करनाल। शहर को जाम मुक्त करने के लिए बनाए जा रहे टी-फ्लाईओवर के निर्माण कार्य में एजेंसी लापरवाही बरत रही है। ड्रिल के कारण बस अड्डा मार्ग पर कई जगह पेयजल और सीवरेज की पाइपलाइन टूट गई है। ऐसे में अब एजेंसी इसका हर्जाना भरेगी। जिन लोगों का कंपनी की लापरवाही के कारण निजी नुकसान हुआ है, उनका भुगतान भी एजेंसी की ओर से किया जाएगा। यह आदेश एडीसी यश जालूका ने जारी किए हैं।
सोमवार को लघु सचिवालय में हुई सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में टी-फ्लाईओवर के निर्माण के दौरान लापरवाही और खामियों का मुद्दा गैर सरकारी सदस्यों ने उठाया। इस पर एजेंसी की ओर से दावा किया गया कि उनकी व्यवस्था दुरुस्त है। धूल न उड़े इसके लिए भी व्यापक इंतजाम हैं, निर्माण के दौरान कोई हादसा न हो, इसके लिए बेहतर ढंग से बैरिकेड लगाए गए हैं।
इस दावे पर जब सवाल उठे तो बैठक के तुरंत बाद एडीसी ने एसडीएम अनुभव मेहता, डीएसपी राजीव कुमार व एचएसवीपी सहित अन्य अधिकारियों और गैर सरकारी समिति सदस्यों के साथ मौके का मुआयना किया तो यहां एडीसी को कई खामियां नजर आईं। इस पर उन्होंने एचएसवीपी अधिकारियों और एजेंसी के प्रतिनिधि को लताड़ा। एडीसी को मौके पर धूल के गुबार उड़ते दिखे। पिलर में इस्तेमाल होने वाले सरिये के ढांचे भी बीच सड़क पर रखे मिले। बैरिकेड भी एजेंसी के बजाय यातायात पुलिस के रखे मिले। कई जगहों पर तो बैरिकेड भी नहीं थे। पिलर लगाने के लिए खोदे गड्ढों में पानी भरा था।
इस पर उन्होंने नाराजगी जताई और बिना अनुमति पुलिस के बैरिकेड लगाने पर नोटिस जारी किया। एजेंसी ने तीन चरणों का काम एक साथ शुरू कर दिया है। लेकिन व्यवस्था कहीं भी टेंडर की शर्तों के अनुसार नहीं है। ऐसे में एजेंसी से एडीसी ने कहा कि यदि क्षमता नहीं थी तो एक ही चरण का काम शुरू किया जाना चाहिए था। एडीसी ने मौके पर धूल के गुबार देखकर और लोगों की शिकायत मिलने पर एजेंसी और एचएसवीपी के अधिकारियों को निर्देश दिए कि दिन में कम से कम तीन बार पानी का छिड़काव करें, ताकि मिट्टी न उड़े। यदि जरूरत पड़ी तो चार बार भी पानी छिड़कें।
प्रमाण के तौर पर रजिस्टर में एचएसवीपी के जेई और बाजार के प्रधान का हस्ताक्षर भी कराएं। ताकि व्यवस्था समुचित रहे। इसके अलावा मिट्टी के ढेर पर हरा कपड़ा बिछाने की भी हिदायत दी। एजेंसी के बजाय पुलिस के बैरिकेड लगे देख एडीसी ने एजेंसी को शुक्रवार तक सभी व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ढाई माह से काम चल रहा है, यदि बैरिकेड एजेंसी के पास नहीं हैं तो उनका टेंडर भी रद्द किया जा सकता है। बैरिकेड नए खरीदें या बनवाएं, ये एजेंसी की जिम्मेदारी है। बैरिकेड रात में दिखाई दें, इसके लिए रेडियम टेप भी लगी होनी चाहिए। एडीसी ने कहा कि जहां-जहां पाइप टूटा है, इसे एजेंसी दो दिन में ठीक कराए। यदि मुख्य लेन टूटी है तो निगम की टीम इसे दुरुस्त करेगी। इसका खर्च एजेंसी उठाएगी। इसके अलावा जिन लोगों के निजी पाइपलाइन टूटे हैं, हादसा हुआ है या कोई चोटिल हुआ है, उसका हर्जाना भी कंपनी ही उठाएगी।