो गिरफ्तार भी हो गए लेकिन अदलखा को फरार होने दिया। शत्रुजीत कपूर ने बतौर डायरेक्टर विजिलेंस अदलखा के खिलाफ तमाम सबूत इकट्ठा कर लिए थे लेकिन खट्टर ने उसे गिरफ्तार नहीं होने दिया और पुलिस जांच में उसे बरी करा लिया। खट्टर से यारी हो तो ऐसी हो, जिस पर भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज हो, वह फरार हो, उसे बचाया गया हो और उसे फिर से लूट मार का बड़ा मौका उपलब्ध कराए।
अब सीएम खट्टर ने धनेश अदलखा को एचएसबीटीई की परीक्षा समिति सदस्य का पद थाली में सजा कर सौंप दिया है। जिस तरह अदलखा फार्मेसी काउंसिल के चेयरमैन पद पर रहते हुए रजिस्ट्रार पर हावी हो गए थे उसी तरह खट्टर की मेहरबानी से यहां सदस्य रहते हुए भी वह परीक्षा समिति पर हावी होंगे। यहां फार्मेसी काउंसिल के मुकाबले परीक्षा पास कराने के नाम पर प्रत्येक अभ्यर्थी से लाखों रुपये वसूलने का स्कोप है। चुनावी वर्ष में खट्टर ने उन्हें बड़ी लूट कमाई करने का मौका दिया है हो सकता है कि अगले साल सरकार न बने इसलिए उन्हें हाथ आजमाने की पूरी छूट भी दी जाएगी।