उद्घाटन के शौकीन मंत्री कृष्णपाल ने ‘चल-अस्पताल’ को अपने घर से दिखाई हरी झंडी

उद्घाटन के शौकीन मंत्री कृष्णपाल ने ‘चल-अस्पताल’ को अपने घर से दिखाई हरी झंडी
February 12 12:12 2026

ईएसआईसी के प्रोपेगेंडे पर लगाई अपनी मुहर
फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) स्थानीय सांसद एवं केन्द्रीय-मंत्री कृष्णपाल गूजर ने नव वर्ष के पहले दिन ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज अस्पताल द्वारा तैयार किए गए चल अस्पताल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कहने को यह ‘चल-अस्पताल’ औद्योगिक मज़दूरों को चिकित्सा सेवा पहुंचाने के लिए उनके कारखानों तक जाएगा। यह अस्पताल दो बसों पर बनाया गया है। एक में लेबोरेट्री तथा दूसरे में अस्पताल बताया जाता है। ये दो बसें नेशनल ग्रिड कॉर्पोरेशन कम्पनी द्वारा ईएसआईसी को दान में दी गई थी। उसके उपर लगने वाला सारा खर्च ईएसआई कॉर्पोरेशन वहन करेगा।

विदित है कि कॉर्पोरेशन में सरकार का कोई पैसा नहीं लगा होता। सारा पैसा हर महीने मज़दूरों के वेतन से वसूला जाता है। इसके बदले उन्हें हर तरह की चिकित्सा सुविधा प्रदान करना कॉर्पोरेशन का दायित्व बनता है। इसके बावजूद कृष्णपाल हरी झंडी दिखा कर मज़दूरों को यह बताना चाहते हैं कि वे उनके लिए कितना बड़ा काम कर रहे हैं। अपने प्रोपेगेंडे को मजबूती से पेश करने के लिए मंत्री गूजर ने इन दोनों बसों को अपने 28 सेक्टर स्थित आवास पर बुला कर यह नौटंकी करी। इस अवसर को भाजपामयी बनाने के लिए गूजर ने अपने खास पालतू बडखल विधायक अदलखा, बल्लबगढ़ के विधायक मूलचंद तथा जिला भाजपाध्यक्ष सोहनपाल के अलावा अनेकों लगवे-भगुओं को एकत्र कर रखा था। इस नौटंकी के द्वारा गूजर जी यह दिखाना चाहते थे कि वे और उनकी पार्टी औद्योगिक मज़दूरों के कितने बड़े शुभचिंतक हैं।

इस चल अस्पताल की हकीकत के बारे में ‘मज़दूर मोर्चा’ ने 7-13 दिसम्बर 2025 के अंक में विस्तार से प्रकाशित किया है। इसमें बताया गया है कि यह विशुद्ध रूप से एक राजनीतिक प्रोपेगेंडे के अतिरिक्त कुछ भी नहीं है। जो अस्पताल अपने यहां आने वाले मरीजों को पर्याप्त एवं संतोषजनक सेवा न दे सके, वह भला दर-दर भटक कर क्या सेवा दे पाएगा? वैसे भी दो बसों पर सवार इस अस्पताल का साल भर चलना भी मुश्किल ही नजर आता है, क्योंकि कभी बस में डीजल की, तो कभी टायर की, तो कभी कोई अन्य समस्याएं खड़ी ही रहेंगी। ड्राइवरों व चल स्टाफ की जो समस्याएं आएंगी वे अलग से।

यदि मंत्री कृष्णपाल व अन्य तमाम भाजपाई नेताओं को अपने क्षेत्र में चलने वाले इस मेडिकल कॉलेज अस्पताल की थोड़ी-बहुत भी चिंता होती तो वे स्वत: रुचि लेकर इस संस्थान की समस्याओं का समाधान करने के लिए अपने भाजपाईं केन्द्रीय श्रममंत्री मनसुख मांडविया से जाकर भिड़ते और तमाम समस्याओं का समाधान कराते। विदित है कि जब से मांडविया आए हैं तब से इस संस्थान का पतन तेजी से शुरू हो गया है। लेकिन इन स्थानीय नेताओं का इससे कोई लेना-देना नहीं उनका तो एक मात्र लक्ष्य अपने लगवे-भगुओं को संस्थान में कोई नौकरी अथवा ठेकेदारी या लूट कमाई करने का कोई साधन ही मिल जाए।

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Mazdoor Morcha
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