फऱीदाबाद (मज़दू्र मोर्चा) बीस अगस्त की रात सराय ख्वाजा पुलिस ने पत्रकार एसएस राठौर को ऐसे उठाया जैसे बहुत बड़ा आतंकवादी हो। उन पर आईटी एक्ट की धारा 67ए लगाई गई थी जिसके अनुसार उन्होंने किसी वीडियो को अपने सोशल मीडिया चैनल पर चलाया था। अदालत में पेश होते ही कोर्ट ने इस केस में जमानत मंजूर कर ली थी। पुलिस को अपनी बेइज्जती महसूस हुई तो 21 अप्रैल 2025 का पुराना केस थोपते हुए पुलिस हिरासत की मांग की। समझा जा सकता है कि जिस केस मेें अब तक गिरफ्तारी की जरूरत नहीं समझी गई उसमें आज पुलिस ने हिरासत मांग ली गई।
इस पुराने केस में बीएनएस की धारा 308 (4) यानी ब्लैकमेलिंंग का का आरोप लगाया गया है। जिसका शिकायतकर्ता से कोई लेना देना ही नहीं है यानी कि जिसे ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया गया है वह तो शिकायत ही नहीं कर रहा है शिकायतकर्ता तो कोई और तीसरा आदमी बना फिर रहा है। राठौर के वकील के मुताबिक, इस केस में भी मजिस्ट्रेट महोदय जमानत देने ही वाले थे, तभी पुलिस के पैरोकार ने उनसे दस मिनट अलग से कोई बात की, इसके बाद जज महोदय ने बेल याचिका रद्द कर दी। राठौर के वकील ने बताया कि सोमवार को सेशन कोर्ट में जमानत याचिका लगाई जाएगी। राजनेताओं व पुलिस के घपले घोटालों की पोल खोलने वाले पत्रकारों के साथ इस तरह के मामले होना कोई नई बात नहीं है।