हरियाणा के आर्यसमाजी भजनी नरसिंह जी हुए । एक बार एक सभा मैं गणेश का जिक्र हुया तो एक टोटका सुनाया उणनै: एक बार रोहतक के टेशन पर एक टी टी ला दिया। मकान मिलग्या। भैँस बांधली । मौज होरी थी। एक दिन टिकट काटते काटते नै देख्या अक भैंस तो ट्रैक मैं खड़ी सै। दिल्ली कान्ही की गाड्डी आवन लागरी थी। उसनै भाजकै जाकै भैंस कै धक्का मारकै ट्रैक तैं बाहर करण की सोची। भाजकै गया अर धक्का मारया । भारया थी । उल्टा वो खुद ट्रैक मैं घलग्या। ट्रेन आई अर दोनुआ नै बीच तैं काटगी। धोरे कै एक बड्डा पहोंचे औड़ बाबाजी जा था। उसनै सारा नजारा देख्या अर सैड़ दे सी तावल करकै भैंस का पाछा अर टी टी का आगा जोड़ दिया। मौज होगी टी टी की। दिन मैं टिकट काटै टेशन पै और तडक़ै साँझ नै 10 किलो दूध काढ़ कै पीवै। लोग बाग़ कहन्ते — दादा या बात तो होण की कोण्या। नरसिंह भजनी कहते- फेर गणेश कै हाथी का मुँह क्यूकर लॉग सकै सै? -रणबीर