फरीदाबाद (म.मो.) के पिछले अंकों में आप पढ चुके हैं कि दो साल के लम्बे अंतराल के बाद राजकीय महिला कॉलेज फरीदाबाद में अवैध सा पेड़ काटने के मामले में जनवरी 2020 में जाकर पुलिस में मुकदमा दर्ज हुआ। हम यह भी लिख चुके हैं कि मुकदमा सिर्फ एक क्लर्क-उप-अधीक्षक चम् प्रकाश पर दर्ज हुआ और प्रिसिपल साफ बच गई या बचा ली गई। करीब डेढ साल पहले मज़दूर मोर्चा इस कांड पर एक विस्तृत रिपोर्ट भी छाप चुका है। उसमें भी इस चोरी में प्रिसिपल भगवती राजपूत की भूमिका पर सवाल उठाये गये थे। लेकिन एक लूला लंगड़ा सा मुकदमा सेक्टर 17 के थाने में दर्ज हुंआ जिसकी तहकीकात सेक्टर 16 की पुलिस चौकी के एक एएसआई को दी हुई है।
विश्वस्त सूत्रों से पता चला है कि इस मामले में पुलिस अधिकारी जांचकर्ता व अन्य सम्बन्धित व्यक्तियों को डरा धमका कर केस को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है। पहले तो शिकायतकर्ता कॉलेज के चौकीदार तेजराम को चौकी में बुलाकर धमकाया गया कि उसने पांच-छ: पेड़ काटने की ‘छोटी सी बात का बतंगड़ बना कर यहां तक पहुंचा दिया। यह भी कहा गया कि उसके पास कोई सबूत नहीं है और उसको धमकाया गया। लेकिन चौकीदार अपनी बात पर डटा रहा, बताते हैं।
उसके बाद बारी आयी कॉलेज में उन प्रोफेसरों की जो कॉलेज की उस कमेटी के सदस्य थे जिसने इस मामले की जांच की थी। बताया जाता है कि इन जांचकर्ता पुलिस अधिकारी महोदय ने इन प्रोफेसरों को धमकाने के अंदाज में कहा कि उन्होंने कॉलेज के उप- अधीक्षक चमन प्रकाश मंगला को अपनी रिपोर्ट में दोषी कैसे ठहरा दिया। उसके अभद्र लहजे पर इन प्रोफेसरों ने आपत्ति उठाई और उसे नम्रता से बात करने की सलाह दी। बता दे कि इस अधिकारी ने इन महिला प्रोफेसरों को चौकी में आने को भी कहा जो कि नियम और शिष्टाचार दोनों के विरुद्ध है। उसका व्यवहार ऐसा दर्शाता है जैसे कि कॉलेज की ये प्रोफ़ेसर तो अभियुक्त हैं और नामजद आरोपी चमन प्रकाश निर्दोष। हालांकि प्रोफेसरों ने बिना किसी लिखित नोटिस के चौकी पर आने से मना कर दिया और उसे इस सम्बंध में कॉलेज की प्रिंसिपल से संपर्क करने को कहा। ध्यान रहे कि कॉलेज कमेटी इस मामले में जांच करके रिपोर्ट मार्च 2018 में ही कॉलेज की तत्कालीन प्रिंसिपलल श्रीमती भगवती राजपूत को सौंप चुकी थी।
इस तरह का व्यवहार जांच करने वाले पुलिस अधिकारी की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।