‘विकास’ को लगेंगे पंख : मेयर प्रवीण जोशी का दावा फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) दिनांक दो दिसम्बर को, सरकार द्वारा मनोनीत तीन पार्षदों बल्लबगढ़ निवासी योगेश शर्मा, गांव चंदावली निवासी जसवंत सैनी और ग्रेटर $फरीदाबाद निवासी प्रियंका बिष्ट बिधूनी को शपथ दिलाते हुए नगर निगम की मेयर प्रवीण जोशी ने बताया कि अब पार्षदों की कुल संख्या 49 होने से शहर के विकास कार्यों को पंख लग जाएंगे। विकास के तमाम रुके हुए काम अब तीव्र गति से होने लगेंगे,क्या गजब की बात कही है मेयर साहिबा ने। यानी कि जो काम जनता द्वारा चुने गए 46 पार्षद तथा बतौर मेयर वे खुद नहीं कर पा रही थी, वे सारे काम अब इन तीन सरकारी पार्षदों के आने से होने लगेंगे।
सर्वविदित है कि नगर निगम के तमाम कामों का क्रियान्वयन निगमायुक्त के दिशा-निर्देशन में अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा किया जाता है। यह काम चाहे जनता से तमाम तरह के टैक्सों की उगाही का हो अथवा निर्माण कार्यों या सफाई आदि का हो। जनता से वसूले गए टैक्सों व अन्य स्रोतों से प्राप्त किए गए धन को खर्च करने का सारा काम इन्हीं अधिकारियों द्वारा किया जाता है। हां, पार्षद एवं मेयर का केवल इतना दायित्व होता है कि वे अफसरों द्वारा कराए जाने वाले तमाम कामों तथा खर्च पर कड़ी निगरानी रखें। जनप्रतिनिधियों से जनता अपेक्षा करती है कि वे उनके क्षेत्र में सभी आवश्यक सेवाओं को सुचारु रूप से उपलब्ध करवाएं।
अभी तक देखने में यह आया है कि अधिकांश जनप्रतिनिधि यहां तक कि विधायक और सांसद भी जनता की अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर पाए हैं। सड़कों में गड्ढे हैं, सीवर उफन रहे हैं, पेयजल का भारी संकट रहता है, सड़कों व गलियों में अंधेरा रहता है, मैनहोल में लोग गिर कर मरते रहते हैं, आवारा पशुओं के घातक हमलों से लोग जान तक से भी हाथ धो बैठते हैं। बरसात में जलभराव व कीचड़ से शहर की जो दुर्दशा होती है उसे भुगतने को अभिशप्त नागरिक अपने प्रतिनिधियों को कोसने के अलावा कुछ भी कर पाने की स्थिति में नहीं होते। यह भी किसी से छिपा नहीं है कि ये जनप्रतिनिधि अपनी शक्तियों का प्रयोग निगम अधिकारियों की निगरानी करने की बजाय उनके साथ लूट कमाई में साझेदारी करके अपनी जेबें भरने में जुटे रहते हैं। जुटें भी क्यों न, जब चुनाव लगने पर करोड़ों रुपए खर्च करते हैं तो वसूली भी तो लूट कमाई से ही होगी। अवैध कब्जों व निर्माणों को संरक्षण देना, ठेकेदारों से कमीशन वसूलना, इनकी लूट कमाई के बड़े स्रोत समझे जाते हैं।
विधायक अदलखा गिरफ्तार कराएंगे निकम्मे अधिकारियों को बडख़ल क्षेत्र से विधायक धनेश अदलखा खुद महाभ्रष्ट एवं निकम्मे होने के बावजूद निगम अधिकारियों को धमकी दे रहे हैं कि वे उनके आदेशों की पालना न करने वालों को गिरफ्तार करा कर जेल भिजवा देंगे। अपने क्षेत्र में विकास के अधूरे पड़े कामों को यदि सम्बन्धित एसडीओ व जेई ने तुरन्त शुरू नहीं कराया तो वे बुधवार यानी तीन तारीख को 11 बजे कोतवाली में गिरफ्तार करवा देंगे। सवाल यह पैदा होता है कि विधायक को इस तरह के वाहियात आदेश जारी करने का अधिकार किसने दिया? वैधानिक तौर पर किसी भी विधायक एवं सांसद को यह अधिकार नहीं है कि वह सीधे तौर पर किसी भी सरकारी अधिकारी को कोई आदेश दे सके। यदि उन्हें कोई काम कराना भी है तो वे सम्बन्धित विभाग के मंत्री या अधिक से अधिक विभाग के मुख्य अधिकारी से अनुरोध ही कर सकते हैं, आदेश नहीं दे सकते, यदि आदेश देते भी हैं तो अधिकारी उन्हें मानने के लिए बाध्यकारी नहीं होते। यदि अदलखा को अपनी अदृश्य शक्तियों पर इतना ही भरोसा है तो वे एसडीओ-जेई से मत्था मारने की बजाय निगमायुक्त से ही क्यों नहीं टकराते?
सर्वविदित है कि किसी समय में खुद फाइनेंस कमेटी के चेयरमैन होते हुए 200 करोड़ का घोटाला कराने में इनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। पूर्व मुख्यमंत्री खट्टर के साथ साझेदारी रखने वाले इस विधायक ने न केवल कॉर्पोरेशन में बल्कि फार्मेसी कॉउंसिल में रहते हुए अंधी लूट मचाई थी। एक मामले में तो इनके विरुद्ध जब एफआईआर दर्ज हो गई थी तो ये खट्टर के घर में तब तक छिपे रहे जब तक डीजीपी शत्रुजीत कपूर ने केस से इनका नाम नहीं निकाल दिया। आज ये बाते करते हैं फाइलों की बजाय धरातल पर काम करने की।