सौंदर्यीकरण के नाम पर लूट और ट्रैफिक जाम की तैयारी

सौंदर्यीकरण के नाम पर लूट और ट्रैफिक जाम की तैयारी
October 28 03:57 2024

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) टूटी सड़कें, सीवर ओवरफ्लो, कचरों के ढेर जैसी समस्याओं के साथ, और आधारभूत सुविधाओं के अभाव में जीने को मजबूर शहरवासियों को एफएमडीए गौरव की अनुभूति कराने के लिए चौक-चौराहों को मूर्तियों से सजाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है।

गौरवान्वित कराने के उत्साह में एफएमडीए अधिकारी उन चौराहों पर भी गोल चक्कर बनवा कर मूर्तियां लगवा रहे हैं, जहां ऐसा करने से वाहनों के आवागमन में मुश्किलें ही बढऩे वाली हैं। इसके विपरीत उन चौराहों को छोड़ दिया गया है जिन पर यातयात बेहतर करने के लिए गोल चौराहे की जरूरत है।

ईएसआई चौक पर एफएमडीए की ओर से गोल चौराहा बनाया जा रहा है। गोल चक्कर के लिए घेरी गई जमीन के कारण चारों ओर सड़क काफी संकरी हो गई है। खास कर एनआईटी तीन मस्जिद चौक से मेट्रो चौक और एनआईटी दो की ओर जाने वाला रास्ता संकरा हुआ है। हालांकि एफएडीए के चीफ इंजीनियर रमेश बागड़ी का दावा है कि चौक बनने के बावजूद इस चौराहे पर चारों ओर सड़क की चौड़ाई 18 मीटर है। लगता है कि रमेश बागड़ी ने इस चौराहे की पैमाइश ठीक से नहीं की है तभी तो इस तरह के झूठे दावे कर रहे हैं। चौक पर चारों ओर दस मीटर सड़क भी नहीं बच रही है। बची खुची कसर ठीक चौक पर अतिक्रमण कर अवैध रूप से बनाई गई इमारत ने पूरी कर दी है।

अतिक्रमण के कारण सड़क किनारे लगने वाली ट्रैफिक लाइट भी इस इमारत से छिप गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां गोल चक्कर बनाने से पहले चौक का अध्ययन करना चाहिए था, अतिक्रमण हटवा कर सड़क चौड़ी करवाई जाती तो वाहनों का आवागमन आसान होता। व्यस्त जगहों पर गोल चक्कर इसलिए बनाया जाता है कि वाहन बिना रुके किसी भी तरफ आ जा सकें, ईएसआई चौक पर बनाया जा रहा गोल चक्कर यह काम नहीं करने वाला। इसके बनने के बाद भी यहां वाहनों को ट्रैफिक लाइट के अनुसार ही चलना होगा। ऐसे में यह गोल चक्कर वाहनों के लिए अड़ंगा ही साबित होने वाला है।

जागरूक नागरिकों का मानना है कि ईएसआई की जगह यह गोल चक्कर एनआईटी तीन नंबर मस्जिद चौक पर बनना ज्यादा जरूरी है। शहर को गुडग़ांव मार्ग से जोडऩे वाले इस प्रमुख चौराहे पर ट्रैफिक लाइट होने के बावजूद जाम की स्थिति बनी रहती है। मुल्ला चौक, ईएसआई मेडिकल अस्पताल, डबुआ मंडी और सैनिक कॉलोनी की सड़कों को जोडऩे वाले इस चौराहे पर बड़ा गोल चक्कर बनाने की पर्याप्त जगह है और जरूरत भी। लोगों के अनुसार इस जगह गोल चक्कर बनने से आवागमन बेहतर हो जाएगा, खास कर पीक समय और सुबह-शाम गुडग़ांव की ओर से आने वाले वाहनों को जाम से मुक्ति मिल सकती है।

मस्जिद चौक से थोड़ा आगे डबुआ 17 नंबर चुंगी रोड, एनआईटी दो-तीन विभाजक मार्ग और डबुआ मंडी को जोडऩे वाले चौराहे पर भी गोल चक्कर बनाने की पर्याप्त जगह है। यदि यहां गोल चक्कर बन जाए तो ट्रैफिक लाइटों के जरिए वाहनों को नियंत्रित करने की जरूरत खत्म जाएगी, और सभी वाहन बेरोकटोक किसी भी दिशा की सड़क पर आ जा सकेंगे। इसी तरह बीके चौक, नीलम चौक, पटेल चौक, भगत सिंह चौक, पियाली चौक, सारन चौक पर भी महापुरुषों की 11 से 13 फीट ऊंचाई की मूर्तियां लगाई जा रही हैं। इस पर 2 करोड़ 20 लाख रुपये खर्च किए जा रहेहैं।

वरिष्ठ समाजसेवी सुरेशचंद गोयल कहते हैं कि वर्ष 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने चौराहों पर मूर्तियां लगाने पर प्रतिबंध लगाया था। कोर्ट का मानना था कि मूर्तियों के लिए चौराहों को घेरने से यातायात व्यवस्था बाधित होती है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन कुछ वक्त तक किया गया और फिर वही सब होने लगा। उनका मानना है कि चौक चौराहों को आम जनता की सहूलियत के हिसाब से बेहतर बनाया जाना चाहिए न कि राजनीति चमकाने के लिए।

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Mazdoor Morcha
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