बोधिसत्व मैं उन लोगों के लिए सोच रहा हूं जो बेघर हैं जिनके पास न छत है न दीवार न आंगन! वे यह पावन कर्फ्यू किस घर में रह कर
मणिपुर में दुर्योधन की छप्पन इंची छाती फाड़ कर लौट रही है द्रौपदी! अभी अभी एक स्वप्न देखा है मणिपुर में दुर्योधन की छप्पन इंच छाती फाड़ कर लौट रही