फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) अधिकारियों के तलुए चाटने और उनके लिए दलाली करते हुए मोटी वसूली करने के हुनर में माहिर सफाई कर्मचारी से कर निरीक्षक पद तक पहुंचा प्रेमचंद शर्मा, निगम में पदोन्नति पाए 28 अन्य कर्मचारियों की सुरक्षा ढाल बन चुका है। दरअसल, ग्रुप डी से ग्रुप सी में पदोन्नत होने पर एक साल के भीतर ही कर्मचारी को स्टेट एलिजिबिलिटी टेस्ट इन कंप्यूटर एप्रीसिएशन एंड एप्लीकेशन परीक्षा (एसईटीसी) उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। अब क्योंकि अधिकारी, कंप्यूटर कीबोर्ड की भी जानकारी नहीं रखने वाले अपने चहेते प्रेमचंद को इस टेस्ट से बचाते आ रहे हैं, तो परीक्षा की बात आते ही बाकी 27 कर्मचारी अधिकारियों की दुखती रग यानी प्रेमचंद पर हाथ रख देते हैं। कमाऊ पूत का नाम आते ही अधिकारी बहाने बना कर साल छह महीने बढ़वा देते हैं। यानी, एक हरामखोर को बचाने के लिए बाकी निकम्मों को छूट दी जा रही है।
खुद को पूर्व मंत्री शिवचरण लाल शर्मा का पारिवारिक सदस्य बताने वाला प्रेमचंद उनकी ही सिफारिश पर नगर निगम में सफाई कर्मचारी की नौकरी पाया था। भर्ती के बाद उनकी ही कृपा से अधिकारियों ने नियम ताक पर रख कर उसे सफाई कर्मचारी से लाइब्रेरी अनुचर बना दिया था। नेताजी की कृपा से प्रेमचंद ने कभी लाइब्रेरी की शक्ल ही नहीं देखी। चपरासी होने के बावजूद निगमायुक्त, एसीएमसी, ज्वाइंट कमिश्नर, चीफ इंजीनियर जैसे बड़े अधिकारियों के कार्यालयों में दखलंदाजी कर उनका कलेंक्शन एजेंट बन बैठा। नौकरी के अतिरिक्त अधिकारियों की हर ख्वाहिश पूरी करने के लिए 24 घंटे उपलब्ध रहने की कला का उसे फायदा भी मिला। उसे 2018 में क्लर्क पदोन्नत किया गया, अधिकारियों की अनुकंपा इतनी कि पदोन्नति 2010 से देकर सारे बकाया और फायदे भी दिला दिए।
राज्य सरकार की 1998 की रूलिंग है कि ग्रुप डी से ग्रुप सी पदोन्नत होने वाले कर्मचारी को टाइपिग टेस्ट (एसईटीसी) देना होता है। टेस्ट उत्तीर्ण करने के बाद ही पदोन्नति का बढ़ा वेतन दिया जाना होता है। कर्मचारी को टेस्ट उत्तीर्ण करने के दो असवर मिलते हैँ, यदि दूसरी बार भी पास नहीं होता तो कर्मचारी को रिवर्ट कर दिया जाता है। अधिकारियों ने प्रेमचंद से टेस्ट तो दिलाया नहीं पदोन्नति का बढ़ा हुआ वेतन व अन्य भत्ते भी 2010 से दे दिए। क्योंकि प्रेमचंद शर्मा टेस्ट पास नहीं कर सकता इसलिए अधिकारी उसे बचाने में लगे हैं। 2018 में नगर निगम के 28 अन्य कर्मचारी भी पदोन्नत हुए। उन सबको भी एससीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करनी थी। तब से हर साल मुख्यालय से इन कर्मचारियों की परीक्षा दिलाने की चिट्ठी लिखी जाती है। ज्यादा दबाव पडऩे पर अधिकारियों ने अक्तूबर 2024 में प्रेमचंद शर्मा का नाम छिपाकर बाकी सबको परीक्षा देने की चि_ी जारी कर दी। अधिकारियों की चाल समझ कर कर्मचारियों ने तुरंत विरोध कर दिया था। प्रेम का नाम आते ही एक बार फिर परीक्षा टलवा दी गई। अधिकारियों को प्रेमचंद से इतना प्रेम कि पदोन्नत कर्मचारी आवाज न उठाएं इसलिए उन्हें भी बढ़े हुए वेतन भत्ते जारी करवा दिए।
बताया जा रहा है कि अब फिर मुख्यालय से एससीईटी परीक्षा करवाने का सख्त पत्र आया है। हालांकि, मैडम मोना ए श्री निवास के जाने के बाद निजाम बदल चुका है लेकिन प्रेेम अपनी सेटिंग-गेटिंग करके परीक्षा से बचने के प्रयास में लगा है। पदोन्नत हुए 28 कर्मचारी भी परीक्षा नहीं देना चाहते इसलिए प्रेमचंद शर्मा को ढाल बनाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि इन कर्मचारियों ने एक बार फिर प्रेमचंद के नाम का राग अलापना शुरू कर दिया है। दबाव बनाने के लिए कहा जा रहा है कि प्रेम तो 2010 में पदोन्नत हुआ था इसिलए सबसे पहले उसका टेस्ट हो। अधिकारियों को यह मंजूर नहीं कि उनका कमाऊ, इच्छापूर्ति करने वाला कलेक्शन एजेंट असफल हो। यानी जब तक प्रेमचंद है नगर निगम में एससीईटी परीक्षा नहीं होनी। समझा जा सकता है कि जब प्रेम जैसे नालायक और निकम्मे लोगों को सरकारी मशीनरी का पुर्जा बना दिया जाएगा तो उसकी कार्यक्षमता और दक्षता का बेड़ा गर्क होना तय है। नगर निगम में तो अनेक प्रेमचंद काम कर रहे हैं उनकी अक्षमता का नजारा शहर में जगह जगह गंदगी के ढेर, जलभराव और अव्यवस्था के रूप में देखा जा सकता है।