विकास के नाम पर बनाया कुत्तों का श्मशान

विकास के नाम पर बनाया कुत्तों का श्मशान
February 13 07:30 2026

फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) शहर के विकास तथा कुत्तों के सम्मान के नाम पर, नहर पार बसे गे्रटर $फरीदाबाद के गंाव बुढैऩा की जमीन पर कुत्तों के शवदाह के लिए शमशानघाट का निर्माण किया गया है। इसके लिए हरियाणा सरकार के सेवानिवृत मुख्य सचिव सुनील गुलाटी तथा नगर निगम आयुक्त धीरेन्द्र खडग़टा की मुख्य भूमिका बताई गई है। प्रदूषण घटाने के नाम पर कुत्ते का दाह-संस्कार लकड़ी की बजाय उपलों से किया जाएगा। यह नहीं बताया गया कि डबुआ कॉलोनी, अथवा बल्लबगढ़ की भूदत्त कॉलोनी, अथवा ग्रीन फील्ड कॉलोनी में मरने वाले कुत्तों को बुढैऩा के इस शमशान घाट तक कौन और कैसे लाएगा? क्या इसके लिए भी कुत्तों की शव-यात्रा का भी कोई प्रबन्ध नगर निगम करेगा?

सर्वविदित है कि कुत्ते अब कोई पहली बार मरने नहीं जा रहे हैं, जबसे ये पैदा होने लगे हैं तभी से मरने का सिलसिला भी जारी है। इसके लिए देहातों में पंचायत तथा शहरों में नगर पालिका अथवा नगर निगम इन्हें दफनाने का कार्य करते रहे हैं। बिना किसी ड्रामेबाजी के दो-चार फुट गहरा गड्ढा खोद कर उसमें मृत कुत्ते को दफनाया जाता रहा है। परन्तु जब से शहरी स्थानीय निकायों में हरामखोरी व्याप्त हुई है तब से दफनाने का यह काम लगभग बंद सा हो गया है। इसके चलते मृतक कुत्ते जहां-तहां पड़े सड़ते रहते हैं। अब, उक्त शमशान घाट बनने के बाद तो नगर निगम वाले इन्हें दफनाने के काम से बिल्कुल हाथ झाड़ कर खड़े हो जाएंगे तथा कुत्ते के शव को शमशान घाट ले जाने के लिए साधनों की मांग खड़ी की जाएगी। जाहिर है इसके नाम पर नए घोटालों की शुरुआत का होना तय है।
नगर निगम डेढ़ करोड़ की लागत से 56ं सेक्टर में शमशान घाट बनाने जा रहा है। इसमें प्रदूषण घटाने के नाम पर लकडिय़ों की जगह उपलों का प्रयोग किया जाएगा। इसके द्वारा जहां पेड़ कटने से बचेंगे वहीं गौशालाओं के उपले बिकने से उनकी आमदनी बढ़ेगी। जरा भी वैज्ञानिक समझ रखने वाले यह नहीं समझ पा रहे कि लकड़ी जलने की अपेक्षा उपले जलने से प्रदूषण कैसे घट सकता है? यह केवल खाम-ख्याली तथा मूर्खतापूर्ण सोच के अलावा और कुछ नहीं हो सकता। हां, यदि शव दहन के लिए गैस अथवा बिजली का प्रयोग किया जाए तो प्रदूषण से कोई राहत मिलने की सम्भावना हो सकती है।

दूसरे, यह बात समझ से परे है कि नगर निगम डेढ़ करोड़ का कैसा श्मशान घाट बनाएगा? शहर भर में आज जितने भी श्मशान घाट हैं, तमाम पंचायती एवं सार्वजनिक जमीनों पर नागरिक संस्थाओं दान व चंदों द्वारा बनाए गए हैं। लगभग ये सभी श्मशान घाट जन कमेटियों द्वारा बहुत अच्छी तरह से चलाए जा रहे हैं। अब नगर निगम को यकायक श्मशान घाट के निर्माण में घुसने की जरूरत क्यों आन पड़ी? जैसी कि नगर निगम की शोहरत है, ये केवल वहीं काम हाथ में लेना पसंद करते हैं जिसमें लूट कमाई की जा सके।

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Mazdoor Morcha
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