स्वास्थ्य विभाग के संरक्षण में कसाई डॉ. मधुकांत ने अपाहिज किया एक मज़दूर

स्वास्थ्य विभाग के संरक्षण में कसाई डॉ. मधुकांत ने अपाहिज किया एक मज़दूर
March 10 15:55 2025

कैबिनेट मंत्री आरती राव धंधे से अनभिज्ञ हैं या शामिल हैं

फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) सेक्टर 16 में ऑर्थोपीडिक क्लीनिक चलाने वाले डॉ. मधुकांत ने चंद हजार रुपयोंं की लालच में एक दिहाड़ी मज़दूर चंद्रबली कुमार का गलत इलाज कर उसे जीवन भर के लिए अपाहिज बना दिया। पीडि़त की शिकायत पर सीएमओ ने हमेशा की तरह डिस्ट्रक्ट बोर्ड ऑफ मेडिकल नेग्लिजेंस (बोर्ड) से जांच कराने का पाखंड किया। इसके लिए बोर्ड ने डॉ. मधुकांत को पीडि़त के सामने खूब अच्छी तरह हड़काया, डराया धमकाया और बाद में आरोप मुक्त भी कर दिया। जाहिर यह मुक्ति मुफ़्त में तो नहीं ही दी गई होगी।

संदर्भवश, सुधी पाठकों को बताते चलें कि सीएमओ के बोर्ड में आईएमए और निमा के प्रतिनिधि भी शामिल होते हैं, लेकिन जांच के नाम पर हर बार यही नाटक होता है। मज़दूर मोर्चा समय-समय पर इस बोर्ड की काली करतूतों को उजागर करके बताता रहा है कि डॉक्टरी के पेशे में कितने घिनौने लोग शामिल हो चुके हैं। न्याय न मिलने पर पीडि़त ने महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं पंचकूला में इसकी शिकायत की लेकिन लगता है सीएमओ ने उनके मुुंह में भी लॉलीपॉप दे दिया जिसके चलते वह भी खामोश रह गए। क्लीनचिट मिलने से डॉ. मधुकांत अन्य मरीजों को लूटने काटने में जुटा हुआ है। जैतपुर बदरपुर में रहने वाले पीडि़त चंद्रबली के मुताबिक उनकी दांयीं एड़ी में 18 मार्च 2024 को अचानक तेज दर्द हुआ। उन्होंने बाम आदि लगाकर घरेलू इलाज किया लेकिन तकलीफ बढ़ती गई। इस पर 21 मार्च की सुबह वह सेक्टर 16 स्थित डॉ. मधुकांत ऑर्थोपीडिक क्लीनिक पहुंचे।

डॉक्टर मधुकांत ने बिना जांच और एक्सरे कराए पैर की कोई हड्डी टूटा होना बताया। चंद्रबली ने इस पर शक जाहिर करते हुए बताया कि वह बाइक चलाकर आया है यदि हड्डी टूटी होती तो वह बाइक नहीं चला पाता और न ही ब्रेक लगा पाता, लेकिन मधुकांत ने उसे चुप कराते हुए कहा कि डॉक्टर तुम हो या मैं, जब कह रहा हूं कि हड्डी टूटी है तो बहस मत करो। इसके बाद कहा कि कम से कम 21 दिन तक प्लास्टर चढ़ाना पड़ेगा, शाम को एक तीमारदार के साथ आने को कहा गया। शाम को वह एक साथी के साथ डॉ. मधुकांत की क्लीनिक पर पहुंचे, उन्हें प्लास्टर चढ़ाने के लिए बैठा दिया गया। प्लास्टर चढ़ाने वाले कंपाउंडर ने डॉ. मधुकांत से कहा कि एक्सरे तो कराया ही नहीं गया है कौन सी हड्डी के लिए प्लास्टर चढ़ाया जाए, इस पर डॉ. मधुकांत ने कहा कि एक्सरे नहीं कराया तो अब कर लो। चंद्रबली के मुताबिक कंपाउंडर ने एक्सरे देख कर फ्रैक्चर नहीं होना बताया लेकिन डॉ. मधुकांत ने आते ही एक्सरे प्लेट पर एक जगह उंगली रख कर कहा कि यहां फ्रैक्चर है। टेबल पर लिटाने के बाद उसे चार हजार रुपये का खर्च बताया गया। मोलभाव कर साढ़े तीन हजार रुपये में बात तय हुई। चंद्रबली ने आराम मिलने की गरज से प्लास्टर चढ़वा लिया। ऑनलाइन भुगतान करने को कहा तो डॉ. मधुकांत ने सामने स्थित मेडिकल स्टोर के नाम भुगतान करवाया, अपने खाते या क्लीनिक के खाते में रकम ट्रांसफर नहीं कराई। घर पहुंचने के बाद उसके पैर का दर्द बढ़ता चला गया। उन्होंने फोन कर क्लीनिक पर संपर्क किया तो कंपाउंडर ने आठ दस दिन में दर्द कम होने का आश्वासन देकर एक दर्दनिवारक दवा लिख दी लेकिन उससे भी कोई फायदा नहीं हुआ। तकलीफ बढ़ते जाने पर वह 26 मार्च को फिर मधुकांत क्लीनिक पहुंचे लेकिन इलाज के नाम पर प्लॉस्टर में एक एक गोल सुराख कर खुली जगह को हाथ से सहलाते रहने की सलाह देकर टरका दिया गया।

तकलीफ असहनीय होने पर परिवार वालों ने 29 मार्च को उन्हें सफदरजंग अस्पताल दिल्ली में भर्ती कराया। वहां डॉक्टरों ने बिना फ्रैक्चर के प्लास्टर चढ़ाए जाने पर आश्चर्य व्यक्त किया, ऊपर से पैर में कोई घाव, मोच नहीं दिखाई दी, थोड़ी सूजन पाई गई। इस पर उनके पैर का अल्ट्रासाउंड सहित कई अन्य जांचें कराई गईं, जांच में उन्हें सेप्टिक आर्थराइटिस संक्रमित होना पाया गया। चंद्रबली के मुताबिक डॉक्टरों का कहना था कि इसका इलाज दवाओं से संभव था लेकिन प्लॉस्टर बंधने के कारण समस्या काफी गंभीर हो गई है, यदि संक्रमण बहुत बढ़ गया होगा तो पैर काटना भी पड़ सकता है। मरता क्या न करता चंद्रबली ने सर्जरी की स्वीकृति दे दी। 30 मार्च को उनके पैर का ऑपरेशन किया गया। करीब चार दिन पट्टी करने के बाद 4 अप्रैल 2024 को उनके पैर की दोबारा सर्जरी की गई। उनका पैर तो कटने से बचा लिया गया लेकिन वह इससे चलने के लायक नहीं रहे। 14 अप्रैल 2024 को उन्हें दवाएं आदि देकर डिस्चार्ज कर दिया गया, तब से आज तक वह दाएं पैर से नहीं चल पाए।

डॉ. मधुकांत द्वारा गलत इलाज किए जाने के कारण जीवन भर अपंगता झेलने को मजबूर चंद्रबली ने न्याय पाने के लिए पुलिस और सीएमओ फरीदाबाद डॉ. अशोक कुमार से शिकायत की। जैसा कि होता है पुलिस ने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि यह चिकित्सा लापरवाही का केस है इसलिए सीएमओ की जांच रिपोर्ट लाओ तभी कुछ कार्रवाई की जा सकेगी। शिकायत मिलने पर सीएमओ अशोक कुमार ने अपनी अध्यक्षता और बीके अस्पताल के डॉ. सतीश वर्मा, डॉ. सुमित सरदाना, एसएमओ डॉ. विकास गोयल, डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. सुशील कुमार अहलावत, नेशनल इंटिग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (निमा) के डॉ. अतुल अग्रवाल और आईएमए जिला अध्यक्ष डॉ. दिनेश गुप्ता की सदस्यता में डिस्ट्रिक्ट बोर्ड ऑफ मेडिकल नेग्लिजेंस का गठन किया। नौ सितंबर 2024 को हुई पहली बैठक में बोर्ड ने चंद्रबली के सामने ही डॉ. मधुकांत को बिना फ्रैक्चर के प्लास्ट चढ़ाने पर जमकर लताड़ा और इसे मेडिकल पेशे पर कलंक तक बताया।

बोर्ड का रवैया देख चंद्रबली को इत्मिनान हुआ कि जांच सही हो रही है और डॉ. मुधकांत दोषी करार दिया जाएगा। 27 सितंबर को हुई दूसरी बैठक में बोर्ड के सभी सदस्य पूरी तरह से डॉ. मधुकांत के पक्ष में खड़े दिखाई दिए, चंद्रबली से स्पष्ट शब्दों में कह दिया गया कि डॉक्टर की कोई गलती नहीं है, जांच बंद की जाती है। बोर्ड द्वारा बनाई गई जांच रिपोर्ट लिखा गया है कि चंद्रबली की एक्सरे रिपोर्ट में हड्डी में चोट नहीं पाई गई लेकिन यह नहीं लिखा गया कि इसके बावजूद डॉ. मधुकांत ने हड्डी फ्रेक्चर होना बता कर प्लास्टर चढ़ा दिया। इसी तरह चंद्रबली के पैर के इन्फेक्शन को साधारण बताने के लिए लिख दिया गया कि सफदरजंग में तीस मार्च को सर्जरी हुई और चार अप्रैल को उसे बेहतर हालत में डिस्चार्ज कर दिया गया। सच्चाई यह है कि चार अप्रैल को उसके पैर की दोबारा सर्जरी की गई थी, इसके बाद दस दिन तक वह सफदरजंग अस्पताल में भरती रहा था, उसे 14 अप्रैल को डिस्चार्ज किया गया। यह सब सफदरजंग अस्पताल की डिस्चार्ज स्लिप में दर्ज है। यानी बोर्ड ने न सिर्फ डॉ. मधुकांत को निर्दोष करार दिया बल्कि जांच से वह सारे तथ्य ही गायब कर दिए जो उसे दोषी बना सकते थे।

बोर्ड से धोखा मिलने पर उन्होंने जनवरी 2025 में महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं को पत्र लिख कर न्याय की गुहार लगाई। महानिदेशक कार्यालय से सिविल सर्जन फरीदाबाद डॉ. अशोक कुमार से इस पर रिपोर्ट मांगी गई। 11 फरवरी को सिविल सर्जन ने जवाब भिजवा दिया कि मामले की जांच पहले ही डिस्ट्रक्ट बोर्ड ऑफ नेग्लिजेंस से कराई जा चुकी है, यानी डॉ. मधुकांत निर्दोष हैं। चंद्रबली को अभी तक महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं की ओर से आधिकारिक रूप से कोई जवाब नहीं मिला है। बोर्ड की जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने भी हाथ खड़े कर लिए हैं। अपाहिज होने से काम छूटने के कारण चंद्रबलि और उनका परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच गया है।

जोशीली कैबिनेट मंत्री आरती राव पहली बार विधायक बनी हैं। रेवाड़ी के एक शाही परिवार से आती हैं, उनका दावा है कि वे निहायत ही ईमानदार एवं कर्तव्यनिष्ठ हैं उनके पास मायके व ससुराल पक्ष से हजारों करोड़ की संपत्ति मौजूद है, इसलिए उन्हें किसी प्रकार की लूट कमाई की आवश्यकता नहीं है, अच्छी बात है। इसके बावजूद यदि उनके महकमे में इस तरह की खुली लूट हो रही है इसका क्या मतलब समझा जाए? क्या वह इससे अनभिज्ञ हैं अथवा माना जाए कि धन अर्जन की भूख कभी समाप्त नहीं होती।

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Mazdoor Morcha
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