फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुमलेबाजी और दिखावे की ट्रेनिंग पाए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बीते 4 अक्तूबर को ढोल-नगाड़ों के बीच बड़े जोर शोर से म्हारी सड़क ऐप लॉन्च कर डाला। एप लाँच करते हुए सीएम ने भी पिछले सीएम खट्टर की तरह बड़े-बड़े जुमले उछाले कि अब एप पर शिकायत डालते ही दो तीन दिन में सड़क के गड्ढे भर दिए जाएंगे, दुरुस्त कर दिए जाएंगे।
जीआईएस-आधारित मैपिंग और रीयल-टाइम रिपोर्टिंग का झुनझुना बजाते हुए सीएम सैनी इसे ई-गवर्नेंस की क्रांति बता रहे थे, लेकिन हकीकत में यह बस सस्ती लोकप्रियता बटोरने और वोटबैंक की राजनीति का महज एक फर्जीवाड़ा ही है। दरअसल, खट्टर ने 15 सितंबर 2017 को हरपथ एप लॉन्च किया था, तब उन्होंने भी जुमला उठाला था कि जीपीएस और फोटो के साथ शिकायतें दर्ज होंगी और विभाग 72 घंटों में मरम्मत करेगा। शुरुआत में हजारों लोगों ने एप डाउनलोड किया और शिकायतें दर्ज कराईं, एक सप्ताह तक तो अधिकारियों में जोश दिखा और चंद गड्ढे भरे भी गए जिन पर भाजपाइयों ने खूब तालियां बजाईं, लेकिन जल्द ही पोल खुल गई। एप इस्तेमाल करने वाले बार बार शिकायतें करते रहे, गड्ढे तो भरे नहीं गए लेकिन एप पर हर बार ‘संज्ञान लिया गया’ का मैसेज डाल कर मामला खत्म कर दिया गया यानी कोई मरम्मत नहीं हुई।
एक महीने में ही खट्टर का हरपथ एप बुरी तरह फ्लॉप साबित हो गया था। इसके खिलाफ तो सोशल मीडिया पर लोगों ने खुलकर भड़ास निकाली थी। सबसे ज्यादा सवाल पूछा गया था कि हरपाथ हरियाणा ऐप फेल क्यों हो गया? यहां तक कि इसकी असफलता की आंच सरकार की दूसरी योजनाओं तक पहुंची थी, लोगों का कहना था कि यह भी शिक्षा सेतु एप की तरह फेल हो जाएगा। हालांकि एप पूरी तरह फेल होने के बावजूद खट्टर सरकार 84 प्रतिशत सड़कों का कवरेज करने का दावा करती रही लेकिन जमीनी हकीकत सबके सामने है। गड्ढे आज भी मौत के फंदे बने हुए हैं, और हरपथ ऐप महज डिजिटल कचरा साबित हो कर गुम हो गया। अब सीएम सैनी ‘म्हारी सड़क’ लॉन्च कर पारदर्शिता और नागरिक भागीदारी की दुहाई देते दिख रहे हैं, लेकिन लॉन्च के महज 12 दिनों में इस योजना का हाल भी खट्टर के एप जैसा ही हो गया है। लोग बता रहे हैं कि म्हारी सड़क ऐप पर शिकायत की गई तो अधिकारियों ने संपर्क कर शिकायत वापस लेने का अनुरोध किया कारण बताया कि अभी बजट ही नहीं जारी किया गया है, बिना बजट के मरम्मत मुमकिन नहीं है।
जानकार कहते हैं कि बिना मजबूत जवाबदेही के यह ऐप भी हरपथ की तरह प्रचार स्टंट साबित होगा। सड़कें टूट रही हैं, लेकिन वादे चमकते रहते हैं। मानसून के बाद गड्ढे दुर्घटनाओं का सबब बने हुए हैं। ऐप की समयबद्ध मॉनिटरिंग और फोटो अपलोड जैसी चीजें तो अच्छी लगती हैं, लेकिन अगर बजट ही नहीं होगा तो अधिकारी क्या खाक करेगा। ऐसे में आम आदमी तो ‘क्लोज्ड विदाउट एक्शन’ लिखकर पल्ला झाडऩे वाले अधिकारियों को ही दोषी करार दे सकता है जबकि सच्चाई यह है कि जब सरकार केवल झूठ बोल कर वाहवाही लूटने के लिए इस तरह की योजनाएं लागू करे तो अधिकारी क्या कर लेंगे जिनके पल्ले इन्हेें लागू करने के लिए कुछ नहीं है। जनता तो है हीे गड्ढों वाली सड़क पर चलकर घायल होने और मरने के लिए। नायब सैनी सरकार नया हरियाणा विजन का राग अलाप रही है, और 9,410 किलोमीटर की 4,227 सड़कों की मरम्मत का वादा कर रही है। लेकिन इतिहास गवाह है कि खट्टर के जमाने में भी ऐसे ही दावे हुए, और नतीजा? लूट का पुलिंदा! अगर सैनी सरकार वाकई सड़कों को ‘म्हारी’ बनाना चाहती है, तो ऐप से आगे बढ़कर जिम्मेदारों पर शिकंजा कसे, वरना यह महज करदाताओंं का पैसा बर्बाद करने का जरिया बनेगा। नागरिक म्हारी सड़क ऐप डाउनलोड तो करें, लेकिन कोई उम्मीद न करें क्योंकि सड़कें तो हमारी हैं, लेकिन लूट ‘उनकी’।