फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) मेवला महाराजपुर इलाके में नगर निगम और हूडा द्वारा बनाई जा रही सड़कों के लेवल में करीब छह से आठ इंच ऊंच-नीच का फर्क आ गया है। यानी जहां हूडा की सड़क एमसीएफ द्वारा बनवाई गई सड़क से मिलती है वहां आठ इंच ऊंचा डिवाइड बन गया है।
बदतरीन इंजीनियरिंग का यह नमूना हूडा और नगर निगम के होनहार इंजीनियरों और डिजाइनरों की देन है,
ये दोनों महकमे सड़क का लेवल भी नहीं तय कर सके। रही निर्माण की तो वह तो हमेशा की तरह घटिया ही होना है, जो शायद गारंटी पीरियड पूरा होने से पहले ही टूट जाए ताकि दोबारा करोड़ों रुपयों का बजट
बनाया जाए। बात हो रही है अनखीर गोल चक्कर से सेक्टर 45 की डिवाइडिंग रोड और सेक्टर 45-46 की डिवाइडिंग रोड की। इन दोनों का जहां मिलन हो रहा है वहां करीब आठ इंच का अंतर आ गया है। अब वाहन चालकों को इस सड़क से उस सड़क जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़े या फिर जबरन स्पीड ब्रेकर जैसा महसूस हो, इंजीनियरों की बला से।
दरअसल, यह दोनों सड़कें जनता की सुविधा के लिए नहीं बल्कि प्रोजेक्ट में हिस्सापत्ती वसूलने के इरादे से
बनाई जा रही हैं। कारण, यह कि इन सड़कों के मुकाबले शहर की अनेक सड़कें बदहाल हैं लेकिन उन्हें
छोड़ कर नेताजी ने इनका दोबारा निर्माण कराने की घोषणा की। सुधी पाठकों को बता दें कि अनखीर गोल चक्कर से सेक्टर 45 की डिवाइडिंग रोड अच्छी भली हालत में थीं, बस कहीं पैचवर्क की जरूरत थी। नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत सड़कों के पैचवर्क के लिए मोटा फंड आया हुआ है। पैचवर्क कराने में ऊंट के मुंह में जीरा जितना
कमीशन बनता, इसलिए पूरी सड़क ही दोबारा बनवाने का प्रोजेक्ट बना दिया। हरामखोरी में माहिर निगम के
अधिकारियों ने इस सड़क का एक प्रोजेक्ट नहीं बनाया, क्योंकि करीब तीन करोड़ रुपयों का खेल किया जाना था,
इतनी बड़ी रकम पर सरकार की नजर न पड़े इसीलिए एक ही सड़क के दो टुकड़े कर दो प्रोजेक्ट बनाए गए। करीब तीन करोड़ खर्च कर यह सड़क तारकोल से बनाई जा रही है।
इधर, हूडा सेक्टर 45-46 की डिवाइडिंग रोड बनवा रहा है। बता दें कि यह सड़क करीब तीन साल पहले हूडा
ने तारकोल से बनवाई थी। सड़क निर्माण में ठेकेदार ने अच्छी तरह हिस्सापत्ती दी, अपना मुनाफा बचाने के लिए
घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया। नतीजा यह हुआ कि इधर सड़क बनी उधर टूटने लगी,
क्योंकि कमीशनखोरी हुई थी इसलिए ठेकेदार पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। होना तो ये चाहिए था कि गारंटी
पीरियड के चलते ठेकेदार से उसके खर्चे पर मरम्मत कराई जाती लेकिन ‘भ्रष्टाचार सहयोगीÓ अधिकारियों
ने इसके उलट टालमटोल करते हुए किसी तरह गारंटी पीरियड खत्म करवा दिया। समय सीमा समाप्त होते ही सड़क रिपेयर का टेंडर जारी कर दिया गया। समझा जा सकता है कि घटिया सड़क मरम्मत के बाद भी कितनी चलती।
इसके अलावा मरम्मत में भी तो हिस्सापत्ती वसूली गई तो एक बार फिर घटिया माल लगाकर कागजों में सब ओके किया गया। अब केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर के आदेश पर हूडा इस सड़क पर अपने पाप छिपाने के लिए इसे आरएमसी से बनवा रहा है। इसकी लागत भी 3 करोड़ 50 लाख रुपये रखी गई है। सड़क का लेवल समान रहे इसलिए नियमानुसार पुराने मार्ग को उखाड़कर आरएमसी बिछाई जानी चाहिए। ऐसा करने में सड़क उखाड़ने पर भी खर्च करना पड़ेगा, इसलिए पुरानी सड़क के ऊपर ही आरएमसी बिछवाई गई और सड़क खुदवाई की मद का धन ठेकेदार- अधिकारियों के बीच बंट जाएगा। लेवल मैच न करने का खामियाजा यह हुआ कि ये सड़क
जहां नगर निगम की अनखीर गोल चक्कर से सेक्टर 45 की डिवाइडिंग रोड से कनेक्ट हो रही है वहां करीब आठ
इंच ऊंचा गैप आ गया है। स्थानीय लोगों का सवाल है कि इतने बड़े प्रोजेक्ट में दोनों महकमों के बीच समन्वय क्यों नहीं किया गया। क्या दोनों के इंजीनियरों को लेवलिंग के मानकों की जानकारी नहीं थी जो इतनी बड़ी खामी रह गई।
सेक्टर 45 में रहने वाले पवन कहते हैं कि आरएमसी की सड़क गर्मी में फैलती हैं जिसके कारण जोड़ों पर फोल्ड
बन कर उभर आते हैं, यहां तो पहले ही आठ इंच का फोल्ड बन चुका है। लोगों का कहना है कि जब सड़क बनकर तैयार हो जाएगी तो इनका लेवल करने के लिए नया टेंडर निकाला जाएगा और फिर लूटकमाई होगी।
दरअसल, सरकार ने विकास के लिए नगर निगम, एफएमडीए आदि संस्थाएं तो बना दी हैं लेकिन उनमें या भ्रष्ट, फर्जी डिग्री धारक इंजीनियर भरे पड़े हैं या भ्रष्ट रिटायर्ड अधिकारी जो हूडा, नगर निगम या स्मार्ट सिटी में
रहकर लूट कमाई के सारे रास्ते सीख चुके हैं। जब एक ही तरह के विकास कार्य अनेक महकमों से कराए जाएंगे
तो ज्यादा जोगी मठ उजाड़ की तर्ज पर इसी तरह के विकास कार्य ही होंगे, रही जनता की बात तो वह बेचारी गूजर- अदलखा आदि की लुभावनी घोषणाओं के जरिए तब तक ठगी जाती रहेगी जब तक इनका गिरेबान पकड़ कर सवाल नहीं पूछती।