शमी उद्दीन अंसारी सन् 1017 का एक साफ़ चमकीला दिन था, उस दिन हवा रुकी हुई थी और नन्दन क़िले से दूर, बहुत दूर क्षितिज साफ़ नजऱ आ रहा था।