बल्लबगढ़ (मज़दूर मोर्चा) चार दिसम्बर को नगर निगम ने सेक्टर तीन की पुलिस चौकी के लगभग सामने 50 से अधिक घरों के वे कमरे तोड़ दिए जिन्हें अनाधिकृत रूप से बनाया गया था। ये छोटे-छोटे मकान करीब 40 साल पहले हाउसिंग बोर्ड ने बना कर लोगों को बेचे थे। अपने घरों का विस्तार करने के लालच में लोगों ने अपने पिछवाड़े पड़ी खाली जमीन पर एक-एक दो-दो कमरे अवैध रूप से बना लिए थे। इस निर्माण से घरों का रकबा लगभग दो गुना हो गया, जाहिर है कि इससे मकानों की किमते काफी बढ़ गई।
उक्त अवैध निर्माणों के करीब 30-35 सालों बाद अब यकायक नगर निगम को ये नजर आने लगे। तर्क यह दिया गया है कि इन अवैध निर्माणों की वजह से बरसाती जल निकासी बाधित होती है। लेकिन वास्तव में ऐसा कुछ नहीं है क्योंकि वहां से गुजरने वाला नाला सही-सलामत है और उसके बहाव में किसी प्रकार की कोई रुकावट उक्त निर्माणों से नहीं हो रही। वैसे भी नगर निगम को किसी अवैध निर्माण को तोडऩे के लिए किसी बहाने की जरूरत होनी नहीं चाहिए। यहां प्रश्न केवल एक ही बनता है कि अवैध निर्माण होते समय निगम कहां सो रहा था? पहली ईंट लगते ही निगम कर्मचारियों ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की? जाहिर है उस समय कार्रवाई न करने के एवज में अपनी जेबें गर्म कर ली गई थीं।
हाउसिंग बोर्ड द्वारा निर्मित मकानों में इस तरह के अवैध निर्माण की समस्या केवल इसी सेक्टर में नहीं बल्कि प्रत्येक सेक्टर में है। प्रशासनिक उदासिनता एवं भ्रष्टाचार के चलते जब एक मकान वाला अतिक्रमण करता है तो दूसरे भी प्रेरित होकर एक से बढ़ कर एक अवैध निर्माण करने लगते हैं। इसके चलते आज इन कॉलोनियों की स्थिति इतनी भयंकर हो चुकी है कि आग लगने की स्थिति में फायर-टेंडर तो क्या छेटा-मोटा ट्रक भी इन गलियों में घुस नहीं पाता। बेशक इसे लेकर प्रशासन अब इन सभी अवैध निर्माणों को तोडऩे की धमकी तो जरूर दे रहा है परन्तु इतनी बड़ी जनसंख्या का आक्रोश झेल पाने की स्थिति सरकार की नहीं दिखती।