फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) जमीनों पर अवैध कब्जे करने में माहिर भ्रष्टाचारी धनेश अदलखा जनता के वोटों से विधायक तो बन गया लेकिन काम वह अपने भूमाफिया, बिल्डर लॉबी को लाभ पहुंचाने वाला ही कर रहा है। नीलम बाटा रोड पर बन रही बड़ी सी इमारत के आड़े एक अंधे व्यक्ति को अलॉट किया गया बूथ आ रहा था। विधायक अदलखा ने इस इमारत की शोभा खराब कर रहे बूथ को तुड़वा दिया और बहाना बताया कि स्लिप रोड बनवाई जाएगी। विधायक को अंधे व्यक्ति का बूथ तो नजर आ गया लेकिन थोड़ी ही दूरी पर एक निजी अस्पताल द्वारा स्लिप रोड पर किया गया अवैध कब्जा, दवा की दुकान नहीं दिखाई दी।
पूर्व सीएम हूडा की सरकार में विकलांगों के कल्याण के लिए पीसीओ बूथ आवंटित किए गए थे। एनआईटी निवासी एक अंधे व्यक्ति की पत्नी माला मल्होत्रा को भी डिलाइट होटल के सामने की पट्टी पर पीसीओ बूथ अलॉट हुआ था। इस बूथ का किराया भी वह जमा करती थीं और बिजली का मीटर भी लगा था। कालांतर में पीसीओ का काम लगभग बंद हो गया तो उन्होंने रिश्तेदार सचिन ग्रोवर के साथ इस बूथ में शुभम मोटर्स नाम से गाडिय़ों की खरीद फरोख्त का काम शुरू कर दिया। विधानसभा चुनाव के बाद ही इस बूथ के पीछे एक बड़ी सी इमारत का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि इस इमारत में कोई बड़ा शोरूम खोला जाएगा। यह संयोग ही है कि धनेश के विधायक बनते ही इस इमारत का काम शुरू हो गया। अब यह इमारत लगभग बन कर तैयार है तो धनेश अदलखा इसकी राह में आने वाली अड़चनें हटाने खुद ही सड़क पर उतर पड़ा। इस इमारत तक पहुंचना आसान हो इसलिए स्लिप रोड बनवाने का हुक्म भी सुना दिया। माला मल्होत्रा के नाम अलॉट यह बूथ इस शोरूम के आड़े आ रहा था। इसी तरह लेबर चौक स्थित राम धर्म कांटे के पास का अतिक्रमण इस शोरूम तक पहुंचने वाली स्लिप रोड में बाधा था।
अपने चहेते बिल्डर की बाधाओं को दूर करने रविवार सुबह अदलखा खुद सड़क पर उतर पड़ा। छुट्टी का दिन उसने इसलिए चुना ताकि कोई न्यायालय में गुहार भी न लगा सके। ‘माननीयÓ की मंशा देखते हुए नगर निगम, बिजली निगम, पुलिस को भी मजबूरन मौके पर इक_ा होना पड़ा। छुट्टी के कारण निगम में कोई जेसीबी चालक नहीं मिला तो आनन-फानन निजी जेसीबी को तोडफ़ोड़ के लिए बुलाया गया। प्रशासन का संबल मिलते ही अदलखा दबंग होकर स्लिप रोड के नाम पर अपना एजेंडा लागू करने लगा। इक्का दुक्का अतिक्रमण हटवाए ताकि अभियान निष्पक्ष लगे और फिर सीधे विकलांग के बूथ पर पहुंच गया और तुरंत तोडऩे का फरमान सुनाया।
दुकान में मौजूद लोगों ने दलील दी कि साहब यह बूथ विकलांग कोटे में अलॉट किया गया था, अतिक्रमण या अवैध नहीं है। लेकिन अदलखा को तो शोरूम का कांटा साफ करना था तो उसने दबाव बनाने के लिए कहा कि सरकारी जमीन पर कब्जा है इसके खिलाफ एफआईआर कराओ, जवाब मिला कि कब्जा नहीं है साहब सरकार को किराया जाता है, बिजली कनेक्शन भी है। शोरूम वालों ने तो विधायक को पहले ही बता रखा था कि 2007 से बूथ का किराया नहीं जमा किया गया है। अदलखा ने धमकी देने वाले अंदाज में कहा कि इससे बकाया किराया जुर्माने सहित वसूलो और इसे तोड़ो। समझने वाली बात यह है कि किराया जमा न होने पर किसी का बूथ बिना कानूनी प्रक्रिया, नोटिस दिए नहीं तोड़ा जा सकता लेकिन रविवार को खुद न्यायाधीश बनते हुए अदलखा ने जेसीबी को तोडऩे का हुक्म सुना दिया। दुकानदार ने हाथ पैर जोड़े तो उसे अंदर से सामान निकालने के लिए पांच मिनट का समय दिया गया। जल्दबाजी में केवल मेज कुर्सियों, टीवी वगैरह ही निकाला जा सका, दीवारों में फिक्स फर्नीचर आदि नहीं निकाला जा सका और जेसीबी ने बूथ को ध्वस्त कर दिया।
एक कांटा निकालने के बाद स्लिप रोड क्लियर करने के लिए लेबर चौक पर अतिक्रमण हटा दिया गया। इसके बाद अदलखा ने स्लिप रोड पर किसी भी तरह का अतिक्रमण हटाकर चार पहिया वाहनों के आने जाने योग्य बनाने की मंशा जाहिर की। समझने वाली बात है कि अदलखा को सिर्फ करीब सौ मीटर तक ही स्लिप रोड बनवाने की क्या जल्दबाजी थी। इसी लाइन में नीलम चौक से थोड़ी ही आगे चलने पर एस्कॉर्ट अस्पताल वालों ने तो स्लिप रोड और ग्रीन बेल्ट पर पूरी तरह अतिक्रमण कर रखा है। इस रोड पर आम आदमी को आने जाने नहीं दिया जाता, अस्पताल ने अपनी अवैध पार्किंग, मेडिकल स्टोर, कार्यालय आदि बना रखे हैं। अगर स्लिप रोड ही बनवाना है तो अस्पताल का अतिक्रमण और अवैध कब्जा भी हटवाएं। इन जगहों से उन्हें मोटा चुनावी चंदा मिलता है, बहुत संभव है कि कारोबार में भी हिस्सापत्ती तय हो इसलिए अदलखा को यह नजर नहीं आया।
विधायक ने जहां बूथ तुड़वाया है उसके पास ही अवैध रूप से बनाई गईं पांच दुकानें भी बंद पड़ी हैं। इन्हें नगर निगम ने सील कर रखा है। चर्चा तो यह भी है कि अदलखा ने इन दुकानों की सील तुड़वा कर चलाने का ठेका भी लिया है। इसकी रूपरेखा तैयार करने और दुकान मालिक को लाभ पहुंचाने के लिए विधायक ने यह ड्रामा किया है। चर्चा यह भी है कि अदलखा पूर्व मंत्री सीमा त्रिखा के फैसलों को पलट कर अपनी धाक जमाना चाहता है। लोगों ने बताया कि पूर्व मंत्री सीमा त्रिखा के कार्यकाल में नगर निगम वाले इस बूथ को हटाने का दबाव बना रहे थे। माला मल्होत्रा ने सीमा त्रिखा को इसकी जानकारी दी, समर्थक को बचाने के लिए सीमा त्रिखा ने निगम अधिकारियों को उधर का रुख नहीं करने की सख्त हिदायत दी थी, साथ ही कहा था कि अगर कुछ गड़बड़ है तो नोटिस भेजो, अदालती कार्रवाई करो, ऐसे ही मत चले जाना। बताते हैं कि उसके बाद से निगम का कोई कर्मचारी इधर नहीं आता था। बडख़ल विधानसभा का टिकट छीनने के बाद अदलखा सीमा त्रिखा के समर्थकों को भी हतोत्साहित करने में जुटा हुआ है, इसी के तहत यह बूथ गिराया गया।