फरीदाबाद (ममो) 11 दिसम्बर को फरीदाबाद में स्कूल के बच्चों को घेर घोटकर गीता महोत्सव के नाम पर एक रैली निकाली गई। जाहिर है कि इसमे प्राइवेट स्कूलो में पढऩे वाले अमीरों के बच्चे तो बुलाए नहीं जा सकते थे सो सरकारी स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को घेर घोटकर लाया गया। गरीबों के बच्चों का पढ़ाई से क्या मतलब और क्या फायदा, वो तो पैदा ही बजरंग दल और विश्व हिन्दू परिषद की रैलियों मेंं जाने के लिए हुए है। हरियाणा स्कूल शिक्षा विभाग ने बाकायदा आदेश जारी करके इनको इस रैली में भेजा है।
रैली में बच्चे एक ही नारा लगा रहे थे कि ‘एक ही नारा एक ही नाम, जय श्रीराम जय श्रीराम’। वैसे न तो रैली मैं भाग लेने वाले बच्चों और न उनके अध्यापकों को पता था कि गीता महोत्सव की रैली में राम के नारे का क्या तुक है। राम तो उस वक्त थे ही नहीं। उपदेश कृष्ण ने दिये, सारी लड़ाई कृष्ण ने करवाई, राम बीच में कहां से आ गए पता नहीं।
रैली में कई मंदिरों की झांकियों के साथ एक झांकी सजायाफ्ता बलात्कारी बाबा आसाराम की भी थी। शायद ऐसे लोग ही बीजेपी और इस सरकार के आदर्श हैं सो उनके बिना तो इनका कोई कार्यक्रम पूरा हो ही नहीं सकता। प्राइवेट स्कूल्स ने अपने बच्चों की जल्दी छुट्टी कर दी थी ताकि उनके बच्चों को इस रैली से लगने वाले जाम से परेशानी न हो। वैसे इससे गरीबों और मजदूरों को समझ जाना चाहिए कि ये सरकार और बीजेपी उनके बच्चों को क्या पढ़ाना चाहती है और उनको किस आग में झोंकना चाहती है.