फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) नरेंद्र मोदी ने पहली बार प्रधानमंत्री बनते ही स्वच्छता के नाम पर लूट कमाई का स्वच्छ भारत मिशन चालू किया था। मोदी की घोषणा के बाद पूरे देश में शौचालय बनाने की बाढ़ आ गई थी, जाहिर है कि ये शौचालय भी संघी ठेकेदारों, नई नई सत्ता में आए जनप्रतिनिधियों के रिश्तेदारों द्वारा ही बनाए जाने थे। फरीदाबाद में भी बीते बारह सालों में शौचालय के नाम पर जम कर लूट कमाई हुई। अब फिर दस करोड़ रुपये से 35 सार्वजनिक शौचालय बनाने की तैयारी है। यानी एक शौचालय करीब 29 लाख रुपये में बनाया जाएगा जबकि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर बनाने के लिए सरकार महज ढाई लाख रुपये देती है, यानी एक शौचालय की कीमत 11 प्रधानमंत्री आवासों से भी ज्यादा है।
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार ये शौचालय भी स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनाए जाएंगे। पाठकों को याद दिला दें कि वर्ष 2014 में पीएम मोदी की घोषणा होते ही नगर निगम ने पूरे शहर में 1200 शौचालय स्थापित करवाए थे। बताने की जरूरत नहीं है कि इन प्रीकास्टेड शौचालयों की आपूर्ति का ठेका तत्कालीन भाजपा विधायक सीमा त्रिखा के भाई को मिला था, इसलिए कीमत भी बाजार मूल्य से कई गुना ज्यादा खर्च की गई। खास बात ये रही कि अधिकतर शौचालय कागजों में ही लगा दिए गए जिनका आज तक पता नहीं है। नेताओं और अधिकारियों का इतनी लूट कमाई से दिल नहीं भरा तो 2016 में 292 और शौचालय स्थापित किए गए।
थोक में पंद्रह से बीस हजार रुपये में मिलने वाले इन शौचालयों के लिए प्रत्येक पर 68 हजार पांच सौ रुपये खर्च किए गए थे। उस समय शहर में चालीस वार्ड थे यानी प्रत्येक वार्ड में 398 शौचालय लगाए गए, अव्वल तो ये नजर नहीं आते कहीं इक्का दुक्का दिख जाते तो ये इस्तेमाल योग्य ही नहीं होते या बंद पड़े होते हैं। इसके बाद मोदी ने स्मार्ट सिटी की घोषणा की तो केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर की बांछें खिल गईं, दो करोड़ की लागत से दस स्मार्ट टॉयलेट बनवाए गए, इसमें भी जमकर बंदरबांट हुई। खास बात यह रही कि ये सभी स्मार्ट टॉयलेट उद्घाटन के बाद से चले ही नहीं और जंग खाकर बर्बाद हो गए यानी जनता के दो करोड़ मोदी-गूजर की भेंट चढ़ गए। बीते वर्ष पांच करोड़ की कीमत वाले दस आकांक्षी शौचालय खोलने का ढिंढोरा पीटा गया, ये शौचालय भी गूजर के स्मार्ट शौचालय की तरह ही बनाए जाने थे लेकिन ये वातानुकूलित होते। निगम सूत्रों के अनुसार वर्तमान में शहर में मात्र साढ़े तीन सौ शौचालय ही रह गए हैं यानी 1200 से अधिक शौचालय गायब हो गए जिनकी कीमत लाखों रुपये होती। इन गायब हुए शौचालयों के लिए आज तक निगम अधिकारियों ने कोई एफआईआर दर्ज नहीं कराई, कराते भी क्यों जब उन्होंने ये सारे कागज पर ही लगा रखे थे, तो गायब होने ही थे। अब सार्वजनिक शौचालयों का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, इनके नाम पर भी नेता-मंत्री और अब पार्षद सब मिलकर दस करोड़ लूट-बांट खाएंगे। बीते दस साल में शौचालयों का जो हाल हुआ है उसके मद्देनजर कहा जा सकता है कि यदि दिखावे के लिए ये शौचालय बनाए भी जाएंगे तो गूजर के स्मार्ट शौचालय, सीमा त्रिखा के भाई द्वारा लगवाए गए 1200 शौचालयों की तरह ये भी गायब हो जाएंगे।