करनाल (मज़दूर मोर्चा) रेवाड़ी में सट्टेबाजी के आरोपी के जमानतगीर को इसी केस में फंसाने का डर दिखा कर चार लाख रुपयों की मांग कर रहे क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (सीआईए) एक के इंस्पेक्टर अनिल कुमार गुडग़ांव एंटी करप्शन ब्यूरो ने रंगेहाथ गिरफ्तार किया। बताया जा रहा है कि अनिल कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की जांच भी की जा सकती है। गुडग़ांव एसीबी के इंस्पेक्टर जयपाल सिंह ने बताया कि सीआईए एक की टीम ने शहर के मोहल्ला उत्तम नगर मेें तीन सट्टेबाजों दुबई कैपिटल और शारजाह के बीच खेले गए मैच में सट्टा लगाते हुए गिरफ़्तार किया था।
इस मामले की जांच सीआईए का इंस्पेक्टर अनिल कुमार कर रहा था। तीनों आरोपी जमानत पर जेल से बाहर आ गए थे। एक आरोपी के जमानतगीर गांव कालाका निवासी सचिन को इंस्पेक्टर अनिल कुमार इसी केस में फंसाने का डर दिखा कर बचने के लिए चार लाख रुपयों की मांग कर रहा था। सचिन ने इसकी शिकायत एससीबी गुडग़ांव से की थी। एसीबी की सलाह पर सचिन ने अनिल से मोलभाव शुरू किया और बात पौने चार लाख रुपये पर तय हो गई। अनिल ने यह रकम एकता सोसायटी में आकर देने को कहा। एक फरवरी की शाम एसीबी की टीम सोसायटी में तैनात हो गई और तय समय पर सचिन 3 लाख 75 हजार रुपये लेकर पहुंचा, जैसे ही सचिन से अनिल से नकदी ली, एसीबी टीम ने उसे रंगेहाथों धर लिया। एसीबी ने इंस्पेक्टर के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है।
हालांकि इंस्पेक्टर अनिल के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है लेकिन जानकार बताते हैंं कि वह इस रिश्वत राशि को गिफ्ट साबित कर खुद बेगुनाह बताना चाहता है। लेकिन रकम इतनी बड़ी है कि उसका बचना नामुमकिन है। हरियाणा सिविल सर्विस (सरकारी अधिकारियों/कर्मचारियों के आचरण संहिता) 2016 के नियम 17 के अनुसार कोई भी सरकारी राजपत्रित अधिकारी किसी विशेष उपलक्ष पर केवल निम्रलिखित राशि तक का ही गिफ्ट प्राप्त कर सकता है- ग्रुप ए 7000 ग्रुप बी 4000, ग्रुप सी 2000 ग्रुप डी 1000 इसी उधार लेने और देने पर भी नियमानुसार पाबंदी है जिसका नियमो मे प्रोफार्मा उपलब्ध है।
रूल 24 के अनुसार, कैश, बैंक बैलेंस, जमा, लोन और एडवांस शेयर आदि में इन्वेस्टमेंट ज्वेलरी और बीमे, गाडिय़ों, मोटर साइकिल स्कूटर इत्यादि इसके अतिरिक्त जो गाड़ी इस्तेमाल कर रहा हो चाहे वह किसी के नाम से हो, बिजली का घरेलू सामान, कर्ज और लेनदारी परिवार के सदस्यों ने जो स्वयं की सम्पति छोडकर खरीदारी की हो उसका ब्यौरा दिया जाना चाहिए। इसी तरह कुल वेतन योग की केवल 30 से 40 प्रतिशत ही बचत की जा सकती है वो भी परिवारों की परिस्थितियों के अनुसार। ऐसा सम्भव नहीं कि महीने में वेतन का 70 प्रतिशत से भी अधिक ईएमआई भरता हो, ऐसा होने पर काले धन की जांच के दायरे मेें आ जाएगा। बच्चे निजी कारों में स्कूल ट्यूशन जाते हो, अधिकारियों कर्मचारियों की बचत पास बुक सफेद को काले का खेल उजागर कर देगी।
दरअसल, संम्बन्धित विभाग अध्यक्षों और सतर्कता अधिकारियों ने इन सूचनाओं से आँख मूंद रखी है जो प्रमाण है कि वे भी भ्रष्टाचार मे काले को सफेद करने में संलिप्त है। दोषी को लाभ पहुंचाने के नजरिये से भ्रष्टाचार को नजरअंदाज करने से आरोपी कर्मचारी को दोष मुक्त होने में मदद मिलती है, इंस्पेक्टर अनिल के मामले में भी ऐसा ही न हो।