मज़दूर मोर्चा ब्यूरो हाल ही में गुडग़ांव और फरीदाबाद नगर निगमों ने अवैध विज्ञापनों के खिलाफ बड़े अभियान चलाकर सड़क, इमारत, खंभों आदि पर लगे विज्ञापनों को तोडऩे-फाडऩे की कार्रवाई की। मीडिया और अखबारों ने इस कार्रवाई का ढिंढोरा सरकार द्वारा विज्ञापन माफिया का शिकंजा कसने के रूप में बजाया। सरकार में मौजूद भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार दरअसल, यह अभियान अवैध विज्ञापनों के खिलाफ नहीं चलाया गया बल्कि कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह और विपुल गोयल द्वारा अकूत कमाई वाले विज्ञापन कारोबार पर कब्जा जमाने की जमीन तैयार करने के लिए चलाया गया। इस धंधे की कमान विपुल गोयल के भतीजे अमन गोयल को सौंपी गई है और दोनों कैबिनेट मंत्री पीछे से उसको हर स्तर पर मदद कर रहे हैं।
सुधी पाठकों को बताते चलें कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के बहुत करीबी और मप्र के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का बेटा कल्पेश विजयवर्गीय ही गुडग़ांव के डीएलएफ का पूरा विज्ञापन मीडिया चलाता है। यानी डीएलएफ एरिया में छोटे से लेकर बड़े विज्ञापन की सारी कमाई कल्पेश की एनएस नामक कंपनी को ही मिलती है। कैबिनेट मंत्री राव नरबीर और उनके दोस्त विपुल गोयल ने विज्ञापन की मोटी कमाई देखी तो इस धंधे में पांव पसारने को आतुर हो गए। इस धंधे में कैसे घुसा जाए यह यक्ष प्रश्न था क्योंकि गुडग़ांव का सबसे कमाई वाला इलाका कद्दावर कैलाश विजयवर्गीय के बेटे के पास था। ऐसे में गुडग़ांव शहरों को कई जोन में बांटने की रणनीति बनाई गई। भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार इसके लिए कैबिनेट मंत्री के भतीजे अमन गोयल ने गुडग़ांव, फरीदाबाद और यहां तक कि दिल्ली के भी बड़े विज्ञापन ठेकेदारों को बुलाकर बैठक की। बैठक में अमन ने प्रस्ताव रखा कि गुडग़ांव में विज्ञापनों के लिए करीब पांच जोन बनाने का प्लान है। इन जोन का ठेका दिलाने के लिए ठेकेदारों से सिक्योरिटी मनी के नाम पर मोटा नजराना मांगा गया।
सभी ठेकेदार जानते हैं कि कल्पेश के आगे किसी की दाल गलने वाली नहीं है। कुछ ठेकेदारों ने हिम्मत दिखाई लेकिन अमन के सामने शर्त रखी कि वह वादा करें और विश्वास दिलाएं कि गुडग़ांव में उनके विज्ञापन हटाए नहीं जाएंगे और उनके हितों को सुरक्षित रखा जाएगा। अमन ने ऐसा कोई भरोसा देने से मना करते हुए कहा कि ठेकेदारों को अपने रिस्क पर काम करना होगा। इस पर सारे ठेकेदार पीछे हट गए। सब का कहना था कि पहले जोन बना लो, फिर आवंटन के बाद ही नजराना दिया जाएगा। भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार डीटीपी सिद्धार्थ खंडेलवाल ने बिना किसी नोटिफिकेशन के ही बीते करीब छह महीने से थर्ड पार्टी एडवारटाइजिंग परमीशन बंद कर रखी है। जानकारों के अनुसार खंडेलवाल ने अमन गोयल के इशारे पर परमीशन बंद की है, क्योंकि अमन अपने चट्टे-बट्टों को कमाई कराना चाहता है।
गुडग़ांव के भाजपाइयों में चर्चा हो रही है कि राव नरबीर और कैलाश विजय वर्गीय के बीच बीते दिनों गर्मागर्म बहस हुई। चर्चा के अनुसार राव नरबीर ने कैलाश विजय वर्गीय को फोन कर कहा कि अब गुडग़ांव का विज्ञापन कारोबार हमारे लोग संभालेंगे। उनका कहने का मतलब था कि कल्पेश को एक इलाके तक सीमित कर बाकी पूरे गुडग़ांव का विज्ञापन उनके आदमी संभालेंगे। विजयवर्गीय ने थोड़ी देर इंतजार करने को कह कर फोन काट दिया। करीब दस मिनट बाद राव नरबीर के पास एक फोन आया, बताया जा रहा है कि कॉल करने वाले ने अपना परिचय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का दाहिना हाथ के रूप में दिया और फिर मंत्री जी की जमकर क्लास ली। चेतावनी दी कि अपनी हैसियत से आगे बढऩे की कोशिश मत करो। डीएलएफ के विज्ञापन मीडिया की ओर नजर करोगे तो तुम्हारा राजनीतिक कॅरियर खत्म कर दिया जाएगा। भाजपाइयों की चर्चा की मज़दूर मोर्चा पुष्टि या खंडन नहीं करता, लेकिन जिस तरह अवैध विज्ञापनों के खिलाफ अभियान चलाए गए उससे दाल में कुछ काला होने की संभावना से इनकार भी नहीं किया जा सकता। विज्ञापन ठेकेदारों के बीच भी गुडग़ांव-फरीदाबाद को विज्ञापन जोनों में बांटे जाने की चर्चाएं बता रही हैं कि कुछ तो पक रहा है। भाजपाइयों की चर्चा कितनी सही या गलत है वह आने वाले दिनों में नगर निगमों द्वारा विज्ञापनों के संबंध में की जाने वाली कार्रवाईयों से निश्चित होगा।
विज्ञापनाबाजी के इस धंधे में इतनी भयंकर लूट है कि यदि इसे रोक दिया जाए और ईमानदारी से वसूली हो जाए तो नगर निगम को किसी और टैक्स की आवश्यकता न रह जाए, यह लूट न केवल फरीदाबाद और गुडग़ांव में बल्कि दिल्ली मुंबई जैसे शहरों में तो बड़े पैमाने पर चल रही है, जिसे आम आदमी समझ भी नहीं सकता।