शिक्षा विभाग की जमीन पर विद्यालय नहीं बनेगा, प्लॉट बनाकर बेचेगा हूडा

शिक्षा विभाग की जमीन पर विद्यालय नहीं बनेगा, प्लॉट बनाकर बेचेगा हूडा
March 14 17:06 2026

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा)
सेक्टर 16 स्थित जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय परिसर में हूडा ने आवासीय भूखंड परियोजना निर्माण शुरू किया है। यह पांच एकड़ का वह भूखंड है जिसे हूडा के कागजों में स्कूल के लिए आरक्षित किया गया था। स्कूल तो नहीं बना लेकिन इसमें जिला शिक्षा विभाग के कार्यालय खोल दिए गए। अब हूडा द्वारा इस पांच एकड़ में से तीन एकड़ कब्जे में लेकर यहां चालीस फुट चौड़ी सड़क और आवासीय भूखंड विकसित किए जा रहे हैं। इसके लिए परिसर में लगे तीन सौ पेड़ उखाड़ दिए गए हैं, हालांकि हूडा अधिकारी इन्हें दूसरी जगह शिफ्ट करने का दावा कर रहे हैं लेकिन भूतकाल में हुई पेड़ों की इस तरह की शिफ्टिंग के परिणाम देखते हुए कहा जा सकता है कि यह भी एक लूट कमाई का एक बड़ा जरिया है। पेड़ उखाडऩे और लगाने के लिए लाखों रुपये खर्च दिखा रकम की बंदरबांट हो जाती है। अन्यथा हूडा के अधिकारी बताएं कि उखाड़ के पेड़ कहां लगाए गए। पहले से खराब वायु गुणवत्ता की और भी एैसी तैसी हो जाए अधिकारियों के ठेंगे से।

जानकारों की मानें तो हूडा कोई आवासीय प्रोजेक्ट नहीं चलाने जा रहा, दरअसल शिक्षा विभाग से सटा हुआ गूजर भवन है। इस गूजर भवन में पार्किंग की पर्याप्त जगह नहीं है। समाज के बड़े कार्यक्रमों के दौरान आने वाले वाहनों की पार्किंग के लिए गूजर समाज बड़ी जगह की जरूरत महसूस कर रहा था। अब केेंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर से लेकर प्रदेश में राजेश नागर मंत्री हैं, इन दोनों के होते हुए भी यदि गूजर भवन के लिए बड़ी पार्किंग की व्यवस्था न हो तो क्या फायदा। बताया जा रहा है कि इसीलिए हूडा से अचानक यह प्रोजेक्ट बनवाया गया। खास बात यह है कि पूर्व विधायक नरेंद्र गुप्ता ने 2024 विधानसभा चुनाव की घोषणा से कुछ पहले इस परिसर की खाली पड़ी ज़मीन पर करीब पचास लाख कीमत वाले बैठक कक्ष का लोकार्पण किया था, इस भवन को भी रास्ता बनाने के लिए तोड़ दिया गया। यानी जनता की गाढ़ी कमाई के पचास लाख मिट्टी में मिला दिए गए। जो तीन सौ पेड़ उखाड़े गए हैं वहां पार्किंग की व्यवस्था की जाएगी। वाहनों को आने जाने और निकलने में कोई समस्या न हो इसके लिए चालीस फीट चौड़ा रास्ता बनाया जा रहा है।

अगर यह बात सामने आए कि गूजर भवन की सेवा के लिए करीब पचास लाख रुपये लागत वाली बैठक कक्ष इमारत तोड़ दी गई और पेड़ उखाड़ दिए गए तो जनता नाराज हो जाएगी। ऐसे में लोगों को वरगलाने के लिए हूडा के अधिकारियों ने आनन फानन आवासीय प्लॉट काटने का प्रोजेक्ट बना दिया। कोई विरोध करे इससे पहले ही सिर्फ एक दिन में डेढ़ साल पहले बनी उक्त इमारत जमींदोज कर दी गई, अब यहां सड़क बनाई जा रही है। हूडा के जानकार कहते हैं कि सड़क बनाने के लिए ई टेंडरिंग में भी खेल किया गया। ठेका किसको दिया जाना है यह तो अधिकारी पहले ही तय कर चुके होते हैं, ई टेंडरिंग का दिखावा किया जाता है। शिक्षा विभाग की जमीन पर जिस तरह आनन फानन कब्जा, तोडफ़ोड़ और पेड़ उखाडऩे का काम किया गया, यहां भी ई टेंडरिंग में खेल किए जाने की प्रबल आशंका है।

समझा जा सकता है कि जब सरकार ही शिक्षा की ऐसी तैसी करने में जुटी हो तो आश्चर्य नहीं कि स्कूल के लिए आरक्षित जमीन के पेड़ उखाड़ कर, हरियाली-पर्यावरण बर्बाद कर फ्लैट बनवाए जाएं। हूडा के एसई संदीप का कहना है कि यह स्थल मूल रूप से विद्यालय के लिए चिह्नित था, लेकिन वहां जिला शिक्षा अधिकारी का कार्यालय बन गया। उनके अनुसार जिला शिक्षा विभाग के लिए दो एकड़ जमीन ही काफी है। 3 एकड़ लेकर उसमें 42 आवासीय प्लॉट विकसित किए जाएंगे, प्रत्येक प्लॉट की अनुमानित कीमत चार करोड़ होगी। एसई महोदय यहां तक को ठीक फरमाते हैं कि यह प्लॅाट विद्यालय के लिए रखा गया था, यह भी ठीक है इसमें शिक्षा विभाग का कार्यालय बन गया लेकिन सवाल यह पैदा होता है कि बची हुई जमीन में विद्यालय बनाने की बजाय प्लॉटिंग करके मुनाफाखोरी करने का क्या उद्देश्य है। उन्होंने दावा किया कि इसके लिए 46 लाख की लागत से सड़क निर्माण कराया जा रहा है। इसके लिए बैठक कक्ष हटाया गया है और लगभग 300 पेड़ों को स्थानांतरित किया गया है। जानकारों का मानना है कि एसई महोदय प्लॉटिंग का सिर्फ दिखावा कर रहे हैं, दरअसल यह पूरी तीन एकड़ जमीन गूजर भवन की सेवा में लगाई जाने वाली है।

सरकारी नौकरी कर रही जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. अंशुल सिंगला को पक्के तौर पर यही नहीं मालूम है कि जमीन किसकी है, उनके अनुसार संबंधित जमीन हूडा की बताई गई है, प्राधिकरण ने नक्शा प्रस्तुत कर इसे अपनी संपत्ति बताया है, जमीन किसकी है दस्तावेजों की विस्तृत जांच करने के बाद ही कुछ बता पाएंगी। सवाल यह है कि जब हूडा ने विद्यालय के लिए जमीन आरक्षित कर रखी थी तो उसमें विद्यालय क्यों नहीं बनाया जा रहा। इसे किस नियम के तहत कब्जे में लेकर प्लॉटिंग की जा रही है। इससे नाराज स्थानीय लोगों का कहना है कि जब हूडा को यहां स्कूल नहीं बनाना था और प्लॉट काट कर मुनाफा लूटना ही मकसद था तो 2024 में बैठक कक्ष की इमारत का निर्माण रुकवा देना चाहिए था, लाखों रुपये बर्बाद तो न होते। पर्यावरण प्रेमियों ने भी तीन सौ हरे भरे पेड़ काटे जाने पर चिंता जताई है कि शहर की वायु गुणवत्ता पूरे साल खराब और बेहद खराब के बीच रहती है ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में पेड़ काटे जाना पर्यावरण के लिए अपूरणीय क्षति होगा।

सुधी पाठकों को याद दिला दें कि बीते साल करनाल में इसी तरह करनाल में भाजपा कार्यालय बनाने के लिए चालीस पेड़ काटे गए थे। पूर्व सैनिक की याचिका पर दस दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन ने सख्त फैसला सुनाते हुए हरियाणा की सैनी सरकार को आदेश दिया था कि तीन महीने में जमीन को उसकी पुरानी स्थित में लौटाया जाए, यानी जहां पेड़ काटे गए हैं वहां फिर से पेड़ लगाकर उसी तरह हरा भरा किया जाए। यहां तो चालीस नहीं तीन सौ पेड़ काट डाले गए। मामला क्योंकि सत्तापक्ष का है और शहर में अधिकतर कथित समाजसेवी सत्ता के चाटुकार हैं इसलिए यहां के किसी समाजसेवी-पर्यावरण प्रेमी ने न्यायालय में याचिका नहीं दायर की है। दरसअल, जब सरकार ही कल्याणकारी की जगह व्यापारी बन जाए तो फिर आम जनता का ऐसे ही शोषण होता रहेगा।

मंत्री द्वय गूजर-नागर के सजातीयों के सामने नतमस्तक प्रशासन
सबका साथ सबका विकास जैसे जुमले उछालने वाली भाजपा के शासन में प्रशासन केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर और मंत्री राजेश नागर के सजातीयों के सामने पूरी तरह नतमस्तक हैं। ये लोग चाहे कानून को हाथ में लें या अवैध कब्जे, वसूली करें, बिजली चोरी करें या कोई भी अवैध अनैतिक काम करें, किसी अधिकारी की क्या मजाल कि उनके खिलाफ कार्रवाई करने की हिम्मत कर सके।
नहरपार अनअप्रूव्ड इलाकों में मंत्रियों के भाई-भतीजे जमकर अवैध कॉलोनियां काट रहे हैं, यहां तक कि सरकारी जमीन पर भी अवैध कब्जे और प्लॉटिंग का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। बड़े पैमाने पर हो रहे इन अवैध निर्माणों की जानकारी होने के बावजूद जिला नगर योजनाकार महोदय, कार्रवाई की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। नतीजतन निर्माण धड़ल्ले से जारी है। हूडा की जमीनों पर अवैध कब्जों का बयान तो ऊपर हो ही चुका है। समझा जा सकता है कि जब ईओ नवीन कुमार मंत्रियों की चापलूसी और जी हुजूरी में लगे हों तो वह उनके सजातीयों कैसे कार्रवाई करेंगे। इन अधिकारियों को छोडि़ए सीधे मुख्यमंत्री नायब सैनी को रिपोर्ट करने वाला मुख्यमंत्री उडऩदस्ता भी मंत्रियों के सजातीयों का मामला होने पर दुम दबा कर लौट जाता
है।
हूडा के सेक्टर 46 में फायर स्टेशन और सती माता मंदिर के पीछे मंत्री गूजर के सजातीय द्वारा किए जा रहे अवैध कब्जे और निर्माण की जांच मुख्यमंत्री उडऩदस्ते ने कई बार की लेकिन हर बार बिना कोई कार्रवाई किए ही लौट गया। बड़ौली में हूडा की जमीनों पर कब्जा जमाए गूजरों की महिलाओं ने प्रदर्शन के दौरान महिला पुलिस पर हमला बोल दिया, उससे हाथापाई की, थानाध्यक्ष तो खैर प्यादा है, घटना की जानकारी होने के बावजूद पुलिस आयुक्त सतेंद्र गुप्ता तक सरकारी मुलाजिम पर हाथ उठाने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के आदेश जारी करने की हिम्मत नहीं जुटा पाए, दरअसल उन्हें भी मालूम है कि हमला करने वाले केंद्रीय मंत्री गूजर के समुदाय से हैं। बहुत संभव है कि गुप्ताजी ने उल्टे पुलिस वालों को धमकाया होगा कि तुम वहां करने क्या गए थे। इसी फरीदाबाद ने एक जमाना वह भी देखा है जब डीसीपी विजय प्रताप सिंह व सीपी सुभाष यादव के नेतृत्व में गूजर समर्थकों की अच्छी खातिर तवाजो की गई थी जब वे थाना ओल्ड फरीदाबाद में गुंडागर्दी करने घुस आए थे। इसे लेकर कृष्णपाल गूजर बहुत तिलमिलाए थे। जब पुलिस नेतृत्व ही किसी के चरणों में लोटपोट होने लगे तो छोटे पुलिसकर्मियों से कोई क्या तवक्को कर सकता है।

बिजली निगम सूत्रों के अनुसार सबसे ज्यादा लाइन लॉस यानी बिजली चोरी केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर के गांव मेवला महाराजपुर और उसके आसपास के इलाकों में है। अधिकारी भी इसे अच्छी तरह से जानते हैं लेकिन बिजली चोरी पकडऩे का अभियान उस इलाके में चलाने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। जाहिर सी बात है कि इस लाइन लॉस यानी बिजली चोरी की वसूली दूसरे उपभोक्ताओं से की जाती है। भाजपा की बीते 12 साल की सरकारों में कृष्णपाल गूजर के मंत्री बनने के साथ ही उनके सजातीयों द्वारा पहाड़ों पर कब्जे करने, अवैध बोरिंग कर दिल्ली तक पानी बेचने, साप्ताहिक बाजारों से वसूली, अस्थायी बाजार, मंडी, रेहड़ी वालों से वसूली आदि बड़े पैमाने पर बढ़े हैं। हूडा हो या नगर निगम सबकी ग्रीन बेल्टों पर कब्जे किए जा रहे हैं। नहरपार की बड़ी बड़ी सोसायटियों में मंत्री गूजर के समर्थकों की खुली गुंडागर्दी चलती है। इन सोसायटियों में सिक्योरिटी, पानी आपूर्ति, सीवर टैंक, मेंटिनेंस आदि सेवाओं पर इन गूजरों का कब्जा है, और ये मनमानी वसूली करते हैं। इन सोसायटियों में अधिकतर बाहर से आए लोग ही रहते हैं ऐसे में उनके साथ ये लोग आए दिन मारपीट करते रहते हैं।

जेनरेटर से बिजली आपूर्ति के नाम पर मनमानी वसूली का विरोध या लापरवाह सिक्योरिटी गाड्र्स की शिकायत करने वाले रेजिडेंट्स को बुरी तरह से पीटना, यहां तक कि हाथ पैर तोडऩे में मंत्री गूजर के ये गुंडे जरा नहीं सोचते। मंत्री की सिफारिश पर थानेदारी हासिल करने वाले पुलिसकर्मी पीडि़तों की शिकायत सुनते ही नहीं, यदि ज्यादा दबाव पड़ा तो विपक्ष की ओर से भी झूठी शिकायत दिलाकर क्रॉस केस का दबाव बना कर चुप कराया जाता है। गूजर के ये गुंडे बुजु्र्ग रेजिडेंट्स, महिलाओं तक को पीटने में पीेछे नहीं रहते, उन्हें मालूम है कि चाचा मंत्री के होते कोई कुछ नहीं कर सकता। मंत्री की जी हुजूरी में लगे निगमायुक्त हों या हूडा के अधिकारी चूं तक नहीं करते। इनके अलावा शायद ही कोई सरकारी विभाग हो जिसमें मंत्रियों का रुतबा दिखा कर उनके सजातीय अधिकारियों पर दबाव न बनाते हों।

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Mazdoor Morcha
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