विष्णु नागर लोकतंत्र की तुमने बहुत रक्षा कर ली। तुम्हारी जरूरत अब खत्म हुई।आराम करो।अभी तक के सहयोग के लिए बहुत धन्यवाद और आभार।अब तुम्हारी खास जरूरत नहीं।और अगर तुम
राकेश कायस्थ दुनिया हंस रही है कि अतीत किस तरह बदला जा सकता है? राजनीतिक असहमति के बावजूद मेरा ये मानना है कि मौजूदा निजाम ने यह काम बहुत हद